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प्यारे मियां यौन शोषण केस:दुष्कर्म पीड़िता की मां ने शाहजहांनाबाद पुलिस से कहा- मैं अपराधी नहीं हूं, जो बयान देने थाने आऊं

भोपालएक वर्ष पहले
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नाबालिगों के परिजनों की होम स्टडी कराएगी बाल कल्याण समिति - Dainik Bhaskar
नाबालिगों के परिजनों की होम स्टडी कराएगी बाल कल्याण समिति
  • बेटी की मौत को 8 दिन बीते, न पुलिस बयान लेने गई, न बाल कल्याण समिति

ईदगाह हिल्स इलाके में एक फ्लैट का दरवाजा खुला है। हॉल की दीवार पर 16 साल की उस बच्ची की फोटो टंगी है, जिसकी 20 जनवरी को हमीदिया में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। तस्वीर के नीचे बूढ़ी दादी और 10 साल की बच्ची बैठी है। घर में अजीब सा सन्नाटा है। यह मकान है प्यारे मियां यौन शोषण मामले की एक पीड़िता का। उसकी मां अपनी बेटी की मौत के लिए सरकारी सिस्टम को दोषी मानती हैं।

बेटी की मौत के बाद महिला बाल विकास विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक के अफसर घर आए थे। सभी ने निष्पक्ष जांच जल्द पूरी कराने की बात कही थी। तब से अब तक 8 दिन गुजर चुके हैं। लेकिन, किसी भी जांच एजेंसी का कोई अफसर बयान लेने नहीं आया। उल्टे पुलिस, बाल अधिकार संरक्षण आयोग और दूसरी एजेंसी के अफसर रोज फोन करके बयान के लिए दफ्तर बुला रहे हें। एजेंसियां अपराधियों के जैसा सलूक कर रही है। जबकि मैं इस मामले में पीड़िता हूं।

कहा- अपराधियों जैसा सलूक कर रही हैं एजेंसियां

गुरुवार दोपहर 1 बजे शाहजहांनाबाद थाने से आरक्षक संजय और बृजेंद्र बच्ची के घर पहुंचे। उन्होंने मां को टीटी नगर थाने बयान देने के लिए जाने का फरमान सुनाया। मां ने साफ शब्दों में इनकार कर दिया। कहा- बयान लेना है तो घर आओ। मैं थाने नहीं जाऊंगी। मेरी बेटी की मौत हुई है। वह और मैं अपराधी नहीं हूं। इस पर संजय ने शाहजहांनाबाद थाना प्रभारी से उनकी बात कराई। महिला ने थाना प्रभारी को भी दो टूक अंदाज में यही जवाब दिया।

तीन तक चारों नाबालिग बालिका गृह में रहें, परिजन हुए सहमत

यौन शोषण मामले की चारों पीड़िताएं 3 फरवरी तक बालिका गृह में रहेंगी। समिति के सदस्य कृपाशंकर चौबे के मुताबिक बच्चियों की सुपुर्दगी के मामले में परिजनों ने कोर्ट में भी आवेदन लगाया हुआ है। 3 फरवरी से पहले अगर कोर्ट से कोई दिशा निर्देश मिलेंगे, तो उनका पालन सभी पक्षों को करना होगा।

नाबालिगों के परिजनों की होम स्टडी कराएगी बाल कल्याण समिति

बाल कल्याण समिति चारों नाबालिगों की होम स्टडी भी कराएगी। समिति यह पता लगाएगी कि परिजनों की सुपुर्दगी में बच्चियां सुरक्षित रहेंगी अथवा नहीं ? उनकी पढ़ाई - लिखाई सहित दूसरी मूलभूत जरूरतों को वह पूरा करने में सक्षम हैं अथवा नहीं। ताकि यौन हिंसा की शिकार चारों बच्चियों का बेहतर पुनर्वास हो सके।

टालती रही पुलिस: हर बार 2-4 दिन में बेटी को छोड़ने का आश्वासन मिला

बेटी, 11 जुलाई को सहेली का जन्मदिन मनाने का कहकर गई थी। बाद में रातीबड़ पुलिस से उसके पकड़े जाने की सूचना आई। काउंसलिंग में उसने ज्यादती की बात कही। पुलिस ने प्यारे मियां के खिलाफ नाबालिगों से दुष्कर्म का केस दर्ज किया। यह सब होने में दो दिन का समय लगा।

14 जुलाई को महिला थाने से बेटी की कस्टडी मांगी। जवाब मिला- आरोपी रसूखदार है। सुरक्षा के लिहाज से बालिका गृह में रहने दो। इसके बाद जब भी बेटी की कस्टडी मांगी तो हर बार महिला थाने के अफसरों ने दो-चार दिन बाद सुपुर्द करने का आश्वासन दिया। लेकिन, छह महीने बाद सौंपा तो उसका शव।

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