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7 हजार करोड़ के अटल प्रोग्रेस-वे का काम अटका:मुरैना में जमीन देने से इनकार, श्योपुर में 30% और भिंड में 50% लाेग ही राजी

भोपालएक महीने पहले
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श्योपुर, मुरैना और भिंड से गुजर रहे अटल प्रोग्रेस-वे प्रोजेक्ट के लिए मुरैना के किसान व अन्य लोगों ने जमीन देने से इनकार कर दिया है। - Dainik Bhaskar
श्योपुर, मुरैना और भिंड से गुजर रहे अटल प्रोग्रेस-वे प्रोजेक्ट के लिए मुरैना के किसान व अन्य लोगों ने जमीन देने से इनकार कर दिया है।
  • सरकार की दिक्कत- एनएचएआई को 90% जमीन मिलने पर ही कार्यादेश जारी होगा

श्योपुर, मुरैना और भिंड से गुजर रहे अटल प्रोग्रेस-वे प्रोजेक्ट के लिए मुरैना के किसान व अन्य लोगों ने जमीन देने से इनकार कर दिया है, जबकि श्योपुर के 30% और भिंड के 50% लोग ही राजी हुए हैं। रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन के सामने अब बड़ा चैलेंज है क्योंकि जो डीपीआर नौ माह में बननी थी, वह तीन माह में ही न केवल तैयार हो गई है, बल्कि उसे केंद्र सरकार को भी भेज दिया गया है।

इसी माह केंद्र सरकार इसकी अधिसूचना जारी कर सकती है। जुलाई से मप्र सरकार निजी भूमि का अधिग्रहण शुरू करेगी। एनएचएआई का प्लान भी ऐसा है कि जब तक उसे 90% जमीन नहीं मिलेगी, वह टेंडर करके कार्यादेश जारी नहीं करेगा। इस प्रोजेक्ट में चंबल के बीहड़ों समेत कुल 3055 हेक्टेयर भूमि आएगी।

इसमें से 1523 हेक्टेयर सरकारी, 1248 हेक्टेयर निजी और 284 हेक्टेयर वन भूमि है। राज्य सरकार ने शासकीय जमीन दे दी है। निजी में भू-स्वामियों से बात शुरू हो गई है। अटल प्रोग्रेस-वे का कुछ हिस्सा उत्तरप्रदेश और राजस्थान में भी बनना है। मप्र की पहल पर राजस्थान सरकार ने स्वीकृति दे दी है। उप्र में प्रस्ताव विचाराधीन है। पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई का कहना है कि एनएचएआई को जल्द 90 फीसदी जमीन अधिग्रहित करके दे सकें ताे काम जल्द प्रारंभ हो जाएगा।

जमीन के बदले जमीन की नीति बनी मुश्किल

श्योपुर में 506 हेक्टेयर निजी भूमि आ रही है। सरकार की योजना जमीन के बदले जमीन देने की है। श्योपुर के 30% किसान व ग्रामीणों ने स्वीकृति दे दी है। मुरैना में 621 हेक्टेयर जमीन है, जिसे देने पर सहमति नहीं मिली है। वे लोग जमीन के बदले पैसा मांग रहे हैं, क्योंकि बीहड़ की जमीन बदले में लेने से उन्हें कोई फायदा नहीं दिख रहा। भिंड में 118 हेक्टेयर जमीन में 50% लोग देने पर सहमत हो गए हैं। मुरैना केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का संसदीय क्षेत्र भी है।

बड़ा फायदा : हाई पोटेंशियल इंडस्ट्रियल जोन बन जाएगा क्षेत्र

दिल्ली, हरियाणा, उप्र और राजस्थान से निकटता और बेहतर कनेक्टिविटी बनने के बाद यह क्षेत्र हाई पोटेंशियल इंडस्ट्रियल जोन बन जाएगा। उद्योग विभाग का कहना है कि चार रीजन बनेंगे। पहला लॉजिस्टिक हब, दूसरा बुंदेलखंड डिफेंस कॉरिडोर, तीसरा इंटर सेक्शन ऑफ ईस्ट-वेस्ट एंड आगरा-मुंबई हाईवे और चौथा रीजन कृषि आधारित आर्थिक क्षेत्र होगा। इससे चंबल क्षेत्र के मालनपुर, बामौर एवं अन्य औद्योगिक क्षेत्र ज्यादा विकसित होंगे। चंबल क्षेत्र में डीआरडीई के साथ बड़े रक्षा संस्थान जैसे एयरफोर्स बेस महाराजपुरा, बीएसएफ टेकनपुर पहले से हैं।

चार एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा प्रोग्रेस-वे : दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर आगरा-मुंबई हाइवे, दिल्ली-कानपुर हाईवे और पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर कोटा-झांसी-कानपुर हाईवे से जुड़ेगा 312 किमी लंबा अटल प्रोग्रेस-वे।