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MP में रेमडेसिविर और ऑक्सीजन का संकट:भोपाल में 70% मरीजों को जिस इंजेक्शन की जरूरत, वो 6 दिन से बाजार में नहीं; सरकार 1 लाख डोज हर महीने मंगवाएगी

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: अजय वर्मा
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फोटो भोपाल के हमीदिया रोड स्थित दिशा फार्मा शॉप की है। यहां रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं होने का नोट चिपका दिया गया है। - Dainik Bhaskar
फोटो भोपाल के हमीदिया रोड स्थित दिशा फार्मा शॉप की है। यहां रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं होने का नोट चिपका दिया गया है।

गंभीर कोरोना मरीजों के लिए जीवनदान साबित होने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन का संकट गहराता जा रहा है। भोपाल के 51 कोविड अस्पतालों में 2400 मरीज भर्ती हैं। इनमें 1920 मरीजों को ये इंजेक्शन लगना है। इनके परिजन इंजेक्शन के लिए भटक रहे हैं। आलम ये है कि शहर के जिन पांच मेडिकल स्टॉकिस्ट को सीधे कंपनी से खरीदकर ये इंजेक्शन बेचने की अनुमति है, उनके यहां पिछले 6 दिन से रेमडेसिविर नहीं आया। जो पुराना स्टॉक है, वो दो दिन पहले खत्म हो गया।

शहर के कई कोविड सेंटर्स के मेडिकल स्टोर्स पर ऐसी ही हालत है। एक मरीज को छह डोज लगते हैं, लेकिन अभी कुछ मरीजों को इसका एक डोज लग चुका है, दूसरे के लिए वो परेशान हैं। डिमांड बढ़ने पर स्टॉकिस्टों ने स्टोर्स के बाहर बोर्ड लगा दिया है- रेमडेसिविर उपलब्ध नहीं है।

फिलहाल कलेक्टर ने इसकी उपलब्धता और सप्लाई पर निगरानी के लिए एक कमेटी बना दी है और इन पांच स्टॉकिस्ट की शॉप्स के बाहर तीन-तीन सिपाही निगरानी के लिए बैठा दिए हैं। अब सरकार की देखरेख में ही ये इंजेक्शन बिकेगा।

डॉक्टर खुद इंजेक्शन के लिए सलाह दे रहे

जिन मरीजों का एचआर सीटी (सीने में संक्रमण की जांच) स्कोर 5 या 10 भी है, उन्हें डॉक्टर रेमडेसिविर लगवाने की सलाह दे रहे हैं। यही कारण है कि इस इंजेक्शन के लिए काफी डिमांड बढ़ गई है।

मजबूरी और बेबसी; इन दो केस से समझिए...

पहला...

भाई झांसी में भर्ती, इंदौर और भोपाल में तलाश रहे इंजेक्शन

  • मेरा भाई राजेश 11 दिन से झांसी में भर्ती है। मैं दो दिन इंदौर में और चार दिन से भोपाल के मेडिकल स्टोर्स के चक्कर लगा चुका हूं। इंजेक्शन नहीं मिल रहे। - लीलाधर झा

दूसरा...

पहला डोज लग चुका, दूसरे के लिए तीन दिन से घूम रहे

  • मैं खुद पॉजिटिव हूं। जिस अस्पताल में भर्ती हूं, वहां डॉक्टर्स ने दो इंजेक्शन लगा दिए हैं। दूसरे डोज के लिए घर वाले तीन दिन से परेशान हैं। - आलोक शर्मा

एडवांस में रुपए जमा किए, इंजेक्शन फिर भी नहीं मिला
रेमडेसिविर इंजेक्शन फरवरी में आसानी से उपलब्ध था। मार्च के अंतिम हफ्ते और अप्रैल के पहले हफ्ते में ये आउट ऑफ स्टॉक हो गए। जिनके पास कुछ इंजेक्शन बचे भी हैं, वो दोगुनी कीमत वसूल रहे हैं। एक स्टॉकिस्ट ने बताया कि कई मरीजों के परिजनों ने 10 से 12 दिन पहले ही इंजेक्शन की एडवांस बुकिंग कर ली। पैसे भी दे दिए, लेकिन उन्हें अब तक सप्लाई नहीं मिली। हर दिन इंजेक्शन के लिए एक हजार से ज्यादा फोन आ रहे हैं।

6 कंपनियां बना रहीं इंजेक्शन, कीमत 899 से 5400 तक
देश में इस इंजेक्शन को बनाने वाली 6 फार्मा कंपनियां हैं। इनमें हेट्रो हेल्थकेयर हैदराबाद, मायलोन, सिपला मुंबई, जुब्लियेंट नोएडा, डॉ. रेड्‌डीज हैदराबाद और अहमदाबाद की जायडस केडिला है। इसके एक डोज की कीमत 899 से 5400 रु. तक है, पर स्टॉकिस्ट 900 से 15000 रु. तक बेच रहे हैं। हेट्रो की दवा 5400 रु. कीमत पर उपलब्ध है, लेकिन बाजार में अभी ये उपलब्ध नहीं है।

रेमडेसिविर एंटी वायरल ड्रग, पहले हफ्ते में लगना जरूरी
पल्मोरी एक्सपर्ट डॉ. पराग शर्मा ने बताया कि रेमडेसिविर एक एंटी वायरल ड्रग है। ये लंग्स इंफेक्शन होने के पहले सप्ताह में लगना जरूरी होता है। चूंकि पहले सप्ताह में वायरस वायरीनिया फेस में होता है। वह मल्टीप्लाय होता है। पहले दिन इसके दो डोज दिए जाते हैं। फिर हर दिन-एक एक डोज पांच दिन तक लगती है।

.... और सरकार का दावा- हर महीने 1 लाख इंजेक्शन खरीदेंगे
​​इंजेक्शन की किल्लत के बीच राज्य सरकार का दावा है कि किसी को परेशानी नहीं होने देंगे। कैबिनेट बैठक में तय हुआ कि सरकार हर महीने एक लाख रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदेगी। 50 हजार का ऑर्डर दे दिया है। इन्हें प्रोटोकॉल के तहत गरीब व जरूरतमंदों को दिया जाएगा। दो दिन में 35 हजार इंजेक्शन अस्पतालों में भेज दिए जाएंगे।

बैठक में प्रदेश में ऑक्सीजन सप्लाई हर दिन 300 टन करने का लक्ष्य रखा है। बैठक में तय हुआ कि हर जिला चिकित्सालय में सीटी स्कैन की व्यवस्था होगी। बड़े सरकारी भवनों में कोरोना संक्रमितों को रखा जाएगा। इसे सरकार कोविड केयर सेंटर कहेगी। सरकार ने 14 अप्रैल तक हर दिन 5 लाख वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिस मंत्री के पास जो जिला है, वो वहां की व्यवस्थाएं देखेंगे। भोपाल में विश्वास सारंग को जिम्मा मिला है।

होम आइसोलेशन के लिए मिलेगी मेडिकल किट

संक्रमण नियंत्रण के लिए बड़े शहरों में बड़े कंटेनमेंट जोन बनाए जाएंगे। होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों के लिए मेडिकल किट के साथ-साथ डाक्टरों की विजिट की व्यवस्था की जा रही है। कोविड सेंटरों पर पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आदेश जारी हो चुका है।

कालाबाजारी पर होगी सख्त कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी टेस्ट और अस्पतालों में बेड की कीमतें तय कर दी गई हैं। ऑक्सीजन की कालाबाजारी करने वालों, टेस्ट और इलाज के दौरान अधिक रकम वसूलने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

1 लाख बेड का इंतजाम

भोपाल में शुक्रवार को रिकार्ड 736 और जबलपुर में 369 नए संक्रमित मिले हैं। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कोरोना मरीजों के लिए की व्यवस्था की जा रही है। सरकार ने पहले बेड की संख्या 24 हजार से बढ़ा कर 50 हजार करने का निर्णय लिया था, लेकिन संक्रमितों का आंकड़ा बहुत तेजी से बढ़ने के कारण अब बेड संख्या 1 लाख की जा रही है। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन की व्यवस्था की जाएगी।

जिला स्तर पर मंत्रियों को जिम्मेदारी

कोरोना संक्रमण के प्रबंधन के लिए जिला स्तर पर मंत्रिपरिषद के सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वर्तमान में जो मंत्री जिस जिले से हैं वे उस जिले में व्यवस्था संभालेंगे। जिन जिलों में एक से अधिक मंत्री हैं, वे आसपास के जिलों की व्यवस्था देखेंगे।

इंदौर - तुलसीराम सिलावट

रतलाम - जगदीश देवड़ा

भोपाल - विश्वास सारंग

ग्वालियर - प्रद्धुमन सिंह तोमर

मंदसौर और नीमच - हरदीप सिंह डंग

शाजापुर - इंदर सिंह परमार

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