MP में संक्रमित परिवारों के घरों से रिपोर्ट:बड़ा बेटा संक्रमित होने पर बोला- मुझे मरना नहीं; उसकी हालत देख छोटे बेटे को नहीं बताया उसे भी कोरोना है

भोपाल15 दिन पहले

भोपाल में 40 से ज्यादा परिवारों के सभी सदस्य कोरोना संक्रमित हैं। सभी होम आइसोलेट हैं। पूरा परिवार पॉजिटिव होने से तमाम तरह की समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है। ऐसे ही दो संक्रमित परिवारों के साथ PPE किट पहनकर भास्कर संवाददाता विवेक राजपूत ने एक घंटा बिताया और उनकी तकलीफें जानीं।

1. कोलार का दानिशकुंज: डॉ. हरेंद्र सोढ़ी का परिवार

जब तक समझ पाते, कोरोना घर आ चुका था
दानिशकुंज में रहने वाले डॉ. हरेंद्र सोढ़ी का पूरा परिवार संक्रमित है। सोढ़ी खुद डॉक्टर हैं। आनंद नगर स्थित सिविल डिस्पेंसरी में ड्यूटी के दौरान वे कोरोना की चपेट में आए। वे बताते हैं- जब तक समझ में आता, कोरोना घर तक पहुंच चुका था। छोटे बेटे को सबसे पहले बुखार आया। जांच कराई तो मैं, पत्नी और दोनों बेटे पॉजिटिव निकले। जब बड़े बेटे को पता चला तो वह बहुत ज्यादा घबरा गया। बार-बार यही कहता था कि मुझे मरना नहीं है। उसकी ऐसी हालत देखकर छोटे बेटे को तो बताया ही नहीं कि उसे भी कोरोना है। रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो घर के बाहर बैरिकेडिंग कर दी गई। शुरुआती दो दिन बच्चों को कमरे में रोक पाना मुश्किल था, लेकिन अब सभी आराम ही करते रहते हैं।

सही समय पर आए बड़े भैया, उनका ही सहारा है
डॉ. सोढ़ी ने बताया कि मुंबई में रहने वाले बड़े भाई चंद रोज पहले ही हमारे घर आए थे। इस बीच हम पॉजिटिव हो गए तो वे हमारे पास ही रुक गए। वही हम सबके लिए खाना-बनाते हैं। समय पर चाय नाश्ता भी मिल जाता है। अब धीरे-धीरे तबीयत में सुधार हो रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही स्वस्थ हो जाएंगे।

2. सह्याद्रि परिसर: विनोद मेहरा का परिवार

शुरुआत में दिनभर सभी पल्स ही नापते रहते थे
डिपो चौराहा स्थित सह्याद्रि परिसर निवासी विनोद मेहरा कलेक्टोरेट में इलेक्शन सुपरवाइजर हैं। 4-5 जनवरी को उन्हें हल्का बुखार आया तो कोरोना टेस्ट के लिए 6 जनवरी को अपना, पत्नी सीमा, बेटे आकाश और बहू शिवानी का सैंपल दिया। 9 जनवरी की सुबह उनके स्टाफ के लोगों ने बताया कि चारों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

मेहरा ने बताया, 'मुझे सर्दी और खांसी ही थी। पत्नी को कोई परेशानी नहीं थी, इसलिए अपनी तो चिंता नहीं थी, लेकिन यह जानकर जरूर डर लगा कि बेटा और बहू पॉजिटिव आए हैं। शुरुआती दो दिन तक तो हम सब दिन-रात थोड़ी-थोड़ी देर में पल्स ऑक्सीमीटर से पल्स ही नापते रहते थे। मशीन भी मंगा ली थी, जिससे बारी-बारी से भाप भी लेते रहे।'

10 साल में पहली बार इतने दिन घर में ही रहे
मेहरा ने बताया कि उन्होंने 6 जनवरी को सैंपल दिया और रिपोर्ट 9 जनवरी को आई। इस बीच वे 7 जनवरी को घर से बाहर भी गए थे। यदि रिपोर्ट जल्दी मिल जाए तो लोग सतर्क हो जाएं। पत्नी सीमा ने बताया कि यह पहला मौका है जब हम लोग इतने दिनों तक घर से नहीं निकले हैं। सभी टैरेस गार्डन में ही योग करके समय बिता रहे हैं।