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दो माह से अटकी मंजूरी:रेरा ने अटका दिए 1 लाख घरों वाले 40 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट

भोपाल8 दिन पहले
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सितंबर 20 के बाद एक भी प्रोजेक्ट को नहीं मिली मंजूरी। - Dainik Bhaskar
सितंबर 20 के बाद एक भी प्रोजेक्ट को नहीं मिली मंजूरी।
  • तकनीकी सहायक और रेरा के अपने रेगुलेशन न होने का बना रहे बहाना

रेरा के चेयरमैन ने एक छोटा तकनीकी कारण बताकर दो माह से 1 लाख घरों के 40 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स की मंजूरी अटका रखी है। इससे मप्र सरकार को 5000 करोड़ के नुकसान का अनुमान है। सच्चाई यह है कि सितंबर-20 के बाद रेरा ने एक भी प्रोजेक्ट काे मंजूरी नहीं दी है। पहले छह माह तक चेयरमैन का पद रिक्त था। लेकिन 1 अप्रैल को चेयरमैन एपी श्रीवास्तव ने पदभार ग्रहण कर लिया है।

वे तकनीकी सहायक और रेरा के अपने रेगुलेशन न होने का बहाना बनाकर प्रोजेक्ट्स की मंजूरी टाल रहे हैं। यह लेटलतीफी आम आदमी, रियल एस्टेट डेवलपर और सरकार के खजाने सब पर भारी पड़ रही है। इससे अवैध डायरी सिस्टम को बढ़ावा मिल रहा है। इसके जरिए करोड़ों के अवैध सौदे हो रहे हैं। डेवलपर्स कहते हैं कि इसके लिए रेरा जिम्मेदार है। क्योंकि बिना रेरा की मंजूरी से न तो डेवलपर प्रोजेक्ट का विज्ञापन कर सकता है और न ही वैध चैनल से बुकिंग ही ले सकता है। इनकी रजिस्ट्री भी नहीं हो सकती।

रेरा चेयरमैन ने भास्कर को बताया कि इस समय केवल रेगुलेशन बनाए जा रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि अब तक इन रेगुलेशन का औपचारिक ड्रॉफ्ट तक तैयार नहीं किया गया। दरअसल, चेयरमैन तकनीकी मेंबर के ज्वाइन करने का इंतजार कर रहे हैं, जो 11 जून को ज्वाइन करने वाले हैं। उसके बाद रेगुलेशन बनाने का काम शुरू होगा।

क्रेडाई के अध्यक्ष बोले- मंजूरी मिलती तो 8,000 करोड़ रुपए मिलता राजस्व

क्रेडाई के अध्यक्ष नितिन अग्रवाल कहते हैं कि नियमानुसार रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल जाती तो वित्तीय वर्ष 2020-21 में रजिस्ट्री के राजस्व में कम से कम 2000 करोड़ की बढ़ोतरी होती और यह 6000 करोड़ से बढ़कर 8 हजार करोड़ तक पहुंच सकता था। इन सभी 1 लाख मकानों से रेरा को 5000 करोड़ का राजस्व मिलना है। लेकिन रियल एस्टेट डेवलपर यह मानकर चल रहे हैं कि इसके लिए कम से कम 40% या 40 हजार मकान 31 मार्च-21 से पहले बिक जाते। शेष 60% के लिए भी बुकिंग मिल जाती।

प्रदेश में हर माह 40-50 नए प्रोजेक्ट आते हैं। लेकिन पुरानों का ही पंजीयन न होने से डेवलर्स ने नए प्रोजेक्ट को लंबे समय के लिए टाल दिया है। प्रदेश की खस्ताहाल आर्थिक स्थिति के चलते राज्य सरकार को वर्ष 2020-21 में बाजार से 32 हजार करोड़ का कर्ज लेना पड़ा था, यह पिछले दो वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2018-19 में बाजार से लिए गए कर्ज के योग से भी ज्यादा है। इन दो वर्षों में सरकार ने क्रमश: 16 हजार और 15 हजार करोड़ का कर्ज लिया था।

लोगों को उनके सपनों के घर से दूर कर रहा रेरा

^मप्र में रजिस्ट्री की दर 12.5% है। अगर इन प्राेजेक्ट को समय पर मंजूरी मिल जाती तो सरकार को पिछले वित्तीय वर्ष 2020-21 में 2000 करोड़ रुपए ज्यादा मिलते, साथ ही इस साल इनसे 3,000 करोड़ का राजस्व आता।
ओपी पांडे, सेवानिवृत्त ज्वाइंट कमिश्नर, वाणिज्यिक कर, भाेपाल

^रेरा चेयरमैन प्राधिकरण को समझने में ज्यादा समय ले रहे हैं। वे हर नियम और कानून को ठीक से जानना चाहते हैं। लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि उनकी लेट लतीफी आम आदमी को उसके घर के सपने से दूर कर रही है।
प्रतीक जैन, रेरा मामलों के वकील

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