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संकरी सड़कें, ट्रैफिक जाम...यह है राजधानी में मार्केट का हाल:150 साल पुराना बाजार, हर दिन 30 करोड़ का कारोबार; फिर भी नहीं बदली तस्वीर

भोपाल3 महीने पहले

छोटी सड़कें, जाम ट्रैफिक और बदहाल सीवेज...। 6 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े व्यापारी और रोजाना 25 से 30 करोड़ का कारोबार। राजधानी के 150 साल पुराने मार्केट की यही पहचान है। नगर सरकारें आईं और गईं, लेकिन पुराने शहर के थोक-फुटकर बाजार की तस्वीर नहीं बदली। बात चाहे लखेरापुरा, चौक, सराफा, आजाद मार्केट की करें या जुमेराती, घोड़ा नक्कास, जनकपुरी, हनुमानगंज की... कमोबेश सभी जगह यही हालात हैं। इन बाजारों में कई रास्ते इतने संकरे हैं कि दो ऑटो एक साथ न निकल पाएं। नगर निगम चुनाव के करीब आते ही फिर से यही मुद्दा उठने लगा है। व्यापारी नोएडा मॉडल की तरह कुछ समाधान की मांग कर रहे हैं। इसलिए महापौर हो या पार्षद, जो कोई भी वोट मांगने आता है, उनसे यही बात कही जा रही है।

नगर निगम चुनाव के शोर के बीच दैनिक भास्कर टीम पुराने शहर के इन बाजारों में पहुंची। वार्ड-8, 19, 20 और 21 में बीस से ज्यादा छोटे-बड़े मार्केट हैं। थोक किराना हो या कपड़ा मार्केट। सभी जगह 3 कॉमन समस्याएं देखने को मिलीं। पहली संकरी सड़कें, दूसरी सीवेज और तीसरी पार्किंग व्यवस्था न होना। जनकपुरी, जुमेराती, हनुमानगंज, आजाद मार्केट, लखेरापुरा, चौक, घोड़ा नक्कास, हमीदिया रोड समेत कई इलाकों में भास्कर टीम पहुंची। जानिए, यहां की मुख्य समस्याएं, क्या चाहते हैं व्यापारी और क्या हैं उनकी मांगें...

यहां सुई से लेकर कार तक सबकुछ
पुराने शहर के बाजार मध्य और उत्तर विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। वार्ड के हिसाब से यह 19, 20 और 21 के हिस्से हैं। जनकपुरी, जुमेराती और हनुमानगंज में थोड़ा किराना मार्केट है। जहां से हर रोज औसतन 200 टन किराना सामान भोपाल समेत आसपास के 150Km के दायरे में पहुंचता है। लखेरापुरा, चौक में बड़ा कपड़ा मार्केट है, जबकि सराफा में 500 से अधिक दुकानें हैं। घोड़ा नक्कास में इलेक्ट्रॉनिक मार्केट है। वहीं, सब्जी मंडी शहर की बड़ी मंडियों में से एक है। कर्फ्यू वाली माता मंदिर से हमीदिया हॉस्पिटल के पास तक ऑटोमोबाइल की दुकानें हैं। यूं कहें कि पुराने शहर में आप सुई से लेकर कार तक खरीद सकते हैं। एवरेज 25 से 30 करोड़ रुपए का रोजाना का कारोबार होता है। 6 हजार से अधिक छोटी-बड़ी दुकानें हैं। 25 से 30 हजार टू-व्हीलर, फोर व्हीलर और लोडिंग गाड़ियों का आवागमन होता है।

भोपाल के पुराने शहर के बाजार में ट्रैफिक समस्या है। वहीं, सड़कों की चौड़ाई भी काफी कम है।
भोपाल के पुराने शहर के बाजार में ट्रैफिक समस्या है। वहीं, सड़कों की चौड़ाई भी काफी कम है।

ऐसे समझें पुराने शहर के बाजारों के हाल

  • कर्फ्यू वाली माता मंदिर से लखेरापुरा में एंट्री करते ही संकरी सड़कें और जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। आगे चौक तक यही हाल है।
  • सराफा बाजार में पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण सड़क पर ही गाड़ियां खड़ी की जाती हैं।
  • जुमेराती, जनकपुरी और हनुमानगंज में करीब 375 थोक किराना दुकानें हैं। यहां छोटी सड़कों से हर वक्त जाम लगता है।
  • शाहजहांनाबाद से लेकर हमीदिया रोड की हालत जर्जर है। यहां भी जाम के कारण गुजरना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
  • मारवाड़ी रोड, मंगलवारा, बुधवारा, कोतवाली, छावनी, नादरा बस स्टैंड, रॉयल मार्केट में भी बारिश के दौरान सीवेज का पानी सड़क पर आ जाता है।

क्या है नोएडा मॉडल, क्यों की जा रही इसकी मांग
नोएडा मॉडल क्या है और इसे भोपाल में अपनाने की मांग व्यापारी क्यों कर रहे हैं? इस बारे में दैनिक भास्कर ने थोक किराना व्यापारी महासंघ के महासचिव और बाजार एक्सपर्ट अनुपम अग्रवाल से समझा। अग्रवाल ने बताया कि पुराने शहर के बाजारों में कहने को 3 पार्किंग हैं, लेकिन इनमें 200 गाड़ियां भी रखने की जगह नहीं है, जबकि बाजारों में हर रोज एवरेज 30 हजार तक छोटी-बड़ी गाड़ियां आती हैं। यही कारण है दिनभर जाम लगता है, क्योंकि कई सड़कों की चौड़ाई काफी कम है। कई बार जब आग लगने की घटना होती है, तो फायर ब्रिगेड को पहुंचने में ही देरी हो जाती है। सीवेज भी बड़ी समस्या है। बारिश में नाले-नालियों का पानी सड़कों पर भर जाता है।

इन समस्याओं से निजात पाने के लिए नोएडा मॉडल अपनाने की मांग सालों से की जा रही है। नोएडा में अलग-अलग होल सेल के अलग-अलग मार्केट बने हैं। पार्किंग और सड़कों की चौड़ाई की कोई समस्या नहीं है। इस कारण वहां ट्रैफिक भी ठीक रहता है। सरकार ऐसी व्यवस्था करे कि व्यापारी और ग्राहक दोनों को कोई दिक्कत न हो।

हमीदिया रोड जर्जर हालत में पहुंच गई है। इससे राहगीरों को परेशानी होती है।
हमीदिया रोड जर्जर हालत में पहुंच गई है। इससे राहगीरों को परेशानी होती है।

मार्केट से जुड़े 8 वार्ड, कांग्रेस का दबदबा
पुराने शहर के मार्केट वार्ड-8, 19, 20 और 21 में आते हैं। इनमें 65 हजार से ज्यादा मतदाता है। वहीं, इससे वार्ड-9, 10, 11, 25, 35, 40, 41 और 43 भी जुड़े हैं। इनमें पौने 2 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। पिछले चुनाव में 5 वार्ड पर कांग्रेस, 5 पर बीजेपी और दो वार्डों पर निर्दलीय पार्षदों ने जीत हासिल की थी।

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