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UPSC क्लियर करने वालों की कहानी:सवा लाख रुपए महीने की नौकरी छोड़ शुरू की पढ़ाई, मुश्किल हालात से लड़े; कड़ी मेहनत से पाया मुकाम

मध्यप्रदेशएक महीने पहलेलेखक: ईश्वर सिंह परमार

UPSC-2020 में इस बार मध्यप्रदेश से 39 कैंडिडेट सिलेक्ट हुए हैं। एक साल में सबसे ज्यादा। इनका बुधवार को मध्यप्रदेश सरकार ने सम्मान किया। इनमें से कई ऐसे हैं, जिन्होंने मुश्किल हालातों में कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया। किसी ने 1.25 लाख रुपए महीने की नौकरी छोड़ दी, तो किसी ने सरकारी नौकरी में रहते हुए ही 7 से 8 घंटे रोज पढ़ाई की।

दो बार प्रीलिम्स एग्जाम दी, पर क्लियर नहीं हुई, इसलिए छोड़ दी नौकरी
इंदौर के सुमित कुमार सिंह की 239 रैंक है। इंदौर से BE और IIT रुड़की से M.Tech. कम्प्यूटर सांइस इंजीनियरिंग करने वाले सुमित बताते हैं कि साल 2015 से 3 साल तक पुणे की एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी की। 1.25 लाख रुपए प्रति माह सैलरी मिलती थी। इस दौरान 2 बार UPSC एग्जाम दी, लेकिन प्रीलिम्स ही क्लियर नहीं हुआ, इसलिए नौकरी छोड़ दी। इसके बाद 2018 में IRTS ऑफिसर बने। इसके बाद पढ़ाई जारी रखी और अब 229वीं रैंक मिली है।

सुमित ने बताया, जब सवा लाख रुपए महीने की नौकरी छोड़ी, तो सब हैरान भी हुए, क्योंकि परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। तब पिता प्राइवेट हॉस्पिटल में रिटायर्ड सुपरवाइजर थे, जबकि मां गृहणी, लेकिन फैसले में वे साथ रहे।

इंदौर के सुमित कुमार सिंह, जिन्होंने 239वीं रैंक हासिल की है।
इंदौर के सुमित कुमार सिंह, जिन्होंने 239वीं रैंक हासिल की है।

मुंबई में 1 लाख रुपए महीने की नौकरी छोड़ी
बैतूल के श्रेयांस सुराणा ने 269 रैंक हासिल की है। UPSC क्लियर करने के लिए श्रेयांस ने 1 लाख रुपए महीने की नौकरी छोड़ दी और फिर कड़ी मेहनत की। श्रेयांस ने बताया, बैतूल से 12वीं तक पढ़ाई की, फिर चार्टड अकांटेंट की पढ़ाई करने नागपुर चले गए। पिता भी चार्टड अकाउंटेंट हैं, इसलिए यह राह चुनी। एक साल तक मुंबई में 12 लाख रुपए के सलाना पैकेज पर नौकरी भी की, लेकिन मन नहीं लगा और नौकरी छोड़ आया। सिविल सर्विसेस के लिए सितंबर 2019 में पढ़ाई शुरू की। कोरोना की वजह से पढ़ाई पर खासा असर पड़ा। कई बार किताबें नहीं मिल पाईं। मुश्किल हालातों से लड़कर एग्जाम क्लियर कर ही लिया।

बैतूल के श्रेयांस सुराणा। इन्होंने 1 लाख रुपए महीने की नौकरी छोड़ पढ़ाई की और पास हुए।
बैतूल के श्रेयांस सुराणा। इन्होंने 1 लाख रुपए महीने की नौकरी छोड़ पढ़ाई की और पास हुए।

3 बार इंटरव्यू तक पहुंचे, पर सिलेक्ट नहीं हुए, जॉब भी छोड़ दी थी
मुरैना जिले के छोटे से गांव थरा के संदीप राजौरिया की 290वीं रैंक रही है। संदीप ने UPSC में कई बार असफलताएं देखीं, पर हार नहीं मानी। यहां तक कि नौकरी भी छोड़ दी। संदीप बताते हैं कि रीवा से स्कूल की पढ़ाई की। फिर हिमाचल प्रदेश से बीटेक किया। इसके बाद सिविल सर्विसेस की तैयारी शुरू की। आईटी कंपनी में जॉब करते हुए 2015 से 2020 तक लगातार एग्जाम दी। 3 बार इंटरव्यू तक पहुंच गया, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। बावजूद हार नहीं मानी। आखिरकार पांचवें प्रयास में रैंक हासिल की। गांवों की जिंदगी करीब से देखी है, इसलिए गांव के विकास के लिए प्रयास करूंगा।

290वीं रैंक हासिल करने वाले संदीप राजौरिया। वे मुरैना के छोटे से गांव थरा के रहने वाले हैं।
290वीं रैंक हासिल करने वाले संदीप राजौरिया। वे मुरैना के छोटे से गांव थरा के रहने वाले हैं।

नौकरी में रहकर पढ़ाई की, अब पाई 165वीं रैंक
शिवपुरी के नरेंद्र रावत ने नौकरी में रहते हुए 165वीं रैंक हासिल की। नरेंद्र बताते हैं, स्कूल के बाद से ही सिविल सर्विसेस की ओर रुझान बढ़ा। इसके चलते पढ़ाई की। दो बार सिलेक्शन भी हो चुका है। पहले इंडियन रेलवे और फिर वन सेवा में नौकरी लगी। अभी बैतूल जिले में पदस्थ हूं। सर्विस में रहकर ही मैंने पुरानी कमियों को दूर किया। मेंस की पढ़ाई ज्यादा की। ड्यूटी के बिजी शेड्यूल में से रोज 7 से 8 घंटे तक पढ़ता था। आखिरकार अच्छी रैंक आ गई।

शिवपुरी के नरेंद्र रावत। इन्होंने नौकरी में रहते पढ़ाई की और 165वीं रैंक पाई।
शिवपुरी के नरेंद्र रावत। इन्होंने नौकरी में रहते पढ़ाई की और 165वीं रैंक पाई।
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