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ये बदलाव अच्छे हैं:एक लाख रुपए से ज्यादा के फ्रॉड की ही जांच करेगी स्टेट सायबर सेल

भोपाल14 दिन पहलेलेखक: विशाल त्रिपाठी
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सोशल मीडिया फ्रॉड और एक लाख रुपए से कम के मामलों की जांच की जिम्मेदारी अब जिला पुलिस की होगी। - Dainik Bhaskar
सोशल मीडिया फ्रॉड और एक लाख रुपए से कम के मामलों की जांच की जिम्मेदारी अब जिला पुलिस की होगी।

बढ़ते सायबर अपराधों पर लगाम और अपराधियों की धरपकड़ के मकसद से राज्य सायबर पुलिस तीन बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। इसके लिए मेंडेट रीडिफाइन (जनादेश को फिर से परिभाषित), व्यवस्था में विस्तार और थानों की संख्या बढ़ाने की प्लानिंग की गई है। अब तक राज्य सरकार से जारी परिपत्र में 50 हजार तक के फ्रॉड की शिकायतों पर ही राज्य सायबर पुलिस काम करती थी।

अब इस राशि को बढ़ाकर एक लाख कर दिया गया है। यानी इससे कम राशि के सायबर फ्रॉड का इन्वेस्टिगेशन अब संबंधित जिला पुलिस को करना होगा। नौ मार्च 2021 को भास्कर ने ‘मप्र सायबर सेल में 9 इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर, भोपाल में सिर्फ 3; हर एक के पास 1900 शिकायतें पेंडिंग, ऐसे हालात में 15 दिन में कैसे सुलझेंगे केस’ शीर्षक के साथ समाचार प्रकाशित किया था। इन्हीं व्यवस्थाओं को सुधारने के मकसद से एडीजी राज्य सायबर सेल योगेश चौधरी ने 3 बड़े बदलाव किए हैं।

बड़े बदलाव की तीन कैटेगरी... ज्यादा लोगों को जल्द मिल सकेगा न्याय

1 मेंडेट रीडिफाइन

  • एक लाख रुपए से कम के सायबर फ्रॉड में बड़े गिरोह के की संभावना है तो राज्य सायबर पुलिस काम करेगी।
  • एक लाख से अधिक राशि के मामलों की विवेचना राज्य सायबर पुलिस करेगी।
  • सोशल मीडिया से जुड़े सायबर अपराधों की विवेचना की जिम्मेदारी भी जिला पुलिस के पास होगी।

ये होगा फायदा: छोटे फ्रॉड की विवेचना में कई ऐसे मामले भी दब जाते हैं, जिनमें बड़े गिरोह के पकड़े जाने की संभावना हो। इससे राज्य सायबर पुलिस की दक्षता और बढ़ेगी और ज्यादा लोगों को न्याय मिल सकेगा।

2 व्यवस्था में विस्तार

  • सायबर एविडेंस जुटाने में मदद करने वाली लैब फिलहाल भोपाल में ही है। इसे इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल में भी बेसिक तकनीकी सुविधाओं के साथ शुरू किया जा रहा है।
  • चालान के लिए जरूरी लैब की अंतिम रिपोर्ट भोपाल से ही दी जाएगी, जिसका इस्तेमाल एविडेंस के तौर पर हो सकेगा।

ये होगा फायदा: इन रेंज में सायबर लैब शुरू होने से अन्य मामलों की विवेचना में भी आसपास की पुलिस को मदद मिलेगी। साथ ही घटना से जुड़े ज्यादा से ज्यादा एविडेंस मिल सकेंगे।

3 पुलिस स्टेशन

  • मप्र में फिलहाल सायबर का भोपाल में ही एक थाना है। इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में भी सायबर थाने शुरू किए जाएंगे। यहां सायबर के भवन पहले से हैं, केवल लॉकअप तैयार करने होंगे।
  • इसके लिए राज्य सायबर पुलिस का स्टाफ भी बढ़ाया जा रहा है, ताकि ज्यादा विवेचना अफसर मिल सकें।

ये होगा फायदा : थाने और विवेचना अफसर बढ़ने से ज्यादा से ज्यादा लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा और आम लोगों की शिकायत पर सुनवाई होगी।

अभी यह होता था

सायबर का नाम सुनते ही टाल देती थी जिला पुलिस
जानकारों की मानें तो आईटी एक्ट से जुड़े किसी भी अपराध की विवेचना से जिला पुलिस बचती आई है। ओटीपी फ्रॉड, सोशल मीडिया फ्रॉड, मॉर्फिंग या ऑनलाइन स्टॉकिंग जैसे मामलों में भी फरियादी को सायबर सेल जाने की सलाह दे दी जाती थी। यही वजह है कि सायबर पुलिस के पास शिकायतें लंबित होती चली गईं। एडीजी ए साईं मनोहर ने ऐसे मामलों में केस दर्ज करने के आदेश दिए तो महीनेभर से भोपाल पुलिस भी ऐसे अपराधों की विवेचना करने लगी।

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