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MP की रियल लाइफ शेरनी:अपराध रोके और माफियाओं को जेल भेजा, 5 महीने में 6 FIR भी कराईं; कई बार बाघ, तेंदुआ से हो चुका सामना

भोपाल3 महीने पहलेलेखक: वंदना श्रोती
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रातापानी सेंचुरी में बिनेका की घाट खमिरया रेंज में पदस्थ फॉरेस्टर सीमा राजगौर यहां की रियल लाइफ शेरनी हैं। - Dainik Bhaskar
रातापानी सेंचुरी में बिनेका की घाट खमिरया रेंज में पदस्थ फॉरेस्टर सीमा राजगौर यहां की रियल लाइफ शेरनी हैं।

रातापानी सेंचुरी में बिनेका की घाट खमिरया रेंज में पदस्थ फॉरेस्टर सीमा राजगौर यहां की रियल लाइफ शेरनी हैं। सीमा ने इलाके में वन अपराध से पहले ही अपराधियों को पकड़कर जेल पहुंचाया। जनवरी से मई तक 6 केस भी दर्ज कराएं, इसलिए इनसे वन माफिया भी खौफ खाते हैं। कोर्ट जाने के दौरान कई बार वन माफिया ने उन पर हमले की कोशिश की। सीमा की कहानी उन्हीं की जुबानी...

तीन शावकों के साथ बाघिन से हो गया था सामना

मेरा कई बार भालू, तेंदुआ, बाघ, बाघिन आदि से सामना हुआ। इसी महीने पानी की झिरिया के पास कैमरा बांधने जा रही थी कि एक बाघिन और उसके 3 शावक सामने आ गए। हम लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है, जब भी वन्यप्राणी से सामना हो तो सीधे खड़े हो जाओ, भागो मत। मैं और चौकीदार खड़े हो गए। शावक वाली बाघिन खतरनाक होती है। हालत खराब हो गई। हम और बाघिन एक दूसरे की आंख में देख रहे थे। थोड़ी देर बाघिन गुर्राती रही, फिर पता नहीं क्या सोचकर पीछे हटकर बैठ गई। जैसे ही शावक हमारी ओर बढ़ने लगे तो उसने फिर गुर्राया, जिससे शावक ठिठक गए। फिर बाघिन नीचे की ओर चली गई। हमने जैसे-तैसे कैमरा बांधा। इस घटना के बारे में सोचती हूं तो एक अलग सा रोमांच महसूस करती हूं। ऐसे ही एक बार पैदल गश्त के दौरान भालू सामने आ गया। वह हमला करता, इसके पहले ही कर्मचारी पहाड़ी के आड़ में होकर शोर मचाने लगे, जिससे वह भाग गया। ऐसे ही बार वन माफिया ने जान से मारने की भी कोशिश की। ये भी तब हुआ जब मैं कोर्ट में सुनवाई के लिए जाती थी।
(जैसा कि फॉरेस्टर सीमा राजगौर ने बताया)

ऐसा रहा सफर
मैं रेहटी की हूं। कॉलेज की पढ़ाई के बाद मैंने वनरक्षक की परीक्षा दी। 2003 में मेरा सिलेक्शन हो गया। एक साल की ट्रेनिंग हुई, फिर ऑफिस ड्यूटी में लगा दी। चूंकि मुझे फील्ड में काम करना पसंद था तो अधिकारियों को अपनी इच्छा बताई। तत्कालीन डीएफओ पीके सिंह ने मुझे फील्ड वर्क सौंप दिया।

दिन में ही नहीं, रात में भी पेट्रोलिंग करती है सीमा

सीमा राजगौर अपनी बीट में दिन में ही नहीं, बल्कि रात को भी पेट्रोलिंग करती हैं। उसने वन अपराधियों पर लगाम लगा रखी है। उसके साहस के लिए उसे सम्मानित भी किया गया। उसका उदाहरण अन्य महिला वन रक्षकों को दिया जाता है। ऑफिस में ड्यूटी करने की बजाय फील्ड में काम करें। -पीके त्रिपाठी, अधीक्षक, रातापानी सेंचुरी