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मंडे पॉजीटिव:सूना आंचल, तलाक की नौबत; बच्ची गोद लेते ही फिर जुड़े रिश्ते

भोपालएक वर्ष पहले
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  • फैमिली काेर्ट की काउंसलर ने पति-पत्नी के बीच तीन साल से चल रहे मतभेद किए दूर

बच्चा न होने की वजह से तलाक ले रहे एक दंपती के रिश्ते को बच्ची गोद लेने के निर्णय से नई जिंदगी मिल गई है। वहीं मां की मौत के बाद बेसहारा हुई ढाई साल की बच्ची को भी लॉकडाउन में मां मिल गई। तीन साल से अलग रह रहे दंपती ने कोर्ट खुलने का इंतजार किए बिना ही स्टाम्प पेपर पर समझौता कर साथ रहना शुरू कर दिया है। दोनों कोर्ट खुलने के बाद समझौतानामा पेश करके वहां से सारे प्रकरण वापस ले लेंगे। साथ ही कोर्ट से बच्ची को भी कानूनी रूप से गोद लेंगे।

दरअसल, इतने सालों से चले रहे पति-पत्नी के बीच ये मतभेद फैमिली कोर्ट की काउंसलर सरिता राजानी ने दूर किए। लॉकडाउन की वजह से मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से काउंसलिंग की गई थी। मल्टी नेशनल कंपनी में काम कर रहे पति और पत्नी के बीच तीन साल से विवाद चल रहा था। करियर बनाने के चक्कर में दोनों ने शादी 40 साल की उम्र के बाद शादी की। तीन साल तक बच्चा नहीं हुआ तो उन्होंने हर तरह का इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद ससुराल वालों ने महिला को परेशान करना शुरू कर दिया। पति का कहना था कि इतने साल नौकरी करके जब सैटल हुए तो उसके घर में कम से कम किलकारी तो गूंजे। 

महिला ने काउंसलर को बताया कि उसकी शादी नवंबर 2014 को हुई थी। उस समय उनकी उम्र 40 साल थी और पति 42 साल के थे। देर से शादी करने के कारण जब बच्चा नहीं हुआ तो दोनों में तनाव बढ़ने लगा। तीन साल तक तो जैसे-तैसे वक्त काटा। उसके बाद पति ने तलाक के लिए आवेदन दे दिया, जिससे वह और डिप्रेशन में चली गई। इस दौरान उनकी काउंसलिंग हुई, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद बच्चा गोद लेने की सोची। पर वेटिंग लिस्ट लंबी थी तो बात आगे बढ़ गई। 

चचेरा भाई नहीं संभाल पा रहा था, इसलिए बहन को दे रहा अपनी बच्ची

महिला की बहन ने काउंसलर को बताया कि उनके चचेरे भाई की पत्नी की मौत जनवरी में हो गई थी। उसके दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा 7 साल का आैर बच्ची ढाई साल की है। वह बच्ची को नहीं संभाल पा रहा है। उसने बहन को बच्ची गोद देने का फैसला किया है। उन्होंने काउंसलर से अनुरोध किया कि तुम बहन के पति की काउंसलिंग करके समझाओ। इसके बाद काउंसलर ने दोनों को बुलाकर 15 दिन काउंसलिंग की। इसके बाद शनिवार को दोनों के बीच समझौता हो गया। दोनों बच्ची को अपने साथ घर ले गए। सारे समझौते स्टाम्प पेपर पर हुए हैं। कुटुंब न्यायालय में सुनवाई शुरू होने के बाद दंपती कोर्ट में समझौता पेश कर केस वापस लेंगे।

लॉकडाउन से परिवारों के मतभेद कम हुए हैं

संदीप शर्मा, सचिव, जिला विधिक प्राधिकरण के मुताबिक, लॉकडाउन की वजह से परिवारों पति और पत्नी के बीच चल आ रहे मतभेद कम हुए हैं। यही वजह है कि जो लोग अलग रह रहे थे, उन्हें समझ आ गया है कि जीवन का भरोसा नहीं, इसलिए वे साथ जिंदगी गुजारना चाहते हैं। दोनों पक्षों की उपस्थिति के बाद प्रकरणों का निराकरण कर दिया जाएगा।

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