'मोदी को देखकर ऐसा लगा, जैसे भगवान मिल गए':श्योपुर में PM मोदी से मंच पर मिलने वाली 'दीदियों' की कहानी

श्योपुर12 दिन पहलेलेखक: आशीष रघुवंशी

मैं जब मंच पर पहुंची तो घबरा गई थी। पीएम मोदी को गुलदस्ता देने गई तो प्रधानमंत्री ने पूछा- क्या दीदी, आप तो अच्छे इंटरव्यू दे रही हो। आप तो देश में छा रही हो। मुझे बहुत खुशी हो रही है। यह कहना है सुनीता आदिवासी का। सुनीता आदिवासी वो महिला हैं जिसने शनिवार को कराहल में महिला स्व-सहायता समूह के सम्मेलन में मोदी के सामने मंच से संबोधित किया। उनके साथ कलियाबाई ने भी PM मोदी का स्वागत किया और मंच से अपनी बात रखी। पढ़िए इन दोनों की कहानी, उन्हीं की जुबानी।

थोड़ा घबरा रही थी, लेकिन बहुत खुशी हुई: सुनीता आदिवासी
कराहल से 10 किलोमीटर दूर गोरस गांव की रहने वाली सुनीता आदिवासी ने मंच पर मोदी का स्वागत किया। सुनीता का कहना है कि हमें PM के सामने अपनी बात रखने का मौका मिला। इससे हमारा जीवन सफल हो गया। सहरिया समाज की महिला को प्रधानमंत्री से मिलने और उनके सामने बात रखने का मौका मिलना बड़ी बात है। पहली बार उन्हें प्रत्यक्ष देखा। इससे पहले उन्हें मोबाइल या टीवी पर ही देखा था। जब मंच पर गुलदस्ता देने गई, तो प्रधानमंत्री ने पूछा- क्या दीदी, आप तो अच्छे इंटरव्यू दे रही हो। आप तो देश में छा रही हो। मुझे बहुत खुशी हो रही है। हालांकि प्रधानमंत्री ने जब आमने-सामने बात की, उस समय मैं थोड़ा घबरा भी रही थी।

कराहल में स्व-सहायता समूह के सम्मेलन में सुनीता आदिवासी ने पीएम का स्वागत किया।
कराहल में स्व-सहायता समूह के सम्मेलन में सुनीता आदिवासी ने पीएम का स्वागत किया।

जीवन में जो जीया, वही बोला...
मंच पर अपनी बात रखने की तैयारी के बारे में पूछने पर सुनीता ने बताया कि एक हफ्ते पहले ही जानकारी मिली थी कि मुझे प्रधानमंत्री मोदी के सामने बात रखनी है। शुरू में तो यकीन नहीं हुआ। ज्यादा तैयारी नहीं करनी पड़ी, क्योंकि समूह से जुड़ने के बाद यही सब किया है। समूह से जुड़कर जो काम किए, जुड़ने से पहले जीवन में जो परेशानी थीं, वह सब बोल दिया।

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भोजन के लाले थे, अब चार पहिया वाहन में चल रही
सुनीता ने बताया कि वह 2014 में समूह से जुड़ीं। उससे पहले बहुत कठिनाइयों में जीवन गुजरता था। कभी-कभी तो परिवार को दो वक्त का खाना तक नहीं मिलता था। पहनने के लिए अच्छे कपड़े तक नहीं थे। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद 70 हजार रुपए का कर्ज मिला। उससे घर में आटा चक्की लगाई, इससे अच्छी आमदनी होने लगी। अब रोजाना एक हजार रुपए तक आमदनी हो रही है। महीने में 20-25 हजार रुपए आमदनी हो जाती है। समूह का कर्ज भी चुका दिया है।

चक्की से बचत हुई। फिर समूह से 50 हजार का कर्ज ले लिया। इन रुपयों से खेत में ट्यूबवेल लगवाया। इससे खेतों में पानी की समस्या दूर हो गई। पहले हम एक फसल बमुश्किल ले पाते थे। अब साल में 3 फसलें ले रहे हैं। साल में 3-4 लाख रुपए की इनकम होने लगी है। खेत में अमरूद का बगीचा भी लगा लिया है। एक चार पहिया गाड़ी भी ले ली है।

सुनीता आदिवासी ने मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुलदस्ता भेंट करने के बाद अपनी बात भी रखी।
सुनीता आदिवासी ने मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुलदस्ता भेंट करने के बाद अपनी बात भी रखी।

कलियाबाई बोली- ऐसा लगा, जैसे भगवान मिल गए

पीएम मोदी के सामने अपनी बात रखने वाली कलियाबाई ने बताया कि पीएम को देखकर ऐसा लगा, जैसे भगवान मिल गए। अगर हम स्व-सहायता समूह में न होते और इतना काम न करते तो शायद उनसे कभी नहीं मिल पाते। उन्होंने हमें मार्गदर्शन दिया। दूसरी महिलाएं देखेंगी तो वो भी जागरूक होंगी। जो समूह से नहीं जुड़ी होंगी, वो महिलाएं भी जुड़ने की कोशिश करेंगी।

कलियाबाई भी स्व-सहायता समूहों के सम्मेलन में शामिल हुईं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
कलियाबाई भी स्व-सहायता समूहों के सम्मेलन में शामिल हुईं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

समूह से जुड़कर जिंदगी बदल गई

कराहल की कलियाबाई ने बताया कि उनके परिवार में 6 सदस्य हैं। पति-पत्नी और 4 बच्चे हैं। सबसे बड़ी बेटी 10वीं तक पढ़ी है। बाकी तीनों पढ़ाई कर रहे हैं। पहले घर की स्थिति ठीक नहीं थी। दो वक्त के खाने के भी लाले थे। मेहनत-मजदूरी करने जाते थे तो 100-150 रुपए मिलते थे। इतने कम में गुजारा नहीं हो पा रहा था। वर्ष 2013 में मैं राधा स्व-सहायता समूह से जुड़ी थी। 20 हजार रुपए का लोन लिया। उससे ठेला, बर्फ गोले की मशीन और सिलाई मशीन खरीदी। मुझे कपड़े सिलना आता था। ठेले और सिलाई से 30 हजार रुपए महीने की आमदनी होने लगी, उससे 20 हजार रुपए का समूह का लोन चुका कर आजीविका मिशन से मछली पालन की ट्रेनिंग ली। समूह से जुड़ी 7 महिलाएं मछली पालन करती हैं। इससे सालभर में 8-10 लाख रुपए की आय हो जाती है। एक और तालाब पट्टे से मिलने वाला है। इससे अगले वर्ष से आमदनी और बढ़ जाएगी।