ग्राउंड रिपोर्ट:आरटीओ में वाहन फिटनेस का सुपरफास्ट तरीका...सिर्फ 5 मिनट में अनफिट भी फिट

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: जितेंद्र मेहरा
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यह गलत है… यहां रोजाना करीब 150 वाहन फिटनेस के लिए आते हैं। ज्यादातर एजेंटों की मिलीभगत के चलते ऐसी फिटनेस यहां पर होना आम बात है। - Dainik Bhaskar
यह गलत है… यहां रोजाना करीब 150 वाहन फिटनेस के लिए आते हैं। ज्यादातर एजेंटों की मिलीभगत के चलते ऐसी फिटनेस यहां पर होना आम बात है।

दोपहर 12:30 बजे। आरटीओ दफ्तर में एमपी 07 एचबी 0584 नंबर का ट्राला फिटनेस रैंप पर खड़ा है। दफ्तर में बैठा कम्प्यूटर ऑपरेटर अंदर से ही नंबर पूछता है। नंबर जानने के तुरंत बाद कम्प्यूटर में कैमरों की मदद से ट्राले के दोनों साइड और सामने की तस्वीर नजर आने लगती है। फोटो क्लिक होता है।

अंदर से आवाज आती है… जाने दो… महज 5 मिनट में ट्राले का फिटनेस सार्टिफिकेट ऑनलाइन जारी हो गया। जबकि इसमें वाइपर नहीं लगे थे। आरटीओ में 15 साल पुराने 2006 मॉडल के इस ट्राले को भौतिक रूप से तो किसी ने देखा ही नहीं। मतलब साफ है, फिटनेस के नाम पर परिवहन विभाग राजस्व जुटाने तक सीमित है। इन वाहनों से सड़कों पर भले ही हादसे होते रहे।

किसी को कोई चिंता नहीं है। भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला कि फिटनेस के लिए आने वाले ज्यादातर वाहन एजेंट के माध्यम से पहुंचते हैं। जिसके लिए वे तय फीस से अधिक रुपए वसूलते हैं। वाहन का मिनटों में फिटनेस हो जाता है। इधर,वाहनों का फोटो खींचने वाले स्मार्ट चिप कंपनी के कर्मचारियों का कहना है कि उनका काम तो सिर्फ फोटो क्लिक करके सारा डेटा ऑनलाइन करना है।

लोग फॉर्म पर खुद ही रगड़ते दिखे चेसिस नंबर

पड़ताल के दौरान टीम भास्कर के सामने आरटीओ दफ्तर में ही कई लोग अपनी गाड़ियां का चेसिस नंबर फॉर्म पर रगड़ते नजर आए। कुछ वाहन मालिक महिलाएं ही चेचिस नंबर रगड़ती दिखी। बड़ी गाड़ियों में भी कई बाहरी लोग ऐसा करते दिखे।

एक्सपर्ट बोले- इस तरह की अनदेखी ही बनती है हादसों की वजह

कमर्शियल वाहनों की फिटनेस होना ज्यादा जरूरी है। इनके फिटनेस में लापरवाही नहीं होनी चाहिए, क्योंकि भविष्य में यही लापरवाही सड़क पर हादसों की वजह बनती है।
-एनके त्रिपाठी, पूर्व ट्रांसपोर्ट कमिश्नर

फिजिकल जांच बगैर मैकेनिक भी नहीं देगा ऐसा सर्टिफिकेट
बिना फिजिकल जांच किए वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया जाना गलत है। इसके लिए वाहन जांच के लिए तय प्रकिया का पालन होना ही चाहिए। ऐसा तो सड़क का कोई मैकेनिक भी नहीं करेगा, फिर यह तो आरटीओ दफ्तर है।
-अभय गोहिल, रिटायर्ड जज, हाईकोर्ट

आरटीओ बोले- हमारे पास संसाधन सीमित

ये सही है कि वाहनों का फिटनेस ठीक से नहीं हो रहा है। इसके पीछे बड़ी वजह वाहन चैक करने के लिए उचित संसाधनों का न होना। 15 साल पुराने ट्राले काे किसी अधिकारी ने देखा तक नहीं। आगे ऐसा न हो इसके लिए निर्देशित करेंगे।
-संजय तिवारी, आरटीओ