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भोपाल के 4 अस्पतालों से ग्राउंड रिपोर्ट:अस्पतालों से दर्द के किस्से, रहने-सोने का ठिकाना नहीं; रिपोर्ट से लेकर शव लेने तक लंबा इंतजार

भोपाल9 महीने पहले
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चिरायु अस्पताल : लॉकडाउन के कारण कहीं आ-जा नहीं सकते। - Dainik Bhaskar
चिरायु अस्पताल : लॉकडाउन के कारण कहीं आ-जा नहीं सकते।

मुश्किल है मगर, वक्त ही तो...ये भी गुजर जाएगा। लेकिन यहां दिन-ब-दिन वक्त मुश्किल ही होता जा रहा है। अस्पतालों में मरीजों के साथ परिजन भी बेहाल हैं। कुछ 6 दिन से अपने परिजन के इलाज के इंतजार में अस्पताल में ही वक्त गुजारने को मजबूर हैं। न रहने का कोई ठिकाना है, न ही खाने का। लॉकडाउन ने परेशानी और बढ़ा दी है। विडंबना यह है कि शव लेने के लिए भी मरीज के परिजनों को इंतजार करना पड़ रहा है।

जेके अस्पताल; अस्पताल के पास में किराए के एक कमरे के मांगे 15 हजार रुपए
ये हैं गैरतगंज निवासी गाैरव जैन। जेके अस्पताल में पत्नी का इलाज करवाने आए हैं। जैन दिनभर अस्पताल परिसर में रहते हैं। कई बार रात भी यहीं गुजारते हैं। उन्होंने बताया कि 4 अप्रैल को उन्होंने पत्नी को अस्पताल में भर्ती किया था। आसपास के क्षेत्रों के घरों में कमरा किराए पर लेने के लिए गए। लोगों को बताया कि उनकी पत्नी का कोरोना का इलाज चल रहा है तो कुछ ने मकान किराए से देने से ही मना कर दिया तो कुछ लोग ऐसे भी थे जो तैयार हुए, लेकिन एक कमरे का किराया 15 हजार तक बताया। उनके साथ आए मुकेश ने बताया कि शुरुआत में बाहर ही सोए, रात भर मच्छरों ने बहुत काटा। लेकिन, मजबूरी में अब किया भी क्या जा सकता है। कोरोना काल ने मजबूर कर दिया है, अपने परिचितों के घर भी आ-जा नहीं सकते हैं।

पीपुल्स मेडिकल कॉलेज; जांच के लिए इंतजार करते मिले लोग, क्योंकि जिन्हें सैंपल लेना था, वे ही सीट से गायब थे

करोंद स्थित इस अस्पताल में एक विंग को संक्रमित मरीजों की जांच के लिए तय किया है। यहां जो खड़े हैं, वे सभी कोरोना जांच के लिए सैंपल देने आए थे। लेकिन अंदर कोई जांच करने वाला नहीं था। उदय आर्य ने बताया कि वे एक घंटे से खड़े हैं। जांच करने वाले गायब हैं। इनमें से कुछ तो बैरसिया से आए थे। लोग गुस्से में थे और गार्ड के ऊपर भड़ास निकाल रहे थे। गार्ड ने फोटो खींचते देखा तो टाेंक दिया। इसी बिल्डिंग के पीछे कोरोना मरीजों का इलाज हो रहा था। यहां मेन गेट पर भीड़ थी।

एम्स, भोपाल; हर सुबह डॉक्टर के पास उम्मीद से जाते हैं, लेकिन जवाब मिलता है-इंतजार करो

ये हैं शोभराम, निवाड़ी के रमपुरा गांव से यहां साले भगवान दास के कोराेना इलाज के लिए आएं हैं। इनके साले की 6 अप्रैल को कोविड की जांच हुई थी, लेकिन रिपोर्ट अब तक नहीं आई। डॉक्टर्स ने बताया कि रिपोर्ट आने के बाद इलाज शुरू करेंगे। अब मजबूरी है कि घर जा नहीं सकते। हर सुबह डॉक्टर्स के पास उम्मीद से जाते हैं, लेकिन जवाब मिलता है कि अभी इंतजार करो। अब खाने की भी परेशानी बढ़ गई है।

अस्पतालों में भर्ती मरीज के परिजनों को मुफ्त में मिल रहीं ये परेशानियां

  • बाहर से इलाज कराने के लिए यहां आए लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी खाने की हो रही है। लॉकडाउन के कारण होटल, रेस्तरां भी बंद हैं।
  • कभी-कभी कुछ लाेग अपने रिश्तेदारों के घर चले जाते थे, लेकिन आवागमन के साधन न मिलने से वे अब कहां जाएं, इसलिए अस्पताल में ही डटे हैं।
  • गर्मी के इस दौर में दिन तो पेड़ों की छांव में बीत जाता है, लेकिन रात अस्पताल के गर्म फर्श पर ही गुजारना पड़ रही है।

चाचा का ऑपरेशन नहीं हो पाया
शोभाराम के पास में ही विदिशा जिले से आए रामदास सेन बैठे हैं। वे अपने चाचा बाबूलाल के हार्ट का ऑपरेशन कराने यहां आए हैं। रामदास बताते हैं कि डॉक्टर्स ने कहा है कि कोरोना के कारण ऑपरेशन नहीं हो पाएगा। इसलिए चिंता बढ़ गई है। सुबह से ऑटो के इंतजार में बैठे थे, दोपहर में जाकर तलाश पूरी हुई, अब घर जा रहे हैं।

चिरायु अस्पताल : लॉकडाउन के कारण कहीं आ-जा नहीं सकते

शेड में बैठे मरीज के परिजनों को ऐसे ही अपना वक्त काटना पड़ रहा है। अशोकनगर के पास स्थित एक गांव से आए रियांश जैन ने बताया कि उनकी मां मीनल जैन कॉरोना पाॅजीटिव हैं। सांस लेने में तकलीफ होने के चलते उन्हें यहां भर्ती कराया गया है। लॉकडाउन के कारण कहीं आ-जा नहीं सकते, इसलिए यहीं बैठा हूं। इन्हीं की तरह छिंदवाड़ा निवासी अन्नू सिंह के परिजन भी यहां गार्डन में बैठे हैं,वे यहां अन्नू का शव मिलने के इंतजार में बैठे हुए थे।

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