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हमीदिया हादसा:दंपती की डीएनए रिपोर्ट 10 दिन बाद भी नहीं आई, मर्चुरी में नवजात के शव को 12 दिन से अंतिम संस्कार का इंतजार

भोपाल10 महीने पहलेलेखक: विवेक राजपूत
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मां बोली.. ऐसा था मेरा बेटा- ये तस्वीर 8 नवंबर की है। तब सोनाली ने अपने नवजात बेटे काे देखा था। - Dainik Bhaskar
मां बोली.. ऐसा था मेरा बेटा- ये तस्वीर 8 नवंबर की है। तब सोनाली ने अपने नवजात बेटे काे देखा था।

यह तस्वीर ओमनगर सोनाली मसाने और उसके नवजात बेटे की है। सोनाली 8 नवंबर को सुल्तानिया अस्पताल में दोपहर 1:30 बजे बच्चे को जन्म दिया। नवजात की तबीयत नाजुक थी। दोपहर में ही उसे कमला नेहरू अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कर दिया। रात 8:30 बजे वहां आग लगी तो अफरा-तफरी मच गई। नवजातों की शिफ्टिंग के दौरान रात 10 बजे सोनाली की मौसी पूनम शाक्या ने नवजात को जीवित देखा।

रात 2 बजे डॉक्टरों ने सोनाली के पति अरुण मसाने को बुलाकर कहा कि आपका बच्चा खत्म हो गया है। जो शव दिखाया उसे अरुण व पूनम शाक्या ने पहचाना नहीं। पूनम का दावा है कि उसने रात 4 बजे वार्ड में जाकर देखा तो उनका बच्चा जीवित था। 9 नवंबर की सुबह 11 बजे भी बच्चा वहीं था।

दोपहर 4 बजे दो पुलिस वाले उसे दोबारा वार्ड में लेकर गए तो बच्चा नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने एक मृत नवजात का शव लेने के लिए कई बार कहा। तब उन्होंने डीएनए की मांग की। 10 नवंबर को सोनाली का डीएनए सैंपल लिया गया था। इधर, 9 नवंबर से उस मृत नवजात का शव मर्चुरी में रखा हुआ है।

मैंने सुना थाना प्रभारी कर रहे थे रिपोर्ट, मैच नहीं हुई

पूनम का कहना है कि सोनाली की डीएनए जांच रिपोर्ट की जानकारी लेने 14 नवंबर को थाना प्रभारी को फोन लगाया था। तब उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आ गई है कल आकर ले लेना।पूनम का कहना है कि 15 नवंबर को जब हम कोहेफिजा थाने पहुंचे तो हेड कांस्टेबल लालजी मिले थे। पहले उन्होंने कहा कि सोनाली की रिपोर्ट आ गई है। अलमारी में रखी है। टीआई साहब नहीं हैं, इसलिए नहीं मिलेगी।

जब पूनम ने कहा कि साहब से बात हो गई है उन्होंने ही बुलाया है। तब हेड कांस्टेबल ने थाना प्रभारी को फोन लगाया। पूनम का दावा है कि फोन पर हुई बातचीत मैंने पास खड़े होकर सुनी थी। थाना प्रभारी ने कहा था- सोनाली की रिपोर्ट मैच नहीं हुई है, इसलिए देना नहीं है। अरुण का सैंपल ले लो। इसके बाद 15 नवंबर को ही अरुण का डीएनए सैंपल लिया गया, लेकिन रिपोर्ट नहीं आई।

परिजनों की शंका, पुलिस के तर्क

शंका 1- जिस डिब्बे में डीएनए जांच के लिए सैंपल भेजा था, वो थाने में ही दिखा। कहीं ऐसा तो नहीं कि सैंपल जांच के लिए भेजा ही नहीं?
तर्क 1 : सैंपल जिस बॉटल में लेते हैं। उसका तापमान मेनटेन रखने उसे बर्फ में रखना होता है। इसके लिए हमारे थाने का परमानेंट डिब्बा है।

शंका 2- सोनाली का सैंपल लेने के 5 दिन बाद थाने बुलाकर अरुण का सैंपल क्यों ले रहे हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि सोनाली की रिपोर्ट मैच नहीं हुई?
तर्क 2 : सैंपल एफएसएल भेजा था। वहां से बताया कि डीएनए जांच के लिए मां-पिता दोनों के ब्लड सैंपल लगते हैं, इसलिए अरुण के सैंपल भी लिए।

सोनाली का ब्लड सैंपल पहले ही भेजा जा चुका
सोनाली का ब्लड सैंपल पहले ही भेजा जा चुका है। अरुण का सैंपल भी लेकर भेज दिया है। डीएनए जांच रिपोर्ट नहीं आई है। फिर रिपोर्ट मैच नहीं होने का तो सवाल ही नहीं है। -अनिल बाजपेई, थाना प्रभारी कोहेफिजा

जिस बच्चे का शव दे रहे थे, वो हमारा नहीं था
जिस बच्चे का शव हमें दे रहे हैं वह बच्चा हमारा नहीं है। हमने नहीं लिया तो शव मर्चुरी में ही रखा है। हर रोज पूछते हैं, थाने से एक ही जवाब दिया जाता है अभी रिपोर्ट नहीं आई है। -पूनम शाक्या