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अच्छी पहल:हो गया अपराध, अब प्रायश्चित के लिए दूसरे कैदियों को भी पढ़ा रहे, इस साल 2440 कैदी पढ़-लिख गए

भोपाल4 महीने पहलेलेखक: वंदना श्रोती
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पहल... जेलों में बंद सबसे ज्यादा कैदी बिना पढ़-लिखे, जेल प्रशासन ने 11,833 को बनाया साक्षर - Dainik Bhaskar
पहल... जेलों में बंद सबसे ज्यादा कैदी बिना पढ़-लिखे, जेल प्रशासन ने 11,833 को बनाया साक्षर

बंदियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए भोपाल सेन्ट्रल जेल में नई पहल की गई है। जेल में निरक्षर कैदियों को साक्षर किया जा रहा हैं। जेल प्रशासन की कोशिश है कि साक्षरता से कैदियों की सोच बदले। उनके विचारों में बदलाव आए। एेसा होने पर उनके जीवन में भी परिवर्तन आएगा। बंदी अपने जीवनयापन के लिए कोई भी रोजगार कर सकेंगे। इनको साक्षर बनाने का अहम मकसद समाज की मुख्यधारा से जोड़ना अौर सभ्य नागरिक बनाना हैं।

वैसे जेल प्रबंधन की मानें तो उसने 11,833 बंदियों को साक्षर बनाया हैं। केंद्रीय जेल में बंदियों को साक्षर बनाने के काम में जेल प्रबंधन की मदद पढ़-लिखे कैदी भी कर रहे हैं। कैदियों की पढ़ाई के प्रति लगन देकर जेल प्रबंधन उन्हें प्रोत्साहित भी कर रहा हैं।

दरअसल भोपाल सहित प्रदेश की सभी केंद्रीय, जिला और सब जेलों में सबसे ज्यादा संख्या बिना पढ़े-लिखे कैदियों की है। हांलाकि पिछले साल से तुलना की जाए तो इस साल पढ़े-लिखे कैदियों की संख्या बढ़ी है। भोपाल के केंद्रीय जेल की बात की जाए तो यहां पर वर्तमान में 212 ग्रेजुएट और 91 पोस्ट ग्रेजुएट कैदी बंद हैँ। यहां वर्तमान में 3878 कैदी हैं।

ज्यादा कैदी 18 से 30 साल के

भोपाल सहित प्रदेश की जेलों में सबसे ज्यादा संख्या 18 से 30 वर्ष वाले विचाराधीन कैदियों की है। इसमें 16, 560 पुरूष कैदी अौर 415 महिलाएं हैं। वहीं सजायाफ्ता कैदियों की संख्या में 5669 पुरुष और 161 महिला शामिल हैं। जेल प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि 2021 में विभिन्न कक्षाओं में 1589 बंदियों को पढ़ने की सुविधा उपलब्ध कराई गई तथा हिन्दी भाषा परीक्षा में 851 बंदी शामिल हुए।

वहीं विभिन्न जेलों में बंद दंडित एवं विचाराधीन 11,833 कैदियों को साक्षर बनाया गया। इसमें 3680 दंडित और 8128 विचाराधीन कैदी शामिल हैं। वहीं अन्य 25 कैदी भी शामिल हैं। ऐसे ही वर्ष 2021-22 की परीक्षा में 96 ग्रेजुएट, 10 पोस्ट ग्रेजुएट, 1122 प्राइमरी, 162 मिडिल, हाई और हायर सेकंडरी की परीक्षा में 198 बंदी शामिल होंगे।

सभी कैदियों को साक्षर बनाया जाता है
दंडित हो या विचाराधीन कैदी। सबको साक्षर बनाया जाता है ताकि बंदियों को अक्षर ज्ञान तो हो सके। जैसे -जैसे बंदी आगे बढ़ता है, उसे आगे की कक्षाओं में पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और तकनीकी डिग्री व डिप्लोमा वाले कैदी स्वेच्छा से अन्य को पढ़ाने में मदद करते हैं।
-दिनेश नरवरे, केंद्रीय जेल अधीक्षक, भोपाल

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