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MP में नया नियम:अब बिल्डर जितना काम करेगा ग्राहक उतना ही पैसा देगा, बुकिंग के बाद नहीं लगाने पड़ेंगे रेरा के चक्कर

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: गुरुदत्त तिवारी
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महाराष्ट्र और गुजरात की तरह रियल एस्टेट नियामक (रेरा) मप्र में भी इसके लिए नियम बना रहा है। - Dainik Bhaskar
महाराष्ट्र और गुजरात की तरह रियल एस्टेट नियामक (रेरा) मप्र में भी इसके लिए नियम बना रहा है।

बिल्डर जितना काम करेगा, उसे ग्राहक उतना ही पैसा देगा। महाराष्ट्र और गुजरात की तरह रियल एस्टेट नियामक (रेरा) मप्र भी इसके लिए नियम बना रहा है। नए नियम में तय किया जा रहा है कि बुकिंग राशि कितनी होगी, उसके बाद किन-किन चरणों में ग्राहक को कितना पैसा देना होगा। स्पष्ट नियमों के अभाव में कई ग्राहकों ने एक बड़ी राशि बतौर बुकिंग करते समय ही दे दी थी। लेकिन बाद में बिल्डर ने काम ही शुरू नहीं किया। बुकिंग लेने वाले सारे ग्राहक अब रेरा के चक्कर लगा रहे हैं।

रेरा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नए कायदों में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बिल्डर ने जितना बड़ा प्रोजेक्ट लाने के लिए एप्रूवल मांगा है, उसे पूरा करने के लिए उसके पास कैश फ्लो बना रहे। बिल्डर के आर्थिक सामर्थ्य के आकलन के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी को नियुक्त किया गया है। उसकी रिपोर्ट नए प्रोजेक्ट के पंजीयन के लिए जरूरी होगी। रेरा के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रोजेक्ट के असफल रहने पर उक्त अधिकारी की भी जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी। रेरा के चेयरमैन एपी श्रीवास्तव ने कहा कि अधिकारियों की नियुक्ति का काम जारी है। इसी महीने के आखिरी सप्ताह तक पेंडिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी देने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

यह भी बनाए जा रहे नियम... जो बिल्डर प्रोजेक्ट ला रहा जमीन का टाइटल भी उसी के नाम पर होना जरूरी होगा

यह देखने में आया है कि बिल्डर ज्वाइंट वेंचर में प्रोजेक्ट लेकर आते हैं। जमीन किसी और की होती है और बनाता कोई और है। महज एग्रीमेंट के आधार पर वह बुकिंग लेना शुरू कर देते हैं। बहुचर्चित आम्रपाली बिल्डर के प्रकरण में यही हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आपत्ति ली थी। रेरा नए नियमों में यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जो बिल्डर प्रोजेक्ट ला रहा है, जमीन का टाइटल उसी के नाम पर हो। टाइटल देखने के लिए भी रेरा ने एक जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त किया है।

रेरा से जुड़े सभी स्टेक होल्डर्स की बैठक आज, मांगे जाएंगे सुझाव

रेरा ने शुक्रवार को रेरा से जुड़े सभी वकील और सीए की एक वर्चुअल बैठक बुलाई है। इसमें नए नियमों को लेकर सलाह ली जाएगी। अभी यह केवल इंदौर और भोपाल के सीए और वकीलों के लिए होगी। इसमें रेरा कानून में अब तक हो रही गलतियों पर फीडबैक लिया जाएगा। साथ ही प्रस्तावित रेगुलेशन पर फीडबैक भी लिया जाएगा।

होम आइसोलेशन, वर्क फ्रॉम होम के लिए बड़े घर की डिमांड

कोरोना के कमजोर होने के साथ ही रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी नजर आने लगी है। खास तौर से कोरोना की दूसरी लहर के बाद एक सर्वसुविधायुक्त घर जिसमें जरूरत पड़ने पर होम आइसोलेशन या किसी मरीज के लिए सारे इंतजाम किए जा सकें, इसकी जरूरत महसूस हो रही है। वर्क फ्राम होम और ऑनलाइन क्लास का चलन बढ़ने से भी लोगों की जरूरतें बदली हैं। कुल मिलाकर अब लोग बड़ा घर लेना पसंद कर रहे हैं।

अभी मौका.. 30 जून तक है पुरानी गाइडलाइन

प्रॉपर्टी के सौदों को लेकर पुरानी कलेक्टर गाइडलाइन अभी 30 जून तक लागू है। यानी एक जुलाई से नई गाइडलाइन आ सकती है। नई गाइडलाइन में 20 फीसदी तक दाम बढ़ाए जाने का प्रस्ताव है। हालांकि रियल स्टेट से जुड़े लोगों ने सरकार से मांग की है कि पुरानी गाइडलाइन को ही लागू रखा जाए।