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बयान में ना, कागज में हां!:CM के नई दुकानें नहीं खोलने के बयान के अगले ही दिन आबकारी आयुक्त ने कलेक्टरों से मांगे प्रस्ताव; उमा भारती बोली- नशे से ही बढ़े हैं रेप केस

भोपालएक महीने पहले
  • पत्र में कहा- शहरी क्षेत्र में कम से कम 20% नई दुकानें खोलने का प्रस्ताव दें
  • 5 हजार से अधिक आबादी वाले गांव, जहां शराब की दुकानें नहीं है वहां के लिए प्रस्ताव अनिवार्य रूप से भेजे जाएं

शराब की नई दुकानें खोलने के मुद्दे पर शिवराज सरकार फंस गई है। कहने को शिवराजसिंह चौहान भले ही ऐसे किसी फैसले से इंकार कर रहे हैं लेकिन हकीकत कुछ और है। आबकारी आयुक्त राजीवचंद्र दुबे का 21 जनवरी के सभी कलेक्टर्स को लिखे गए पत्र ने सरकार की मंशा साफ कर दी है कि वे नई दुकानें खोलना चाहती हैं। पत्र में कलेक्टर्स से यहां तक कहा गया है कि आप नई दुकानें खोलने के लिए जो प्रस्ताव भिजवाएं, उनमें उन गांवों को अनिवार्य रूप से शामिल करें जिनकी आबादी पांच हजार है और वहां पहले से शराब दुकान नहीं है।

शराबबंदी पर उमा भारती खुलकर आईं:पूर्व CM ने कहा- नशा करने के बाद रेप की घटनाएं बढ़ रहीं, शराबबंदी के लिए राजनैतिक साहस की जरूरत, प्रदेश में चलाएंगे मुहिम

सूत्रों का कहना है कि शासन स्तर पर वर्ष 2021-22 के लिए आबकारी नीति बनाने की प्रक्रिया शुरु हो गई है। इसी सिलसिले में आबकारी आयुक्त के कलेक्टरों को पत्र लिखकर नई दुकानें खाेलने का प्रस्ताव मांगे हैं। इससे साफ है कि सरकार नई शराब की दुकानें खोलने की तैयारी कर रही है। आयुक्त ने पत्र में कलेक्टरों से साफ तौर पर कहा है कि शहरी क्षेत्रों में कुल दुकानों की संख्या का न्यूनतम 20% तक नई शराब की दुकानें खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजें।

इधर, आबकारी आयुक्त की चिट्‌ठी के सार्वजनिक होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती खुलकर विरोध में आ गई है। उन्होंने कहा कि नशा करने के बाद ही रेप की घटनाएं बढ़ रही हैं। प्रदेश में नशा और शराबबंदी होना ही चाहिए। उन्होंने शिवराज सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि ऐसा करने के लिए राजनीतिक साहस चाहिए। कहा कि मध्यप्रदेश में शराबबंदी के लिए आज या कल में मुख्यमंत्री से मिलूंगी।

विरोध को देखते हुए इस मामले में सरकार की राय बंट गई हैं। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा शराब दुकानें खोलने के पक्ष में हैं। आबकारी आयुक्त प्रस्ताव मंगा चुके हैं लेकिन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ऐसे किसी फैसले से इंकार कर रहे हैं।

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शराब दुकानें खोलने के पीछे यह तर्क है

सबसे पहले गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने नई शराब की दुकान खोलने के प्रस्ताव की बात कही थी। तर्क दिया कि इससे गांवों में पड़ोसी राज्यों से होने वाली अवैध सप्लाई रुक सकेगी। हालांकि उनके बयान के कुछ ही देर बाद मुख्यमंत्री सामने आए और कह दिया कि फिलहाल नई शराब की दुकानें खोलने का कोई निर्णय नहीं लिया है।

शराब दुकानें के लिए जारी आबकारी आयुक्त की चिट्‌ठी में तीन प्रस्ताव

1. पांच हजार से ज्यादा आबादी वाले उन गांवों में शराब की दुकान खोलने का प्रस्ताव अनिवार्य रूप से दिया जाए, जहां वर्तमान में कोई दुकान नहीं है। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाए।

2. इसके अलावा भी दूसरे क्षेत्रों में राजस्व की बढ़ोतरी और अपराध नियंत्रण की दृष्टि से दुकानें खोलने का प्रस्ताव दिया जा सकता है।

3. शहरी क्षेत्रों में भी राजस्व बढ़ाने और अपराध के नियंत्रण की दृष्टि से नई दुकानों का प्रस्ताव दिया जा सकता है। इसके लिए विकसित किए गए उन इलाकों को प्राथमिकता दी जाए, जहां वर्तमान में दुकान नहीं है।

गांवों में शराब की दुकान खोलने की तैयारी

इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में शराब दुकानें खोलने के लिए ऐसे गांव चिन्हित करने को कहा गया है, जिनकी आबादी 5 हजार से ज्यादा है, लेकिन शराब की दुकानें नहीं है। यानी सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए गांवों में भी शराब दुकानें खोलने पर विचार कर रही है। आबकारी आयुक्त ने कहा है कि गांवों में अवैध शराब की बिक्री पर नियंत्रण की दृष्टि से भी दुकानें खोलने का प्रस्ताव दिया जा सकता है। नई शराब की दुकानों को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस के अलावा बीजेपी में भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर इस निर्णय की आलोचना की थी।

उमा भारती ने सोशल मीडिया पर जाहिर की थी नाराजगी

प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले भी उमा भारती सोशल मीडिया पर बयान जारी कर इस प्रस्ताव पर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने शराबबंदी को लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा अपील की थी। उन्होंने लिखा - मैं सार्वजनिक अपील करती हूं कि बीजेपी शासित राज्यों में शराबबंदी की तैयारी करिए। उन्होंने बिहार में शराबबंदी को लेकर कहा कि राजनीतिक दलों को चुनाव जीतने का दबाव रहता है। बिहार की बीजेपी की जीत यह साबित करती है कि शराबबंदी के कारण ही महिलाओं ने एकतरफा वोट नीतीश कुमार को दिया। कोरोनाकाल के लॉकडाउन के समय पर लगभग शराबबंदी की स्थिति रही। इससे स्पष्ट हो गया है कि अन्य कारणों एवं कोरोना से लोगों की मृत्यु हुई, किंतु शराब नहीं पीने से कोई नहीं मरा। उन्होंने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में हाल ही में जहरीली शराब से हुई मौतों का हवाला भी दिया।

उन्होंने कहा, देखा जाए तो सरकारी व्यवस्था ही लोगों को शराब पिलाने का प्रबंध करती है। जैसे, मां जिसकी जिम्मेदारी अपने बालक का पोषण करते हुए उसकी रक्षा करने की होती है। वही मां अगर बच्चे को जहर पिला दे, तो सरकारी तंत्र द्वारा शराब की दुकानें खोलना ऐसे ही है।

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