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रिपोर्ट में मिलावट:त्योहार निकला, नहीं आई रिपोर्ट... एक साल में 650 फूड सैंपल लिए, 350 की जांच पेंडिंग

भोपालएक महीने पहलेलेखक: अजय वर्मा
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बाजार में बिक गया लाखों का मिलावटी सामान - Dainik Bhaskar
बाजार में बिक गया लाखों का मिलावटी सामान

त्योहारी सीजन में खाद्य सामग्री में मिलावट की जांच के लिए सरकारी अमला फिर सक्रिय हो गया है। शहर के हर हिस्से की दुकानों से सैंपल लिए जा रहे हैं, लेकिन इन सैंपलों पर सवाल उठाने के लिए यह सच काफी है कि पिछले साल 2020 में अक्टूबर से अक्टूबर 2021 तक करीब 650 सैंपल लिए गए थे। इनमें से 300 सैंपल की रिपोर्ट आ गई है, जबकि 350 की रिपोर्ट आना बाकी है।

ये स्थिति तब है, जबकि त्योहारी सीजन में ईट राइट चैलेंज के तहत हर महीने फूड इंस्पेक्टरों द्वारा लिए जाने वाले लीगल सैंपल की संख्या को 6 से बढ़ाकर 15 कर दिया गया है। इसे लेकर सबके अपने-अपने तर्क हैं। खाद्य अधिकारियों का कहना है कि उनका काम सैंपल लेना है। हम लैबोरेटरी में जाकर जांच नहीं कर सकते।

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी पेंडिंग सैंपल की रिपोर्ट के लिए लैबोरेटरी इंचार्ज को बार-बार पत्र लिख रहे हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को शहर में हर माह 8 सर्विलांस और 6 लीगल सैंपल लेना अनिवार्य है। यानी हर इंस्पेक्टर को 13 सैंपल एक महीने में लेना जरूरी कर दिया गया है, लेकिन पिछले साल से ईट राइट चैलेंज के तहत लीगल सैंपल लेने की संख्या को बढ़ा दिया गया है।

रिपोर्ट नहीं आने की वजह यह है कि ईदगाह हिल्स स्थित खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की स्टेट लैब में 2 फूड एनालिस्ट और 4 केमिस्ट हैं। खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के इंतजार में लैब में पड़े हैं। रिपोर्ट देर से आने के चलते त्योहारी सीजन में लाखों रुपए का मिलावटी सामान बिक गया।
दो कैटेगरी... लीगल और सर्विलांस के तहत लेते हैं सैंपल...

लीगल सैंपल: ये सैंपल फेल होने पर कोर्ट में केस दर्ज कराया जाता है। इसमें जुर्माना और सजा का प्रावधान है।

सर्विलांस सैंपल: ये सैंपल सिर्फ निगरानी के लिए होते हैं। फेल होने पर सुधार के लिए निर्माता और व्यापारी को नोटिस देते हैं।

जबकि होना यह चाहिए- करीब एक साल पहले संयुक्त नियंत्रक खाद्य औषधि ने सर्विलांस सैंपल अधिक से अधिक लेने के निर्देश दिए थे। साथ ही कहा था कि इन सैंपलों की जांच लीगल सैंपलों की तरह 14 दिन के अंदर पूरी की जाए, लेकिन इसका पालन नहीं हो सका।

यहां से आता है मिलावटी मावा- शहर में मिलावटी मावा सबसे ज्यादा ग्वालियर-शिवपुरी से लाया जाता है। कई बार ट्रेन के जरिए ये मावा आता है तो कई बार मिनी ट्रक और यात्री बसों में भरकर इसे यहां पर खपाने के लिए लाया जाता है।

इसलिए लिया था निर्णय-नए फूड सेफ्टी एक्ट में सैंपल फेल या मिथ्या होने पर कंपनी पर सीधी कार्रवाई नहीं होगी। कंपनी को सुधार करने धारा 32 के तहत कुछ समय दिया जाएगा। यदि खाद्य पदार्थ में सुधार नहीं होता है तो कंपनी का लाइसेंस रद्द किया जाएगा।

सैंपलिंग में तेजी और रिपोर्ट में देरी

दिवाली हो या कोई और त्योहार खाद्य सामग्री में मिलावट की जांच के लिए सैंपलिंग युद्ध स्तर पर शुरू हो जाती है, लेकिन रिपोर्ट का ठिकाना नहीं रहता, जबकि 14 दिन में रिपोर्ट मिल जानी चाहिए, पर अधिकारियों का फोकस सैंपलों पर ही होता है।

सीधी बात- देवेंद्र दुबे, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी खाद्य-औषधि प्रशासन

रिपोर्ट जल्दी देने के लिए डिपार्टमेंट को पत्र लिखते हैं

सालभर में कितने सैंपलों की जांच रिपोर्ट आई और कितनी पेंडिंग हैं

सालभर में हमारे द्वारा 650 से ज्यादा लीगल सैंपल लिए गए। इनमें से करीब 350 की रिपोर्ट आना बाकी है।
सैंपलों की रिपोर्ट जल्दी आ जाए, इसे लेकर क्या करते हैं?
इस संबंध में डिपार्टमेंट को पत्र लिखा जाता है। ये बात सही है कि रिपोर्ट लेट आने के चलते कई खाद्य पदार्थों की मिलावट की जांच समय पर नहीं हो पाती है।
हर महीने फूड इंस्पेक्टर को 6 लीगल सैंपल लेना अनिवार्य, पर त्योहारी सीजन में सैंपल ज्यादा लिए जा रहे हैं, क्यों?
नियम 6 लीगल सैंपल लेने का है, लेकिन ईट राइट चैंलेंज के चलते टारगेट बढ़ा दिया गया है। अब हर महीने 15 सैंपल लिए जा रहे हैं।

वजह... प्रदेश में एक ही लैब
करीब दो साल पहले तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट और संयुक्त नियंत्रक खाद्य औषधि ने 14 दिन के भीतर सैंपलों की रिपोर्ट देने के आदेश जारी किए थे। साथ ही साफ किया था कि इनकी जांच लीगल सैंपलों जैसी 14 दिन के अंदर पूरी की जाए। लेकिन, इसका पालन नहीं हो सका। हालात यह हैं कि शहर से लिए जाने वाले खाद्य पदार्थों के सैंपलों की जांच के इंतजार में प्रदेश स्तरीय प्रयोगशाला में धूल खा रहे हैं।