MP में छिड़ेगा ज्ञानवापी जैसा विवाद?:भोपाल की जामा मस्जिद में शिव मंदिर होने का दावा; आधार ये बताया...

भोपाल6 महीने पहलेलेखक: ईश्वर सिंह परमार

भोपाल के चौक बाजार स्थित जामा मस्जिद को लेकर भी विवाद छिड़ गया है। संस्कृति बचाओ मंच का दावा है कि मस्जिद में शिव मंदिर है। इसका जिक्र उर्दू में लिखी 688 पेज की बुक 'हयाते कुदसी' में होने की बात कही है। इसका जिक्र उस किताब में है जो खुद मंदिर तोड़ने वाली महिला शासक ने लिखी थी। इस आधार पर आज याचिका भी लगाए जाने की तैयारी है। ये बुक हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ट्रांसलेटेड है। इधर, UP के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद का मामला देश भर में सुर्खियों में है। अब भोपाल में भी मस्जिद में मंदिर होने का दावा किया जा रहा है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में जानिए मस्जिद का इतिहास, क्या है इसे मंदिर बताने के दावे की वजह...

तीन दिशा से एंट्री, अंदर से आकर्षक, लाल रंग के पत्थरों से बनी
जामा मस्जिद चौक बाजार में है। यह मस्जिद लाल रंग के पत्थरों से निर्मित है। इसका निर्माण भोपाल राज्य की 8वीं नवाब परिवार की शासक कुदसिया बेगम ने करवाया था। यह मस्जिद दिल्ली की जामा मस्जिद की तरह ही चार बाग पद्धति पर आधारित है। नौ मीटर वर्गाकार ऊंची जगह पर निर्मित इस मस्जिद के चारों कोनों पर 'हुजरे' बने हैं। इसमें तीन दिशाओं से प्रवेश द्वार हैं। अंदर बड़ा आंगन है। पूर्वी एवं उत्तरी द्वार के मध्य हौज है। यहां का प्रार्थना स्थल अर्द्ध स्तंभ एवं स्वतंत्र स्तंभ पर आधारित है।

अंदर से ऐसी दिखती है जामा मस्जिद।
अंदर से ऐसी दिखती है जामा मस्जिद।

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कौन थीं कुदसिया बेगम
कुदसिया बेगम भोपाल की पहली महिला शासक थीं। वर्ष 1819 में 18 वर्ष की उम्र में कुदसिया बेगम ने पति की हत्या के बाद बागडोर संभाली थी। वह अनपढ़ थीं, लेकिन बहादुर थीं। उन्होंने पर्दा परंपरा का पालन करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने घोषणा की थी कि उनकी 2 वर्षीय बेटी सिकंदर शासक के रूप में उसका पालन करेंगी। उसके फैसले को चुनौती देने की हिम्मत परिवार के किसी भी सदस्य ने नहीं की। उन्होंने भोपाल की जामा मस्जिद का निर्माण कराया था। 1837 तक शासन किया। मृत्यु से पहले कुदसिया बेगम ने अपनी बेटी को राज्य पर शासन करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार किया था।

'हयाते कुदसी' किताब के पेज नंबर 133 और 134 पर मस्जिद को मंदिर तोड़कर बनाने का जिक्र है। (ये फोटो भारत सरकार की एक ऑफिशियल वेबसाइट से लिया गया है, जो 2019 में पब्लिश किया गया था)
'हयाते कुदसी' किताब के पेज नंबर 133 और 134 पर मस्जिद को मंदिर तोड़कर बनाने का जिक्र है। (ये फोटो भारत सरकार की एक ऑफिशियल वेबसाइट से लिया गया है, जो 2019 में पब्लिश किया गया था)
भोपाल की पहली महिला शासका कुदसिया बेगम, जिन्होंने मस्जिद बनवाई थी।
भोपाल की पहली महिला शासका कुदसिया बेगम, जिन्होंने मस्जिद बनवाई थी।

वर्ष 1958 में वक्फ रजिस्ट्रेशन
जामा मस्जिद का वक्फ रजिस्ट्रेशन 10 जनवरी 1958 में कराया गया था। नवाब गौहर गुदसिया फरमारवा-ए-रियासत भोपाल के नाम से रजिस्ट्रेशन है। इसका एरिया 101.35 वर्ग फीट है।

शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने दावा किया है कि जामा मस्जिद भोपाल रियासत कालखंड की है।
शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने दावा किया है कि जामा मस्जिद भोपाल रियासत कालखंड की है।

दुकानों से सालाना कमाई 50 लाख रुपए
जामा मस्जिद की औकाफे शाही कमेटी की दुकानों से सलाना कमाई 50 लाख रुपए है। दरअसल, मस्जिद के चारों ओर नीचे की साइड में कपड़ा-ज्वैलर्स शॉप हैं। वहीं, सामने की तरफ भी कमेटी की प्रॉपर्टी की है। इस तरह करीब 130 दुकानों से कमेटी की कमाई है। एनुअल रिपोर्ट की मानें तो वर्ष 2017-18 में कमेटी की कमाई 38 लाख 78 हजार 900 रुपए थी, जो वर्ष 2020-21 में बढ़कर 50 लाख रुपए हो गई है। वर्ष 2021-22 में भी इतनी की कमाई का अनुमान है।

भोपाल रियासत कालखंड की है जामा मस्जिद
शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, मुफ्ती अब्दुल कलाम कासमी, नायब काजी सैयद बाबर हुसैन नदवी, नायब मुफ्ती रईस अहमद कासमी, जसीम दाद खां जामई, नायाब काजी मो. शराफत रहमानी, मो. अली कदर हुसैनी आदि ने एक संयुक्त बयान में कहा कि जामा मस्जिद भोपाल रियासत कालखंड की है। इसके तमाम दस्तावेज जामा मस्जिद प्रबंध कमेटी के पास मौजूद हैं। इसके लिए जामा मस्जिद कमेटी के सेक्रेटरी से संपर्क किया जा सकता है। हम अवाम से अपील करते हैं कि वह सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट या मैसेज डालने से परहेज करें। शहर काजी समेत उलेमाओं का कहना था कि सोशल मीडिया पर जामा मस्जिद को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं। यह सरासर गलत और गुमराह करने वाली हैं।

जामा मस्जिद की सलाना कमाई को लेकर पिछले पांच साल की रिपोर्ट।
जामा मस्जिद की सलाना कमाई को लेकर पिछले पांच साल की रिपोर्ट।

मस्जिद को लेकर ये दावा, कोर्ट में पिटीशन लगाई
वाराणसी (UP) की ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर छिड़े विवाद के बीच भोपाल की जामा मस्जिद में शिव मंदिर होने का दावा संस्कृति बचाओ मंच ने किया है। इसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया है। मंच ने सरकार से ज्ञानवापी मस्जिद की तर्ज पर सर्वे कराने की मांग की है। मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण कराया था।

कुदसिया बेगम ने अपनी बुक में भी यह उल्लेख किया है। कोर्ट में भी पिटीशन लगाने की तैयारी है। वीर शिवाजी जागृति मंच के अध्यक्ष सुधीर मानें ने बताया कि सर्वे कराने से तस्वीर साफ हो जाएगी, इसलिए सर्वे होना चाहिए।

भोपाल की जामा मस्जिद में शिव मंदिर का दावा बताते हुए संस्कृति बचाओ मंच ने गृह मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा है।
भोपाल की जामा मस्जिद में शिव मंदिर का दावा बताते हुए संस्कृति बचाओ मंच ने गृह मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा है।

कमेटी से कोई बयान नहीं
मामले में औकाफे शाही कमेटी का बयान सामने नहीं आया है। दैनिक भास्कर ने कमेटी के पदाधिकारियों से चर्चा भी करना चाही, लेकिन आधिकारिक तौर पर बयान नहीं दिया गया।

जामा मस्जिद भोपाल रियासत कालखंड की है, इसके दस्तावेज भी कमेटी के पास
इस मामले में शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, मुफ्ती अब्दुल कलाम कासमी, नायब काजी सैयद बाबर हुसैन नदवी, नायब मुफ्ती रईस अहमद कासमी, जसीम दाद खां जामई, नायाब काजी मो. शराफत रहमानी, मो. अली कदर हुसैनी आदि ने एक संयुक्त बयान में कहा कि जामा मस्जिद भोपाल रियासत कालखंड की है। इसके तमाम दस्तावेज जामा मस्जिद प्रबंध कमेटी के पास मौजूद हैं। इसके लिए जामा मस्जिद कमेटी के सेक्रेट्री से संपर्क किया जा सकता है। हम अवाम से अपील करते हैं कि वह सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट या मैसेज डालने से परहेज करें। शहर काजी समेत उलेमाओं का कहना था कि सोशल मीडिया पर जामा मस्जिद को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं। यह सरासर गलत और गुमराह करने वाली हैं।

यह है ज्ञानवापी विवाद

1991 में याचिकाकर्ता स्थानीय पुजारियों ने उत्तरप्रदेश के वाराणसी कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में याचिकाकर्ताओं ने ज्ञानवापी मस्जिद एरिया में पूजा करने की इजाजत मांगी थी। याचिका में कहा गया कि 16वीं सदी में औरंगजेब के आदेश पर काशी विश्वनाथ मंदिर के एक हिस्से को तोड़कर वहां मस्जिद बनवाई गई थी। दावा किया गया कि मस्जिद परिसर में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं। उन्हें ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पूजा की इजाजत दी जाए। दरअसल, काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण मालवा राजघराने की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था।

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