गरीबों से कहते- हिंदू धर्म बुरा, ईसाई अच्छा:भोपाल के स्कूल में डेढ़ साल से चल रहा धर्मांतरण का खेल, जानें कैसे फंसाते थे जाल में?

भोपाल6 महीने पहलेलेखक: अनूप दुबे

भोपाल में बैरागढ़ इलाके के क्राइस्ट मेमोरियल स्कूल में डेढ़ साल से धर्मांतरण का खेल चल रहा था। रविवार को इस मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने यहां से बाप-बेटी समेत 4 लोगों को पकड़ा था। फरार स्कूल संचालक मैनिज मैथ्यूज भी गिरफ्तार हो गया है। उसने ही इस पूरे खेल का खुलासा किया। मैथ्यूज के मुताबिक राजेश मालवीय के कहने पर ही उसने उन लोगों को स्कूल में प्रार्थना करने की जगह दी थी। जिसके बाद हर रविवार को वहां राजेश मालवीय, उसकी बेटी रितिका मालवीय, होटल संचालक राहुल कुमार, कामिनी जॉन और पॉल पोलुस के साथ 15 से 20 लोग आते थे।

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बैरागढ़ थाना प्रभारी डीपी सिंह ने बताया कि सभी की अपनी जिम्मेदारी थी। कुछ लोग गांव जाकर गरीब हिंदुओं को लालच देकर भोपाल लाते। यहां पर रितिका लोगों को क्रिश्चियन धर्म की अच्छी बातों के बारे में बताती, जबकि राजेश लोगों का धर्म परिवर्तन कराता था। पुलिस स्कूल संचालक समेत 6 लोगों को अब तक आरोपी बना चुकी है। इनमें दो महिलाएं भी हैं। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा खुद अब इस मामले में पूरी नजर रखे हुए हैं। गृहमंत्री ने प्रदेश के सभी मिशनरी स्कूलों पर नजर रखने के लिए इंटेलिजेंस को कहा है।

प्रार्थना की आड़ में बदलवाते थे धर्म
आरोपियों के टारगेट पर भोपाल के आसपास के गरीब हिंदू परिवार रहते थे। रविवार का दिन इसलिए चुना, क्योंकि इस दिन चर्च में प्रार्थना होती। साथ ही ईसाई लोग प्रेयर के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में लोगों के वहां आने से किसी को कोई संदेह न हो, इसी की आड़ में यह पूरा खेल चल रहा था। थाना प्रभारी डीपी सिंह ने बताया कि इस खेल में किसका-क्या किरदार था।

हिंदू संगठनों की शिकायत पर पुलिस ने क्राइस्ट मेमोरियल स्कूल में दबिश दी थी।
हिंदू संगठनों की शिकायत पर पुलिस ने क्राइस्ट मेमोरियल स्कूल में दबिश दी थी।

मैनिज मैथ्यूज (मास्टरमाइंड)
क्राइस्ट मेमोरियल स्कूल के संचालक मैनिज मैथ्यूज का काम स्कूल का एक बड़ा हॉल राजेश मालवीय को प्रार्थना के लिए उपलब्ध कराना था। रविवार के दिन कोई बाहरी अंदर न आ सके, इसके लिए पूरी नजर रखी जाती थी। मैथ्यूज के अलावा स्कूल में रविवार को क्या होता है? किसी और को पता नहीं होता था। हमेशा लोगों की संख्या 15 से 20 ही होती थी, ताकि एक जैसी संख्या रहने से किसी को संदेह न हो।

राजेश मालवीय (फादर)
सीहोर का रहने वाला राजेश मालवीय प्रार्थना के दौरान लोगों को यीशु की शरण में आने के फायदे बताता था। इस दौरान 15 से 20 लोग होते थे। जो भी आसानी से क्रिश्चियन बनने को तैयार हो जाता, उसका धर्मांतरण कराने की प्रोसेस शुरू कर दी जाती। राजेश फादर बनकर उनका धर्म परिवर्तित करता था।

कामिनी और रितिका (काउंसलर)
राजेश की बेटी रितिका मालवीय लोगों की काउंसलिंग करती थी। जबकि कामिनी प्रार्थना के लिए आने वाले लोगों को समझाती थी कि उन्हें यीशु के पास क्यों आना चाहिए। दोनों उन्हें इस तरह से समझाती थीं कि यह एक अच्छी शिक्षा है। यीशु उन्हें सच और सत्य के मार्ग पर ले जाएंगे। उनका जीवन ऊपर उठेगा। उनके बच्चों को मिशनरी स्कूल में दाखिला मिलेगा। इससे बड़े होकर उनके बच्चे अच्छी नौकरी पा सकेंगे। हिंदू धर्म बुरा है... क्रिश्चियन अच्छा है।

राहुल कुमार (प्रार्थना कराना)
मूलत: बिहार के रहने वाले राहुल कुमार की लालघाटी पर होटल है। वह लोगों को प्रार्थना कराता था। वह कहता था कि प्रार्थना में बड़ा बल होता है। यीशु की प्रार्थना करो और फिर रिजल्ट देखो। सब कुछ बदल जाएगा। अच्छा ही होगा। दुख दूर होंगे। हम सब एक-दूसरे की शक्ति बनेंगे। राहुल के कहने पर कामिनी जॉन और पॉल पोलुस आसपास के गांवों में जाते थे। लोगों की जरूरत में उनकी मदद करते थे। धीरे-धीरे विश्वास जीतने के बाद उन्हें प्रार्थना में आने के लिए प्रेरित करते थे। उन्हें लालच देते हुए कहते थे कि प्रार्थना में शामिल होने वालों को मकान बनाकर देते हैं। उनकी शादियों में मदद की जाती है। यहां तक कि भोपाल तक आने में उनकी मदद की जाती थी।

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