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स्त्री शक्ति संवाद:भारतीय फिल्म व्यवसाय कुछ हद तक पुरुष प्रधान; यह बात सही भी : अद्वैता काला

भोपाल10 महीने पहले
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फिल्म पटकथा लेखिका एवं उपन्यासकार अद्वैता काला - Dainik Bhaskar
फिल्म पटकथा लेखिका एवं उपन्यासकार अद्वैता काला
  • एमसीयू की ऑनलाइन व्याख्यानमाला में प्रख्यात पटकथा लेखिका सुश्री अद्वैता काला ने व्यक्त किए अपने विचार
  • 24 जून को शाम 4:00 बजे अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज सुश्री श्रेयसी सिंह करेंगी संवाद

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित ऑनलाइन व्याख्यानमाला ‘स्त्री शक्ति संवाद’ में प्रख्यात फिल्म पटकथा लेखिका एवं उपन्यासकार अद्वैता काला ने कहा है कि भारतीय फिल्में महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिल्म लेखन में सफलता के लिए भारतीयता, संस्कृति और सोच को भी पटकथा में शामिल किया जाना चाहिए। अनुभव, भारतीय परंपराओं सहित महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर फिल्म लेखन में असीम संभावनाएं हैं। इस तरह के विषयों पर लोगों में रुचि अधिक होती है।

‘नये समय में पटकथा लेखन’ विषय पर अपने व्याख्यान में अद्वैता काला ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि आप तभी लेखक हो जब तक आपकी किताब न छप जाए लेकिन ऐसा है नहीं, अगर आपका लेखन अच्छा है तो आपको जरूर मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि भारतीय फिल्म व्यवसाय कुछ हद तक पुरुष प्रधान माना जाता है। कुछ हद तक यह बात सही भी है लेकिन ऐसा नहीं कि महिलाओं ने इस व्यवसाय में सफलता हासिल नहीं की है। ऐसे कई नाम और उदाहरण हैं, जिनसे कहा जा सकता है कि यह क्षेत्र महिलाओं के लिए भी उतनी ही है जितनी पुरुषों के लिए। हालांकि फिल्म लाइन में दिखाई दे रहे नकारात्मक माहौल को दूर करने के लिए चिंतन जरूर किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आप जो भी लिख रहे हैं उसका कॉपीराइट जरूर कराना चाहिए। लेखन के क्षेत्र में चोरी एक सबसे बड़ी समस्या है। अपने विचार और आईडिया हर किसी से शेयर नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पटकथा लेखन के दौरान कहानी के साथ अपने आप को जोड़ कर देखना होता है तभी आप कहानी के साथ न्याय कर सकते हो। खुद के अनुभवों के आधार पर लेखन को नई दिशा दी जा सकती है। जरूरी नहीं हर कहानी पर फिल्म बनाई जाए लेकिन इस आधार पर आपको लिखना बंद नहीं करना चाहिए। लेखन को मन से जोड़ कर किया जाना जरूरी है। लेखन के लिए जरूरी है कि सबसे पहले आप डर और चिंता छोड़कर लिखना शुरू करें।

उन्होंने बताया कि ‘कहानी’ फिल्म की पटकथा लिखते समय उन पर मुंबई के आतंकवादी हमले का काफी असर हुआ। उनकी इस फिल्म में यह बात नजर भी आती है। उन्होंने कहा कि घटनाओं के आधार पर आपके लेखन की शैली तक बदल जाती है। उन्होंने कहा कि फिल्म में टीम वर्क के आधार पर काम होता है। इस क्षेत्र में आपसी विश्वास बनाना जरूरी होता है। फिल्म व्यवसाय में गुटबाजी और अविश्वास की समस्या भी देखने को मिलती है। आपसी समन्वयन के अभाव में फिल्म के क्षेत्र में कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं।

बुधवार को ‘स्त्री शक्ति, खेल और मीडिया’ पर संवाद :
एमसीयू की ऑनलाइन व्याख्यानमाला ‘स्त्री शक्ति संवाद’ में 24 जून को शाम 4:00 बजे ‘स्त्री शक्ति, खेल और मीडिया’ विषय पर अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज एवं कॉमनवेल्थ खेलों की गोल्ड मेडल विजेता सुश्री श्रेयसी सिंह अपना व्याख्यान देंगी। उनका व्याख्यान विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज पर शाम 4:00 बजे किया जाएगा।

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