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भास्कर इंटरव्यू'दूसरे धर्म के व्यक्ति पर तिल बराबर भरोसा ना करें':बागेश्वर 'सरकार' बोले-ऐसे लोगों से रिश्ता तो दूर की बात, हाथ जोड़ना भी गुनाह

बागेश्वर धाम2 महीने पहले

युवा संत बागेश्वर धाम सरकार यानी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री प्रवचन के खास अंदाज के साथ ही अपने बयानों के कारण भी सुर्खियों में रहते हैं। भाजपा से निष्कासित प्रीतम लोधी से उनका वाकयुद्ध भी खूब चर्चा में रहा। धाम पर सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप भी हैं।

दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने पहली बार विवादों और आरोपों पर खुलकर जवाब दिए। उन्होंने यह चौंकाने वाला खुलासा भी किया कि उनके खिलाफ प्लांटेड षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए लोग भेजे जा रहे हैं। पढ़िए बातचीत के खास अंश...

सवाल : संत तो हमेशा यही संदेश देते हैं कि वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए, लेकिन आपके कुछ बयान ठीक इसके विपरीत हैं?

- पहली बात तो यह कि हम कोई साधु नहीं हैं। यदि सनातन संस्कृति की एकजुटता के लिए ये भड़काऊ बयान है तो ये होते रहना चाहिए। इन बयानों से यदि सनातन धर्म की उन्नति हो रही है तो ये बातें होती रहनी चाहिए। पहली बात ये भड़काऊ नहीं हैं। इसमें कोई संवेदनहीनता नहीं है। अहिंसा के बाद के मार्ग की बात हम कह रहे हैं। हमने किसी भी बयान में यह नहीं कहा कि किसी को मारो या काटो।

हमने कहा कि जागो। हां, आप लोगों ने सिर्फ इतना पकड़ रखा है कि अहिंसा परमो धर्म: (अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है), लेकिन इसके आगे की सूक्ति नहीं पकड़ रखी है, यही भारत की दुर्दशा की वजह है। आगे की सूक्ति कहती है धर्म हिंसा तथैव च (धर्म रक्षार्थ हिंसा भी उसी प्रकार श्रेष्ठ है)। हम आपसे पूछते हैं कोई आपकी बहन की आबरू पर हाथ डाले तो क्या आप चुप बैठेंगे? हम तो चुप नहीं बैठेंगे।

सवाल : लेकिन देश में न्याय व्यवस्था भी तो है?

- हम न्याय व्यवस्था के पालन की ही बात करते हैं। हमने यह नहीं कहा कि न्यायपालिका को तोड़ना है। न्याय के साथ ही जीवन में काम करना है। आत्मरक्षा के लिए बुलडोजर की बात हमने कही है।

सवाल : आपका मतलब है कि कोई आप पर बंदूक उठाए तो हमें भी बंदूक उठाना चाहिए?

- बिल्कुल, उठाना चाहिए। यदि उसको अधिकार है तो हमें नहीं है? यदि आत्मरक्षा करने के लिए जरूरत पड़ती है, जरूर करना चाहिए। क्या आत्मरक्षा करना हिंसा है? मर जाएं क्या? कोई मारकर चला जाए? हमारी तो कहानी खत्म हो जाए। आत्मरक्षा करना हिंसा नहीं है। सभी बयानों में हमने अहिंसा की बात की, आत्मरक्षा की बात की, सनातन रक्षा की बात की। बुलडोजर से किसी का भी घर तुड़वाने की बात नहीं कही। आत्मरक्षा के लिए जागिए।

सवाल : भाजपा से निष्कासित नेता प्रीतम लोधी के बयान पर आपने कहा था कि मसल दूंगा। इस पर आप कायम हैं?

- यह हमारी ग्रामीण भाषा में था। हम प्रीतम लोधी के विरोधी नहीं हैं, न हम उनके समाज के विरोधी हैं, वो सब हमारी आत्मा हैं। प्रीतम लोधी से हमारी कोई दुश्मनी नहीं है। वो हमारा कोई शत्रु नहीं है, वो हमारे अपने हैं। सनातनी हिंदू व्यक्ति हैं। जब उन्होंने हिंदू को ही काटने की बात कही और जब जातिवाद फैलाने की बात की, जब ब्राह्मणों पर टिप्पणी की, जब कथावाचकों पर टिप्पणी की, तब कहा कि प्लीज आप सबको नहीं बोल सकते। पर्टिकुलर नाम लीजिए।

एक व्यक्ति पर बोलिए। आपको यह किसने अधिकार दे रखा है कि सब संतों के लिए बोलेंगे। हम क्या सब मीडिया वालों को गलत बोल सकते हैं? हमारी उनसे कोई बुराई नहीं है। वो अपना काम कर रहे हैं, हम अपना काम कर रहे हैं। रही मसलने वाली बात तो हमारे शास्त्रों में ये वर्णन है कि कोई आततायी है तो उसे पहले प्रेमपूर्वक समझाओ, फिर थोड़ा कड़क होकर समझाओ, ताकि वह समझ जाए। इसके बाद साम, दाम दंडभेद… फिर आपको सब पता ही है।

सवाल : आपकी नजर में प्रीतम लोधी आततायी हैं?

- अगर सनातन धर्म के खिलाफ बोलेगा, सभी धर्माें के खिलाफ बोलेगा, जातिवाद फैलाएंगे तो वो धर्म विरोधी है और ऐसा व्यक्ति आततायी है। केवल प्रीतम नहीं, भारत के जितने भी ऐसे लोग हैं, वे आततायी हैं।

सवाल : आपके और प्रीतम लोधी के बीच विवाद को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समझौता कराया था?

- हमारे पास ऐसी जानकारी आई थी, लेकिन न वो हमारे सामने आए, न उनसे सामने बैठकर बात हुई। दूरभाष से किसी महापुरुष की श्रेणी वाले व्यक्ति, जिनका मीडिया में नाम लेना उचित नहीं है, ने बात की थी कि गुरुजी अमुक व्यक्ति अपनी तरफ से माफी मांग रहे हैं। प्रीतम जी कह रहे हैं कि वो कुछ नहीं बोलेंगे, तब हमने यह कहा था कि हमारी उनसे कोई दुश्मनी नहीं है। वो हमारे शत्रु नहीं हैं, हमें उनसे कोई दिक्कत नहीं है। आज भी नहीं है, न कल रहेगी। शिवराज जी से इस विषय पर किसी प्रकार की बात नहीं हुई है। हां, शिवराज जी से संबंधित लोगों से बात हुई है। ऐसा हमने सुना है कि वहां वो ( शिवराज सिंह) बैठे थे।

सवाल : इसके बाद भी प्रीतम लोधी ने आपको पाखंडी तक कहा है?

- वो अपना काम कर रहे हैं। हम अपना काम कर रहे हैं। हमें उनसे कोई दिक्कत नहीं। कोई क्या बोल रहा, इससे भी हमें कोई मतलब नहीं। हां, सनातन के खिलाफ कोई भी व्यक्ति बोलेगा तो हम जागेंगे और लोगों को भी जगाएंगे। व्यक्तिगत रूप से कोई बुराई नहीं। सभी की अपनी-अपनी श्रद्धा है। कोई व्यक्ति हमें आकर गुरु मान जाता है, कोई माला चढ़ा जाता है, कोई वस्त्र चढ़ा जाता है और कोई गाली चढ़ा जाता है। हम मुस्कुराकर सब स्वीकार कर लेते हैं। सेम टू यू।

सवाल : प्रीतम लोधी ने एक गंभीर आरोप लगाया है उनके समधी दारा सिंह को आपके आश्रम में बुलाया। उनके साथ मारपीट की और सड़क पर पटक दिया, जिसके बाद उनकी मौत हो गई?

- झूठ और मिथ्या। बागेश्वर धाम पर ऐसी कोई प्रतिक्रिया नहीं होती। धाम में किसी भी प्रकार की हिंसा का सवाल ही नहीं उठता। हम किसी को ऐसे ऑर्डर नहीं देते कि किसी प्रकार की हिंसा हो। हम लोग तो साधु श्रेणी के हैं, सनातन रक्षा की बात करते हैं। यदि हम ही अधर्म करने लगेंगे तो लोगों का विश्वास कहां जाएगा? यह सब राजनीति में चमकने की बात है। क्या कानून मर गया? कानून अंधा है क्या? जांच नहीं होती क्या? यह विषय तो हमारे धाम से संबंधित भी नहीं है। आसपास कहीं हुआ होगा, इसकी हमें जानकारी नहीं है। गांव के बाहर कुछ हो जाए, हमें क्या लेना-देना? आपकी जानकारी के लिए बता दें पूरा धाम सीसीटीवी से कवर है।

सवाल : फिर प्रीतम लोधी ऐसा क्यों कह रहे हैं?

- भगवान जाने, आप उनसे जाकर जरूर पूछिएगा।

सवाल : बागेश्वर धाम पर यह आरोप भी है कि यहां के तालाब और श्मशान की जमीन को पाटकर कब्जा किया जा रहा है?

- इस गतिविधि से हमारा कोई संबंध नहीं है। वहां सौंदर्यीकरण का कार्य विधायक निधि से हो रहा है। इसमें ग्राम पंचायत की अनुमति है। पास में भक्तों के ठहरने के लिए टीन शेड की व्यवस्था हो रही है। यह सब सार्वजनिक हित में हो रहा है, न कि व्यक्तिगत। हमारे दरबार के लिए हमें कोई भी जमीन की आवश्यकता नहीं है। जमीन की आवश्यकता होगी तो यहां क्यों, कहीं भी ले सकते हैं। हम क्यों अतिक्रमण करेंगे। इतने आरोप क्यों झेलेंगे? यह सब मिथ्या है। प्रायोजित ढंग से सनातनी विरोधी कुछ लोग लगे हैं कुछ दिनों से। हम अपने पवित्र मुंह से उनका नाम नहीं लेंगे। ये प्रायोजित ढंग से तिल को पहाड़ बना रहे हैं। बहुत जल्द सत्य का सामना होगा।

सवाल : बागेश्वर धाम पर सामुदायिक भवन पर कब्जे का भी आरोप है?

- सामुदायिक भवन में आयुष औषधालय है। एक सामुदायिक भवन में दरबार लगता है। हमारा कोई निजी कब्जा नहीं है। भगवान की कृपा है कि हमारे पिताजी के नाम जमीन है, वहां हमारा निवास है, वहां रहते भी हैं। जहां दरबार लगता है, वहां बैठना हमारी मजबूरी है और दरबार किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं लगता, सभी के लिए लगता है।

सवाल : यह भी आरोप है कि धाम से लगी खसरा नंबर 229 की निजी जमीन को जबरन खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है?

- वैसे यह मामला सुलझ गया है। वो हमारे पास आए भी थे। उन्होंने स्वीकार भी किया कि वह उनकी भूल है। जल्द ही सत्यता सबके सामने आएगी। बालाजी के आसपास प्रशासन ने जिगजैग बनाया है। भक्तों की व्यवस्था के लिए। मंदिर तो 10 साल पहले से है तब तो उन्हें 229 याद नहीं आया। आज याद आया। अब आप समझ जाइए इसके पीछे कहानी क्या है? सनातन धर्म विरोधी लोगों का यह प्रायोजित षड्यंत्र है। किसी भी तरह धाम को बदनाम किया जाए। हमें किसी भी जमीन की आवश्यकता नहीं है। भगवान की हम पर खूब कृपा है। पर्याप्त व्यवस्था है। हमें ऐसा ही कुछ करना होगा तो अन्य जगह जाकर बना लेंगे।

सवाल : आपके ताऊ ने चचेरे भाई को धाम का उत्तराधिकारी बताते हुए पंडोखर सरकार के पास ले गए और मदद मांगी। उन्होंने आपको असत्य और छलिया तक कह दिया था?

- कुछ भी नहीं। वो उनकी अवधारणा थी, धन्यवाद। हम तो सभी की अवधारण का धन्यवाद कहते हैं। जहां तक ताऊजी की बात है, हमारी उनसे कोई बुराई नहीं है। आना-जाना आज भी है, वे आज भी आते हैं। वहां कैसे पहुंचे, ईश्वर जाने?

(बातचीत के अगले पार्ट में 9 दिसंबर को पढ़िए बागेश्वर 'सरकार' ने अपनी पार्टी और शादी की प्लानिंग को लेकर क्या कहा...)

सवाल : श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। लगता है कि धाम का विस्तार करना पड़ेगा?

- इसके लिए शासन-प्रशासन सोचें। हमारा जितना सामर्थ्य है, उतना विस्तार कर चुके हैं।

सवाल : तो फिर सरकार का भी हस्तक्षेप होगा?

- हमें कोई दिक्कत नहीं है। कोई न कोई व्यवस्था बनाए। वर्तमान में ग्राम पंचायत और बागेश्वर सेवा समिति है, जो लगातार यहां पर सेवा का कार्य कर रही है।

सवाल : आपको लगता है कि थ्रेट (धमकी) भी है। कोई नुकसान भी पहुंचा सकता है?

- कोशिश तो लगातार कर रहे हैं, जब तक बालाजी की कृपा है, कुछ नहीं होगा, बाल बांका नहीं होगा। हम कदम संभल-संभलकर रख रहे हैं। आगे भी रखते रहेंगे। अब ये लोग कुछ भी करते रहते हैं। हर रोज प्लांटेड लोग भेजते हैं। दो-चार-दस दिन में एकाध को पकड़ लेते हैं। भगवान की कृपा है। हमारा वाई-फाई बड़ा स्ट्राॅन्ग है।

सवाल : क्या कभी ऐसा हुआ कि इस तरह का काेई व्यक्ति आप तक पहुंच गया?

- कई बार। हमने इस बारे में पुलिस को भी सूचना दी है। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई कर आश्रम की सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई। कानून से हम बाहर नहीं हैं। एक बार एक चिट्‌ठी भी आई थी।

सवाल : क्या आपको लगता है कि जिनके खिलाफ आप बोलते हैं वे इससे जुड़े हैं?

- जी बिल्कुल ये लोग सनातन एंटी हैं। ये लोग दुखी हैं। ये षड्यंत्र उन्हीं लोगों ने किया। वो आज भी कर रहे हैं, करते रहेंगे, लेकिन हम इससे डरते नहीं। यदि आप सनातन का काम मुखर होकर कर रहे हैं, तो यह बहुत चुनौती भरा है। आज जो स्थिति है, वह बहुत विचित्र है।

सवाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में कहा है कि समान नागरिक संहिता लागू होना चाहिए। इसके बारे में आप क्या सोचते हैं?

- यह विचार बहुत अच्छा है। इसका हम सम्मान करते हैं। यह लागू होना चाहिए। भारत हिंदू राष्ट्र बनने जा रहा है। इसकी तैयारी चल रही है।

सवाल : मध्यप्रदेश में नाम बदलकर शादी करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं?

- बागेश्वर धाम का इसी बात का तो विरोध है कि हम हमेशा सनातनी हिंदुओं को जगाने का काम करते हैं। जरूरी नहीं है कि जो तिलक लगाए हुए हो या धागा पहने हो, वह हिंदू हो। एक सज्जन का हमें यह सूत्र बहुत याद आता है कि ऑयल के कनस्तर में हाथ डुबाओ और फिर तिल के बोरे में हाथ रखो। जितने भी तिल आपके हाथ में छप जाए, उतनी बार भी दूसरे धर्म का व्यक्ति सौगंध खाए तो भी उस पर तिल के बराबर भरोसा न करें। इसी पर हम बात करते हैं तो हमारा विरोध है, जो व्यक्ति सनातन की बात करता है उसी के पीछे लगते हैं। अब हिंदू जाग भी रहे हैं, सनातनी जाग भी रहे हैं।

हमारी बहनों को जागना होगा, जो कहती हैं हमारा वाला ऐसा नहीं होगा। हम कई कथाओं में चिल्ला रहे हैं। बोल रहे हैं। हमें क्या पड़ी। अच्छा-खासा दरबार चल रहा है, अच्छी-खासी हमारी कथा चल रही है। हमें क्या पड़ी आफत मोल लेने की, इन सनातन धर्म के विरोधियों के टारगेट में आने की। अनशन और ये जो सब चल रहा है यह सब प्लांटेड लोग हैं, इन्हें रुपया मिल रहा है, क्योंकि ये सामना नहीं कर सकते। ये हिंदुओं को हिंदुओं से लड़ाना चाहते हैं। अब हिंदुओं को जागना पड़ेगा, हमारी बहनों को जागना पड़ेगा और ऐसे लोगों को मुंहतोड़ जवाब देना पड़ेगा। ऐसे लोगों से रिश्ता तो बहुत दूर की बात है, हाथ जोड़ना भी गुनाह है।

ग्राफिक्स: विशाल सोनी
ग्राफिक्स: विशाल सोनी

(बातचीत के अगले पार्ट में 9 दिसंबर को पढ़िए बागेश्वर 'सरकार' ने अपनी पार्टी और शादी की प्लानिंग को लेकर क्या कहा...)

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