बाढ़, बारिश, अंधेरे में भोपाल में ऐसे गुजरी रात:राहत शिविर में अलाव तापकर गुजारी रात; न पहनने को कपड़े बचे, न खाने का सामान

भोपाल3 महीने पहले

भोपाल में हुई मूसलाधार बारिश ने कई परिवारों को राहत शिविरों में रहने को मजबूर कर दिया है। राहत शिविरों में फौरी तौर पर प्रशासन ने रहने-खाने के इंतजाम तो कर दिए, लेकिन बारिश के पानी में इनकी गृहस्थी उजड़ गई। बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रशासन उन्हें उनके घर में तो शिफ्ट कर देगा, लेकिन इनके सामने अब संकट रोजी-रोटी का है।

यह दर्द किसी एक बाढ़ पीड़ित का नहीं बल्कि भोपाल के हबीबिया स्कूल राहत केन्द्र में ठहराए गए महामाई का बाग के 8 परिवारों का है। राहत शिविर में इन परिवारों की रात जागकर ही गुजरी। मासूम बच्चों में भी बाढ़ का खौफ साफ दिखा। वह शिविर में देर रात तक जागते रहे और घर चलने की जिद करते रहे।

स्कूल में ठहरे लोगों से ही जानिए आखिर कैसी गुजरी उनकी रात...

हबीबिया स्कूल के शिविर में रात 1 बजे परिवार के साथ अलाव तापकर रात गुजार रहे 7 साल के नीलेश ने कहा कि पानी के चक्कर में नींद नहीं आ रही है। पूरी तरह से गीला हूं। नीलेश के पास बैठी उसकी मां केसर बाई ने बताया कि घर में पानी भर गया, इसलिए स्कूल में शिफ्ट करा दिया है।

सोनिया रजक कहती हैं कि घर में पानी भर गया है। न खाने की व्यवस्था है, न पानी की। सुबह से भूखे-प्यासे बैठे हैं। हम लोगों को सोमवार शाम 5 बजे शिविर में लाया है। शिविर में ही रात में खाना मिला। अनुष्का और उसकी छोटी बहन तनिष्का को स्कूल नहीं जाने का दुख है।

अनुष्का ने कहा- पानी की वजह से स्कूल नहीं जा सके। घर में बहुत पानी भर गया था। मम्मी ने गोद में लेकर हमें मोहल्ले से बाहर निकाला। घर जाने का हमारा बहुत मन है। वहीं, चंदा देवी को अब गृहस्थी चलाने की चिंता सता रही है। वे कहती हैं- हमारे घर में कुछ नहीं बचा। गृहस्थी का पूरा सामान बर्बाद हो गया। अब क्या करेंगे। कपड़े, राशन सब खराब हो गया। अब क्या खाएंगे यही चिंता है। अभी सरकार की तरफ से कोई मदद का आश्वासन नहीं मिला। मैं 40 साल से महामाई का बाग में रह रही हूं। हमेशा इस इलाके में बाढ़ आती है।

महामाई का बाग के रहने वाले 8 परिवारों ने हबीबिया स्कूल में रात गुजारी।
महामाई का बाग के रहने वाले 8 परिवारों ने हबीबिया स्कूल में रात गुजारी।

युवकों ने टेबल को बनाया बिस्तर
इसी शिविर में क्लास रूम में छात्रों की टेबल को बिस्तर बनाकर लेटे हुए अंकित खटीक बताते हैं कि घरों में पानी भर चुका है। फ्रिज तक में पानी भर गया। पूरा सामान पानी में बर्बाद हो चुका है। घर में ताला लगाकर हम लोग यहां शिफ्ट हुए हैं। हमारे पापा मोहल्ले में पानी देखने गए हैं। अगर थोड़ा भी कम हुआ हो तो हम वापस अपने घर चले जाएंगे।

हर 5 साल में बाढ़ के हालात
महामाई का बाग में रहने वाले बैजनाथ खटीक की उम्र 75 साल है। बैजनाथ कहते हैं कि यहां हर 5 साल में एक बार बाढ़ आती है। उन्हें और उनके परिवार को प्रशासन हर बार रेस्क्यू करता है। बचपन से अब तक 12 बार रेस्क्यू हो चुके हैं। हर बार राहत शिविर में दो से 3 दिन ठहरना पड़ता है। लेकिन सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं है।

सुबह मांगी मदद, शाम को रेस्क्यू
बैजनाथ खटीक के मुताबिक कॉलोनी के घरों में रविवार सोमवार की दरमियानी रात से हो रही तेज बारिश का पानी सुबह 8 बजे घुसना शुरू हो गया था। तभी से अलग-अलग नंबरों पर फोन करके प्रशासन से मदद मांगी। लेकिन राहत शाम करीब 4:30 बजे मिली। तब कहीं जाकर बाढ़ के पानी से बाहर आ सका।

राहत शिविर में ठहरे लोगों ने क्लास रूम में छात्रों की टेबल को बिस्तर बना लिया।
राहत शिविर में ठहरे लोगों ने क्लास रूम में छात्रों की टेबल को बिस्तर बना लिया।

आपदा प्रबंधन केन्द्र में रातभर आते रहे फोन
रात करीब 3 बजे दैनिक भास्कर की टीम नगर निगम के आपदा प्रबंधन केन्द्र, फतेहगढ़ पहुंची। कंट्रोल रूम में 7 कर्मचारी मिले। सेट ऑपरेटर मोहम्मदी शफी ने बताया कि सोमवार सुबह से रात 3 बजे तक 102 शिकायतें आई हैं। इनमें पेड़ गिरने, पानी भरने, शॉर्ट सर्किट से आग लगने की शिकायतें शामिल हैं। सबसे अधिक शिकायतें पुराने शहर से आ रही हैं। ताज कॉलोनी में पानी भरने से छोटे बच्चे फंस गए थे, जिन्हें बाद में निकाल लिया गया।

आपदा प्रबंधन केन्द्र, फतेहगढ़ को सोमवार सुबह से रात 3 बजे तक 102 शिकायतें मिली हैं।
आपदा प्रबंधन केन्द्र, फतेहगढ़ को सोमवार सुबह से रात 3 बजे तक 102 शिकायतें मिली हैं।

500 कॉलोनियों में पावर कट
दूसरी ओर रविवार सोमवार की दरमियानी रात 500 कॉलोनियों की बंद हुई पावर सप्लाई सोमवार-मंगलवार की रात साढ़े 3 बजे तक बहाल नहीं हो सकी। इसका सबसे ज्यादा नुकसान व्यापारियों को झेलना पड़ा। अधिकतर प्रतिष्ठान बंद ही रहे। गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, एमपी नगर, न्यू मार्केट समेत कई व्यावसायिक इलाकों के अधिकतर हिस्सों में रात में अंधेरा पसरा रहा। हालांकि, शहरभर में बिजली विभाग के कर्मचारी बिजली सुधारने में जुटे दिखे। नेहरू नगर इलाके में बिजली सुधार रहे कर्मचारियों ने बताया कि हम लोग रातभर से काम कर रहे हैं। एक-एक कर सभी जगहों की बिजली सप्लाई सुधार रहे हैं।

शिविर में बच्चे रातभर घर वापस जाने की जिद करते रहे। बच्चों ने अलाव तापकर रात काटी।
शिविर में बच्चे रातभर घर वापस जाने की जिद करते रहे। बच्चों ने अलाव तापकर रात काटी।

जिन इलाकों में सुबह पानी भरा, रात में खाली हुआ
सोमवार को दिन में जिन इलाकों में बाढ़ के हालात बने, रात में बारिश बंद होने के बाद उन इलाकों में पानी कम हो गया। अशोका गार्डन, कोल्हुआ कलां, ईंटखेड़ी, लांबाखेड़ा, कोलार,ललिता नगर, नयापुरा, बावड़िया कलां, दानिशकुंज, मंदाकिनी, शाहपुरा, करौंद, भानपुर, शिवनगर छोला, ऐशबाग, चांदबड़ बजरिया, टीला जमालपुरा, जगदीशपुर, इस्लामनगर, पटेल नगर, आनंद नगर, मिसरोद, बागसेवनिया, बाग मुगलिया, दानिश नगर, अरेरा कॉलोनी, नेहरू नगर, गोमती कॉलोनी, इंद्रपुरी, आकृति इको ग्रीन सिटी, नीलबड़, रातीबड़ समेत अन्य इलाकों में लोगों को बाढ़ से राहत मिली।

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