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कबाड़ कॉरिडोर:जिस रूट पर पहले से ही मेट्रो, ग्रेड सेपरेटर और फ्लाईओवर का बनना तय था वहीं बीआरटीएस बना दिया

भोपाल4 महीने पहले
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2009 में मेट्रो की बात शुरू हुई तभी बीआरटीएस की भी प्लानिंग हुई। - Dainik Bhaskar
2009 में मेट्रो की बात शुरू हुई तभी बीआरटीएस की भी प्लानिंग हुई।

राजधानी में बीआरटी कॉरिडोर की प्लानिंग में एक बड़ी गड़बड़ी यह भी है कि बैरागढ़ से होशंगाबाद रोड तक के जिस रूट पर यह बना है, उस पर पहले से ही फ्लाईओवर और ग्रेड सेपरेटर आदि प्रस्तावित है। इसके अलावा मेट्रो के रूट भी इसी रोड पर हैं, ऐसे में धीरे-धीरे इस कॉरिडोर का खत्म होना तय है। यानी बीआरटीएस के ड़ेवलपमेंट पर खर्च हुए 329 करोड़ रुपए और उसके मेंंटेनेंस पर अब तक खर्च हुई 20 करोड़ रुपए से अधिक की राशि बेकार हो गई।

राजधानी में 2009 में मेट्रो की बात शुरू हुई और लगभग तभी बीआरटीएस की भी प्लानिंग हुई। 2013 में बीआरटी कॉरिडोर में ट्रैफिक शुरू हुआ, उस समय मेट्रो की डीपीआर बन रही थी। 2015 मे सामने आई मेट्रो की डीपीआर देखें तो पता लगता है कि बैरागढ़ से लेकर मिसरोद तक के जिस 24 किमी रूट को बीआरटीएस रूट के रूप में डेवलप किया गया है, उसमें से केवल लिंक रोड नंबर एक यानी अपेक्स बैंक से बोर्ड ऑफिस चौराहा तक ही मेट्रो का रूट नहीं है।

इस रूट पर बीआरटीएस के लिए भी सिवाय सड़क पर व्हाइट लेनिंग के कोई बड़ा काम नहीं किया गया है। यदि पूरे रूट को देखें तो यह शहर का सबसे व्यस्त रूट है। एक सिरे से दूसरे सिरे तक शहर को जोड़ता है। लालघाटी चौराहा, पॉलिटेक्निक चौराहा, रोशनपुरा चौराहा और बोर्ड ऑफिस चौराहा यानी शहर के सभी प्रमुख चौराहे जहां ट्रैफिक होता है, वह इस रूट पर हैं। शहर की सभी डेवलपमेंट एजेंसियों ने यहां अलग-अलग प्लानिंग कर रखीं हैं और धीरे-धीरे उन पर काम भी हो रहा है।

कहां-क्या प्लानिंग और उसकी क्या स्थिति

बैरागढ़ फ्लाईओवर

इंदौर आने-जाने वाले की संख्या बढ़ने के कारण पिछले 20 सालों से यहां फ्लाईओवर पीडब्ल्यूडी और ट्रैफिक पुलिस के प्रस्तावों में था। अब इसे सेंट्रल रोड फंड से निर्माण की अनुमति मिली है। यहां मेट्रो का रूट भी प्रस्तावित है।

लालघाटी चौराहा

यहां दो दशक से बीडीए का ग्रेड सेपरेटर प्रस्तावित था। इसे एनएचएआई ने बनाया। अब वहां डेडिकेटेड कॉरिडोर तोड़ने की जरूरत महसूस हो रही है।

रेतघाट से पॉलिटेक्निक

रेतघाट स्थित बीडकर अस्पताल से इमामी गेट तक फ्लाईओवर प्रस्तावित है। इस पर पीडब्ल्यूडी काम कर रहा है।

पॉलिटेक्निक चौराहा
दो दशक से ग्रेड सेपरेटर प्रस्तावित है। अब स्मार्ट रोड बन जाने से इस चौराहे के ट्रैफिक का नेचर बदल गया है। इस चौराहे पर रोटरी को तोड़ा जाना था। इसके नहीं टूटने से बसों को भी परेशानी हो रही है।

रोशनपुरा चौराहा
पहले ग्रेड सेपरेटर प्रस्तावित था फिर पीडब्ल्यूडी ने जवाहर चौक-रोशनपुरा-पॉलिटेक्निक चौराहा तक फ्लाईओवर प्रस्तावित किया है।

बोर्ड ऑफिस चौराहा
यहां फ्लाईओवर का काम जारी है। मेट्रो का काम भी चल रहा है। बीडीए ने यहां ग्रेड सेपरेटर प्रस्तावित किया था।

होशंगाबाद रोड - बढ़ते ट्रैफिक के चलते पीडब्ल्यूडी ने फ्लाईओवर प्रस्तावित किया है। मंडीदीप जाने वाली मेट्रो भी यहां से जाएगी।

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