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  • The Six year old Son Had A Big Hole In His Heart, The Father, Who Earned 15 Thousand Rupees A Month, Raised 1.70 Crores In Three And A Half Years, The Operation Was Done In America

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अमेरिका में हुआ ऑपरेशन:छह साल के बेटे के दिल में बड़ा छेद था, 15 हजार महीना कमाने वाले पिता ने साढ़े तीन साल में जुटाए 1.70 कराेड़

भोपाल6 दिन पहले
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ऑपरेशन के बाद चिल्ड्रन अस्पताल के आईसीयू में प्रियांशु। - Dainik Bhaskar
ऑपरेशन के बाद चिल्ड्रन अस्पताल के आईसीयू में प्रियांशु।
  • बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल में 5 अप्रैल को हुआ ऑपरेशन, 12 घंटे चला, भारत में इलाज संभव नहीं था

ये हैं छह साल के प्रियांशु मेश्राम। जब 4 महीने के थे, तब पता चला कि इन्हें डबल आउटलेट राइट वेन्ट्रीकल विद लार्ज मस्कुलर वेन्ट्रीकुलर सेप्टल डिफेक्ट नामक बीमारी है। इसके कारण दिल में एक बड़ा छेद हो गया है। इससे खून दिल की जगह सीधे फेफड़ों में बहुत प्रेशर से जाता है। देश में इसका इलाज मुमकिन नहीं था। मूलत: भोपाल में रहने वाले इनके पिता सागर मेश्राम ने हर हाल में बेटे की जिंदगी बचाने की ठानी।

उन्होंने बीमारी के बारे में सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया। यहीं उन्हें पता चला कि इसका इलाज अमेरिका के बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल में है, लेकिन इसके लिए करोड़ों रुपए खर्च होंगे। सागर अभी पुणे में पिज्जा डिलीवरी का काम करते हैं और 15 हजार रुपए महीना कमाते हैं। उन्होंने हर जगह मदद मांगी, घर तक बेच दिया, सोशल मीडिया के जरिए फंड जुटाया।

आखिर पैसा इकट्‌ठा हो गया। वे 24 मार्च को न्यूयॉर्क पहुंचे। यहां से हॉस्पिटल गए। बीते सोमवार को करीब 13 घंटे चले ऑपरेशन के बाद प्रियांशु की जिंदगी बच गई। वो फिलहाल आईसीयू में हैं। प्रियांशु के माता-पिता के संघर्ष की कहानी, पढ़ें उन्हीं की जुबानी...

ओटी में जाने से पहले बेटे ने कहा था- मां लौटकर आऊंगा, तुम जाना मत

हमें चार साल से इस दिन का इंतजार था। हॉस्पिटल के चाइल्ड स्पेशलिस्ट कार्डियक सर्जन डॉ. सीताराम इमानी और उनकी 10 सदस्यीय टीम ने मेरे बेटे को नई जिंदगी दी है। मुझे याद है कि जब प्रियांशु पहली बार बीमार हुआ, तब हम उसे दिल्ली एम्स ले गए। यहां पता चला कि इस बीमारी का सर्जरी से इलाज है लेकिन ये सर्जरी बच्चे के जन्म से एक या दो हफ्ते के भीतर होनी चाहिए। लेकिन, प्रिंयाशु 4 महीने का हो चुका था, इसलिए अब सर्जरी नहीं हो सकती थी।

हम फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल गए। यहां बताया कि तीन ऑपरेशन होंगे, फिर भी प्रियांशु 10 साल से ज्यादा नहीं जी पाएगा। मैंने एक सर्जरी 13 जनवरी 2015 को कराई। दूसरी सर्जरी एक साल बाद होनी थी। तब हम मंुबई में रहते थे, तो वहां से पुणे शिफ्ट हो गए। सर्जरी के लिए पैसे हमने भोपाल का घर बेचकर जुटाए। जनवरी 2016 में जब एम्स पहुंचे, तो डॉक्टरों ने बताया कि हम सर्जरी संभव नहीं है। शेष | पेज 3 पर

बेटे की कुछ सांसें ही बची हैं। हमने हिम्मत नहीं हारी और सोशल मीडिया पर बीमारी के बारे में पोस्ट किया। हमें बोस्टन की जानकारी मिली। बस फिर क्या हम जुट गए। हर जगह से मदद मांगी तो तीन साल 8 महीने में हमने 1 करोड़ 70 लाख रु. जुटा लिए। डॉ. इमानी को एक के बाद एक 200 ई-मेल किए। आखिर वो ऑपरेशन के लिए राजी हो गए और चार साल बाद ऑपरेशन का वक्त आ गया। जब प्रियांशु को ओटी में ले जा रहे थे, तब उसने मां से कहा था- लौटकर आऊंगा, तुम जाना मत।
(जैसा कि सागर और उनकी पत्नी ज्योति ने भास्कर को बताया)

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