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गेमओवर नहीं, पिक्चर अभी बाकी है:ऑपरेशन टेबल पर आया तीसरा हार्ट अटैक, थम गई धड़कनें डॉक्टरों ने सीपीआर के साथ की एंजियोप्लास्टी; लौट आईं सांसें

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: विवेक राजपूत
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60 वर्षीय बुजुर्ग को कैथलैब में ही आया अटैक, 100% ब्लॉकेज थे, डॉक्टरों की सूझबूझ से बची जिंदगी - Dainik Bhaskar
60 वर्षीय बुजुर्ग को कैथलैब में ही आया अटैक, 100% ब्लॉकेज थे, डॉक्टरों की सूझबूझ से बची जिंदगी

तस्वीर में नजर आ रहे ये शख्स हैं बीना निवासी देवकीनंदन नामदेव। 60 वर्षीय देवकीनंदन पिछले हफ्ते मौत के मुंह से लौटे हैं। हार्ट अटैक आने के कारण इनकी सांसें थम चुकी थीं, लेकिन लेकिन डॉक्टरों की सूझबूझ से इनकी बंद हुई धड़कनें फिर जी उठीं। दरअसल पिछले हफ्ते हमीदिया अस्पताल के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में एक मरीज को एंजियोप्लास्टी के लिए कैथलैब की टेबल पर लिटाया गया। उसी वक्त उसे हार्ट अटैक आ गया और उसके दिल की धड़कन रुक गई।

ऐसे में डॉक्टरों ने बिना समय गवाए ना सिर्फ सीपीआर देना शुरू किया , बल्कि साथ ही एंजियोप्लास्टी भी शुरू कर दी। चंद मिनट में ब्लॉकेज खुलने से ब्लड सप्लाई शुरू हुई तो मरीज की जान बच गई। डॉक्टरों का कहना है कि सीपीआर देने में दो मिनट की भी देरी होती तो जान बचना मुश्किल था। दरअसल, देवकीनंदन को तीन महीने पहले हार्ट अटैक आया तो परिजन उन्हें जेपी अस्पताल लेकर गए। यहां से उन्हें हमीदिया रेफर किया गया था। ब्लॉकेज ज्यादा होने पर एंजियोप्लास्टी की सलाह दी गई। 12 सितंबर को परिजन उन्हें फिर हमीदिया अस्पताल लाए। 15 सितंबर को एंजियोप्लास्टी होने से ठीक पहले उन्हें हार्ट अटैक आ गया।

पहली बार सीपीआर और एंजियोप्लास्टी एकसाथ की

डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि एलएडी मेन ऑर्टरी में 100% ब्लॉकेज से ब्लड सप्लाई रुक गई। ऐसे में सडन डेथ होने की आशंका रहती है। हमने तुरंत सीपीआर शुरू किया, इससे कुछ ब्लड सप्लाई हुआ और पांच मिनट में ही एंजियोप्लास्टी कर ब्लड सप्लाई शुरू की। तब मरीज की धड़कन व ब्लड प्रेशर वापस आया और जान बच गई। 22 साल के मेरे करियर में ये पहला मौका जब सीपीआर देते हुए मरीज की एंजियोप्लास्टी की गई है।

इस टीम ने बचाई जान

डॉ. अजय शर्मा, डॉ. आरके सिंह, डॉ. आरएस मीना, कार्डियक एनेस्थेसिया से डॉ. श्वेता श्रीवास्तव के अलावा डीएम रेसिडेंट, कैथ लैब तकनीशियन व नर्सिंग स्टाफ।

15 साल में तीसरा अटैक

देवकीनंदन के परिजनों के मुताबिक वे बीना में प्रिटिंग प्रेस में काम करते थे। तीन महीने पहले उन्हें अटैक आया था, जो दूसरा मेजर अटैक था। इससे पहले 15 साल पहले अटैक आया था।

डॉक्टर बोले-

ऐसे केस में मरीज के पास बमुश्किल एक-दो मिनट ही होते हैं। चूंकि, मरीज कैथ लेब की टेबल पर ही था, डॉक्टर मौजूद थे, उन्होंने बिना समय गवाएं सीपीआर दिया और एंजियोप्लास्टी कर ब्लॉकेज खोला।
-डॉ. राजीव गुप्ता, एचओडी, कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट, जीएमसी

डॉक्टरों ने बताया कि एंजियोप्लास्टी से पहले पापा को अटैक आया और हार्ट बीट रुक गई थी। डॉक्टरों ने तुरंत सारे प्रोसिजर किए और पापा की जान बच गई।

-मोहित नामदेव, मरीज का बेटा