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मप्र में टाइगर्स की गिनती में नया प्रयोग:जिस यूरिन स्प्रे से टाइगर अपनी टेरेटरी बनाते हैं, वनकर्मियों को इस बार उसे सूंघना होगा

भोपाल3 महीने पहलेलेखक: वंदना श्रोती
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अभी पगमार्क-विष्ठा से होती थी गिनती। - Dainik Bhaskar
अभी पगमार्क-विष्ठा से होती थी गिनती।

मध्यप्रदेश में इस बार टाइगर्स की गिनती बहुत ही बारीक तरीके से होगी यानी गिनती में टाइगर्स की हर उस छोटी से छोटी गतिविधि को शामिल किया जाएगा, जिससे उनकी मौजूदगी का सही प्रमाण मिल सके। इन तरीकों में एक सबसे अजीब तरीका शामिल किया गया है, वो है- टाइगर्स की यूरिन को सूंघना।

जी हां। इस बार बाघों की गिनती में लगे वन कर्मियों और वॉलेंटियर्स को बाघों के पगमार्क, विष्ठ प्रमाण, पेड़ों पर खरोंच के साथ-साथ उनकी यूरिन स्प्रे को भी ढूंढकर सूंघना होगा और उसकी गंध को फार्म में लिखना होगा। वन विभाग का अनुमान है कि अभी प्रदेश में 526 बाघ हैं, इस बार की गणना के बाद इनकी संख्या बढ़कर 700 से भी ज्यादा हो सकती है।

इसकी वजह है- असंरक्षित क्षेत्रों में बाघों की संख्या बढ़ना। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ आलोक कुमार के मुताबिक नए तरह की गणना के लिए मैदानी अमले को ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्हें बाघ की दहाड़, उसके शरीर से निकलने वाली गंध, यूरिन स्प्रे, यूरिन से बने ब्लैक स्पॉट को भी पहचानना सिखाएंगे। यह ट्रेनिंग भोपाल वन मंडल में गुरुवार सुबह 10 बजे केरवा चौकी पर होगी।

कर्नाटक से टक्कर, इसलिए एक-एक टाइगर को ढूंढने का टारगेट

बता दें कि अपने देश में सर्वाधिक बाघ मप्र में हैं। दूसरे नंबर पर कर्नाटक है, जहां 524 बाघ हैं। इस बार दोनों राज्यों में टक्कर है। इसलिए मप्र में एक-एक बाघ की मौजूदगी को चिह्नित करने के लिए बड़े स्तर पर ट्रेनिंग दे रहे हैं।

चार चरणों में होगी बाघों की गिनती...

मप्र में बाघों की गिनती चार चरणों में होगी। पहला चरण 17 से 23 नवंबर, दूसरा 1 से 7 दिसंबर, तीसरा 15 से 21 दिसंबर 2021 और चौथा पांच से 11 जनवरी 2022 तक चलेगा।

पहले ऐसे होती थी गणना...

  • ट्रांजिट लाइन डालकर उस पर चलकर बाघ के प्रत्यक्ष प्रमाण जुटाते थे।
  • ट्रैप कैमरे लगाए जाते थे, ताकि बाघ दिख जाएं।
  • सैटेलाइट इमेज से प्रत्यक्ष प्रमाण का मिलान करते थे।
  • पहले संरक्षित क्षेत्र टाइगर रिजर्व व सेंचुरी के बाघ गिनती में होते थे।

इस बार ऐसे हो रही...

  • बाघ की दहाड़ का वेग, ध्वनि जांचेंगे।
  • उसकी मौजूदगी के अप्रत्यक्ष प्रमाण देखेंगे।
  • स्पॉट पर उगने वाली फंगी भी चेक लिस्ट में शामिल।
  • सैटेलाइट मेपिंग के साथ जियो मेपिंग भी होगी।
  • रिजर्व और सेंचुरी के बाहर के बाघों की भी गिनती होगी।
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