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ट्रेन में हार्ट अटैक से हुई थी महिला की मौत:1000 किमी दूर घर पर अंतिम संस्कार के लिए नहीं थे पैसे, साेशल मीडिया पर मदद मांगी ताे 1 घंटे में जुटाए 25 हजार

भोपाल20 दिन पहले
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ट्रेन से शव ले जाने की प्रोसेस काफी लंबी थी, इसलिए लिया निर्णय। - Dainik Bhaskar
ट्रेन से शव ले जाने की प्रोसेस काफी लंबी थी, इसलिए लिया निर्णय।

भोपाल स्टेशन पर अपने प्राण त्यागने वाली महिला की अंतिम इच्छा थी कि वह कहीं भी मरे उसका अंतिम संस्कार उसके गृह नगर में ही किया जाए। मंगलवार को हार्ट अटैक से मरने वाली अंजली पांडेय के पति और सास ने पोस्टमार्टम के बाद उसका शव गृह प्रदेश ले जाने का निर्णय किया। रुपयों की कमी की वजह से वे काफी परेशान थे।

भोपाल से गोरखपुर जाने के लिए 25 हजार रुपए का खर्च आ रहा था। उन्होंने भोपाल के सोशल मीडिया के माध्यम से मदद मांगी। उनकी मजबूरी को समझते हुए शहर के सात समाज सेवी आगे आए। उन्होंने रुपए एकत्रित करके मृतक के पति अरुण पांडेय को स्टेशन पहुंचकर रुपए दिए। इसमें दीपक सिंह, मुकेश शर्मा, जितेंद्र शुक्ला,जयदेव चौहान, दीपक गुप्ता, विवेक राजपूत और एबी सिंह शामिल हैं।

मृतक के पति अरूण पांडेय ने बताया कि वे उप्र गोरखपुर के देवरी गांव के रहने वाले हैं। यहां से गांव की दूरी करीब 1000 किमी है। उनकी पत्नी अंजली की निशातपुरा के पास अटैक आया। उन्होंने मेडिकल हेल्प लाइन नंबर पर फोन लगाया। इलाज के लिए उन्हें स्टेशन पर उतारा।

तुरंत मेडिकल हेल्प नहीं मिलने से उनकी मौत हो गई। जिसमें बाद जीआरपी ने बिना पोस्टमार्टम के उन्हें शव को नहीं ले जाने दिया। इधर उन्होंने शव को ट्रेन से गृह प्रदेश ले जाने के लिए रेल कर्मचारियों से प्रोसेस समझी, लेकिन उनकी दस्तावेजी प्रक्रिया इतनी लंबी थी कि उन्होंने वाहन से शव को ले जाने का निर्णय लिया।

पति ने कहा- एक घंटे के अंदर ही आ गए मददगार

पांडेय ने बताया कि एक बार बातों बातों में पत्नी ने कहा था कि मेरी मौत कहीं भी, लेकिन उसका अंतिम संस्कार उसके गांव में ही होना चाहिए। पांडेय ने बताया कि सोशल मीडिया में डाली पोस्ट के बाद एक घंटे के अंदर सात समाज सेवियों ने उनकी न केवल मदद की बल्कि उनकी 78 वर्षीय मां के लिए दवाओं का इंतजाम किया। उनका कहना है कि भोपाल के लोग संवेदनशीलता की वजह से पत्नी की अंतिम इच्छा पूरी हो सकी।