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बच्चों को मुखबिर बनाएगी पुलिस:ये खेल-खेल में बताएंगे- मोहल्ले में कौन ड्रग सप्लाई करता है और कौन उन्हें गलत तरीके से छूता है

भोपाल4 महीने पहलेलेखक: वंदना श्रोती
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चाइल्ड लाइन के साथ मिलकर शुरू हो रहा कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत पायलट प्रोजेक्ट, बनाए जाएंगे बाल मैत्री समूह। - Dainik Bhaskar
चाइल्ड लाइन के साथ मिलकर शुरू हो रहा कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत पायलट प्रोजेक्ट, बनाए जाएंगे बाल मैत्री समूह।

शहर में बाल अपराधों को रोकने के लिए भाेपाल पुलिस अब बच्चों से दोस्ती करेगी। इस याराने का एक मकसद है- बच्चों से ही यह पता लगवाना की उनकी बस्ती, मोहल्लों और कॉलोनियों में वो कौन लोग हैं, जो बच्चों को अपराध के दलदल में घसीटते हैं। बच्चों को मुखबिरी के गुर सिखाए जाएंगे। ताकि ये नन्हे बता सकें कि उनके मोहल्ले में कौन ड्रग सप्लाई करता है, कौन बच्चों को गलत तरीके से छूता है।

पुलिस इन बच्चों को यह ट्रेनिंग भी देगी कि यह जानकारी उन्हें किस तरह उन तक पहुंचानी है। वरिष्ठ अधिकारी कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत एक पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसके लिए पुलिस चाइल्ड लाइन की भी मदद ली जा रही है। सभी थाना क्षेत्र में बाल मैत्री पुलिस समूह भी बनाए जा रहे हैं।

कब और कैसे देना है जानकारी, यह भी बताएगी पुलिस

अपराधियों पर नजर

पुलिस बच्चों को ट्रेनिंग देगी कि वह संदिग्धों को कैसे पहचानें।

जानकारी कब देना है और कैसे

संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी कब, कैसे देना है... इसके लिए पुलिस बच्चों को तरह-तरह के नुक्कड़ नाटक और रैप सॉन्ग भी सिखाएगी, ताकि इशारों ही इशारों में वे बाल अपराधों के बारे में बता सकें। इसका फायदा यह होगा कि हर जानकारी गोपनीय रहेगी।

हर महीने मीटिंग

हर मोहल्ले में मीटिंग बच्चों और कम्युनिटी के बीच होगी, ताकि इन सभी के बीच तालमेल हो सके।

अधिकारों की जानकारी

बच्चों को बाल अधिकारों एवं उनकी सुरक्षा से जुड़े हुए कानूनों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

ऐसे समाधान

इस बैठक में कम से कम दो पुलिसकर्मी जरूर शामिल होंगे। हर समस्या के समाधान के लिए तुरंत कार्रवाई करेंगे।

मुखबिर तंत्र सुधारने की ये कवायद भी

डीएसबी का स्टाफ हुलिया बदलकर और आयोजनों में शामिल हो जुटाएगा जानकारी।

अपडेट हो रही जिला विशेष शाखा

भोपाल में लागू हुए पुलिस कमिश्नर सिस्टम के बाद पुलिस के लिए सूचनाएं जुटाने वाली जिला विशेष शाखा (डीएसबी) को अपग्रेड किया जा रहा है। अब डीएसबी के हर स्टाफ को पब्लिक प्लेटफॉर्म पर चल रही सूचनाओं के साथ ही उन्हें उन सूचनाओं को भी जुटाना होगा, जो गोपनीय प्लानिंग का हिस्सा हों। इसके लिए उन्हें किसी से दोस्ती बढ़ानी पड़े या अपना हुलिया बदलना पड़े।

उन्हें शहर में होने वाले हर छोटे-बड़े आयोजनों में शरीक होना पड़ेगा, ताकि ये पता चल सके कि कहीं छोटे आयोजन या धरना-प्रदर्शन को बड़ा रूप देने की तैयारी तो नहीं चल रही है। डीसीपी सिक्युरिटी एंड इंटेलिजेंस विजय भगवानी ने बताया कि नई प्रक्रिया से पुलिस का इंटेलिजेंस मजबूत होगा।