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इंदौर के युवक से भोपाल में 10 लाख ठगे:हमीदिया में फ्राॅड कपल ने सोने के 2 सिक्के दिखाकर भरोसा जीता; सौदा तय हुआ तो सोने की जगह पीतल का हार थमाकर भागे

भोपालएक वर्ष पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।
  • कैंसर पीड़ित बहन की देखरेख के लिए भोपाल आया हुआ था युवक

भोपाल में शनिवार को 24 घंटे में पुलिस ने जालसाजी के तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए। इसमें जालसाजों ने 3 लोगों से करीब 47 लाख रुपए ठग लिए। कोहेफिजा इलाके में पीतल के हार को सोने का हार बता जालसाज दंपति ने इंदौर के युवक से 10 लाख रुपए ठग लिए। दूसरी घटना में गुड़गांव की कंपनी ने 45 दिनों में रकम दोगुना करने का लालच देकर 23 लाख रुपए ठग लिए। तीसरी घटना में प्लॉट देने का झांसा देकर 14 लाख रुपए ठग लिए।

कोहेफिजा थाना प्रभारी अनिल वाजपेयी ने बताया कि पदम सिंह राठौड़ (44) इंदौर के सुदामा नगर में टेलर हैं। उनकी बहन गौराबाई का चिरायु अस्पताल में 21 अगस्त 2021 से भर्ती है। उसका कैंसर का इलाज चल रहा है। वह उसकी तीमारदारी के लिए भोपाल आए थे। 31 अगस्त को उन्हें एक कपल हमीदिया अस्पताल में मिला।

बताया, करीब 500 चांदी के सिक्के व एक सोने का हार उसके पास है। इसे 50 लाख रुपए में बेचना है। आरोपी ने कहा, उसके बच्चे की तबीयत खराब है, इसलिए वह हार बेचना चाहता है। उसने सैंपल के रूप में दो सोने के सिक्के चेक कराने के लिए दिए। सिक्के चेक कराए तो सोने के निकले। इसके बाद दोनों के बीच सौदा 10 लाख रुपए में तय हुआ।

31 अगस्त की रात करीब 8 बजे आरोपी ने हमीदिया अस्पताल में डिलीवरी देने बुलाया। आरोपियों ने उन्हें जेवर दिए। पदम ने उन्हें 10 लाख रुपए दे दिए। हाल ही में पदम इंदौर पहुंचे। हार को उन्होंने ज्वेलर्स से चेक कराया, तो वह पीतल का निकला। जालसाज को पैसा देने के लिए पदम ने रिश्तेदारों से उधारी ली थी।

गुड़गांव की कंपनी ने फिश पालन में मुनाफे का लालच देकर 23 लाख ठगे

गुड़गांव की फिश प्रोड्यूस कंपनी ने 45 दिनों में रकम दोगुना करने का लालच देकर 3 लोगों से 23 लाख रुपए ठग लिए। अनुबंध के तहत जब रुपए वापसी का समय आया, तो कंपनी दफ्तर में ताला लगाकर भाग निकली। कोहेफिजा पुलिस ने कंपनी के सीएमडी, सीईओ, एमपी हेड समेत 4 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

पुलिस के मुताबिक, गीतांजलि कॉम्प्लेक्स कमला नगर निवासी निधि चौरसिया (30) मछली पालन कारोबार से जुड़ी हैं। वर्ष 2020 में निधि को हलालपुर सिटी बाग स्थित फिश कंपनी के बारे में पता चला। इसका हेड ऑफिस गुड़गांव में है। उनकी मुलाकात कंपनी के एमपी हेड प्रहलाद शर्मा से हुई।

प्रहलाद ने उन्हें बताया, मछली पालन के लिए कंपनी में निवेश करने पर 45 दिनों बाद से रकम दोगुनी होकर वापस मिलेगी। कंपनी की ओर से ही बीज, तालाब आदि की व्यवस्था कराई जाएगी। उन्होंने कंपनी के कागजात दिखाए, जिससे निधि को विश्वास हो गया। इसके बाद कंपनी के टीम लीडर राजेंद्र राजपूत ने उन्हें बैरसिया स्थित तालाब दिखाया, जहां मछली पालन किया जाना था। झांसे में आने के बाद निधि ने कंपनी में साढ़े पांच लाख रुपए निवेश कर दिए।

अनुबंध के अनुसार 45 दिन बाद निधि को कंपनी की ओर से पेमेंट मिली, लेकिन यह पेमेंट सिर्फ दो माह दी गई, जो कि 1.30 लाख रुपए थी, जबकि उन्हें 11 लाख रुपए मिलना था। निधि की तरह ही जिंसी जहांगीराबाद निवासी फुरकान खान और बीडीए कॉलोनी कोहेफिजा निवासी दानिश खान ने कंपनी में निवेश किया था। फुरकान ने साढ़े पांच लाख और दानिश ने 11 लाख रुपए निवेश किए थे, लेकिन उनके साथ भी कंपनी में धोखाधड़ी की।

निधि, फुरकान और दानिश की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच कर कंपनी के सीएमडी विजेंद्र कश्यप, सीईओ विनय शर्मा, एमपी हेड प्रहलाद शर्मा और टीम लीडर राजेंद्र राजपूत के खिलाफ केस दर्ज किया है।

रिटायर्ड सिविल इंजीनियर से 14 लाख रुपए ठगे

कोलार पुलिस ने कृष्णा बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के संचालक ज्योति गोयल और सुनील टिवडेवाल पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। दोनों ने मिलकर अग्रवाल परिवार को दो प्लॉट वर्ष 2013-14 में बेचे थे। दोनों प्लॉट के बदले चौदह लाख रुपए ले लिए। प्लॉट खरीदने के बाद पता चला कि जिस भूमि पर प्लॉट उन्हें मिले हैं, वह बिल्डर की अधिकृत भूमि नहीं है, बल्कि किसी अनिल गुप्ता की भूमि है।

बिल्डर ने टाउन एंड कंट्री के पेपर की परमिशन फरियादी और पुलिस को दिखाई है, लेकिन वह भूमि मालिक के साथ अनुबंध नहीं दिखा सके। जांच के बाद कोलार पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उक्त मामले में टाउन एंड कंट्री के कर्मचारी और अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध है।

पुलिस ने शाहपुरा निवासी राजकुमार अग्रवाल और राकेश कुमार अग्रवाल की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ज्योति गोयल और सुनील के खिलाफ जालसाजी के पूर्व में भी अपराध कायम हो चुके हैं। पीड़ित के परिवार के सदस्य भी जज रह चुके हैं।