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कोरोना वैक्सीनेशन:सेंटर के गलत एड्रेस से परेशानी, जिस कढ़ैया को ढूंढते 50 किमी दूर बैरसिया पहुंचे, वो निकला भोपाल के पास

भोपालएक महीने पहले
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बुकिंग पोर्टल ने जिसे कढ़ैया बताया, वो सेंटर कनेरा में निकला। - Dainik Bhaskar
बुकिंग पोर्टल ने जिसे कढ़ैया बताया, वो सेंटर कनेरा में निकला।
  • 18+ के लिए आवंटित किए जा रहे सेंटर्स की जियो टैगिंग न होने से हो रही गफलत
  • एक ही नाम के चार गांव, पिनकोड भी डाले गलत

वैक्सीनेशन का इंतजार कर रहे 18+ वाले अब ग्रामीण केंद्र चुन रहे हैं, लेकिन ऐसा करना उनके लिए समस्या बन गया है। इसकी वजह इनके लिए बने केंद्रों के पतों में भारी गफलत सामने आ रही है। बुकिंग के बाद इन्हें मैसेज के जरिए जो पता भेजा जाता है, उसमें और मूल पते में कई किमी का फासला निकल रहा है। ऐसा ही एक सेंटर कढ़ैया पहेली बना है। क्योंकि गूगल पर सर्च करने पर कढ़ैया नाम के चार गांव सामने आते हैं।

इनमें कढ़ैया शाह, कढ़ैया चंवर, कढ़ैया कोटा और कढ़ैयाकला शामिल हैं। ये सभी बैरसिया के पास हैं। केंद्र के सामने पिनकोड भी बैरसिया का लिखा है। अजीबोगरीब नाम देखकर कुछ लोगों ने बुकिंग ही कैंसिल करवा दी। जो ढूंढने गए तो उन्हें कढ़ैया नामक कोई स्थान मिला ही नहीं, बल्कि वह कनेरा गांव निकला। शहरी क्षेत्र के केंद्रों में भी इस तरह की दिक्कत आ रही है। अफसरों का कहना है वे कि जियो टैगिंग कर रहे हैं, फिर समस्या खत्म हो जाएगी।

1- मैसेज में कनेरा का जिक्र ही नहीं

कोलार निवासी गरिमा गुर्जर को कढ़ैया गांव में वैक्सीनेशन के लिए बुकिंग केंद्र मिला। पहले तो उन्होंने गूगल के जरिए और अफसरों की मदद से पता ढूंढने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। तब वे शनिवार सुबह अपने भाई के साथ सेंटर के लिए निकल गईं। पूछताछ करते हुए जब वे असली केंद्र पर पहुंची तो वो कढ़ैया नहीं, बल्कि कनेरा था। जबकि बुकिंग का जो मैसेज आया उसमें कनेरा का जिक्र ही नहीं था।

2- गूगल पर केंद्र बैरसिया से 50 किमी दूर मिला
छोला निवासी अनुज सिंह को निपानिया केंद्र पर बुकिंग मिली। इन्होंने गूगल पर सर्च किया तो केंद्र बैरसिया से 50 किमी दूर दिखाई दिया। तब इन्होंने बुकिंग कैंसिल करवा दी। शनिवार को फोन आने पर इन्होंने दूरी की समस्या बताई तो जवाब मिला कि यह तो भोपाल के पास है।

3- सेंटर पर पहुंचने के लिए करनी पड़ी पूछताछ
कटारा हिल्स बर्रई निवासी नेपाल सिंह को कोहेफिजा गवर्मेंट स्कूल में सेंटर मिला। वे यहां गए तो कई सरकारी स्कूल थे। मौके पर पहुंचने के लिए कई लोगाें से पूछना पड़ा, तब जाकर वे सेंटर पहुंच पाए।

यहां पर अधिक समस्या नियमानुसार केंद्र बनाते ही उसकी जियो टैगिंग होना चाहिए। लेकिन ग्रामीण केंद्रों में ऐसा नहीं हुआ। ग्रामीण क्षेत्र में हर्राखेड़ा, कोटरा चौपड़ा, ईंटखेड़ी, अरवलिया, जाटखेड़ी व कढ़िया और शहरी क्षेत्र में कोटरा, पंचशील नगर, खजूरी, कोहेफिजा सेंटर में सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है।

ये टीम तय करती है केंद्र
किसी भी सेंटर को बनाने से पहले जिला प्रशासन की ओर से एडीएम, जिला पंचायत सीईओ, जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी चर्चा करते हैं। 5 और 6 मई को 1 सेंटर के बाद 8 व 10 मई को 22 सेंटर कर दिए। इसके बाद सीधे 49 सेंटर बना दिए गए।

शनिवार की स्थिति; 99 सेंटरों में 17,800 में से 13,027 डोज ही लगाए गए

शनिवार को 99 सेंटर पर 17800 लाेगों को डोज लगाए जाने थे, लेकिन शाम 7.15 बजे तक 13,027 लोगों को ही वैक्सीन लग पाई। इसमें 18+ के 49 सेंटर पर 5371, 45+ के 5479 और 60+ के 2172 लोगों को वैक्सीन लगाई गई। इसमें एक बार फिर 18+ वालों को 471 वैक्सीन अधिक लगाई गई।

आगे दिक्कत नहीं होगी
18+ के लिए तेजी से सेंटर बढ़ाए जा रहे हैं। कुछ सेंटर की जियो टैगिंग करनी है। रविवार तक यह काम पूरा हो जाएगा और आगे किसी को दिक्कत नहीं होगी।
डॉ. प्रभाकर तिवारी, सीएमएचओ, भोपाल

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