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नया मंडी एक्ट:किसानों की दिक्कत- विवाद होने पर कोर्ट के चक्कर लगाओ; मौजूदा मंडी बोर्ड का अस्तित्व खतरे मे

भोपालएक महीने पहले
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फाइल फोटो
  • बोर्ड की चिंता- हर साल कैसे बांटेंगे कर्मचारियों को 450 करोड़ रुपए
  • मंडी कर्मचारियाें की आज से कामबंद हड़ताल

नए मंडी एक्ट के विरोध में व्यापारी, किसान और कर्मचारी खुलकर मैदान में आ गए हैं। इसकी वजह किसान और व्यापारी के बीच लेनदेन को लेकर विवाद की स्थिति होने पर सुनवाई एसडीएम कोर्ट में होगी, जबकि वर्तमान व्यवस्था में ऐसे मामले मंडी बोर्ड में ही सुलझा लिए जाते हैं। किसान कोर्ट-कचहरी के मामलों में नहीं पड़ना चाहते। इधर, मंडी बोर्ड की चिंता यह है कि जब निजी मंडियों में अनाज की खरीदी होगी तो मंडी में न व्यापारी आएंगे और न ही किसान। इस स्थिति में उसकी आय प्रभावित होगी और जब आमदनी नहीं होगी तो 8 हजार कर्मचारियों को हर महीने 37 करोड़ 50 लाख कर्मचारियों को कैसे बांट पाएगा। साल भर में बोर्ड वेतन भुगतान पर 450 करोड़ खर्च करता है।

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ और मप्र किसान कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश के 90 लाख किसान एक्ट के विरोध में जल्दी ही सड़कों पर उतरेंगे। प्रदेश किसान कांग्रेस के अध्यक्ष दिनेश गुर्जर ने गुरुवार को जिलाध्यक्षों की मीटिंग बुलाई, जिसमें यह फैसला लिया गया कि पार्टी जिला, तहसील और ब्लाक स्तर पर विरोध दर्ज कराने के लिए रैली निकालेगी और एसडीएम और कलेक्टर को ज्ञापन सौपा जाएगा।

दो उदाहरणों से जानिए- किसानों की दिक्कतें

  • भिंड जिले में 12 लाख मूल्य की सरसों की व्यापारी ने खरीद की। तीन महीने से व्यापारी का अतापता नहीं। किसान उपज का मूल्य पाने के लिए दर- दर भटक रहे हैं।
  • धार जिले के मनावर में किसानों का 45 लाख का चना लेकर व्यापारी का अतापता नहीं। मामला मुख्यमंत्री तक भी पहुंच चुका है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

उपज का समर्थन मूल्य मिलेगा, इसकी गारंटी नहीं
किसानों की उपज की खरीदी समर्थन मूल्य पर होगी। इसकी कोई गारंटी नहीं है। किसानों का कहना है कि एक्ट में यह बिंदु जोड़ा जाना चाहिए कि उनकी उपज मंडी प्रांगण में बिके या बाहर, खरीदी एमएसपी पर हो। उन्हें भय है कि इस बात की गारंटी नहीं है कि किसान को उसकी उपज का सही मूल्य मिल पाएगा। उसकी उपज की सही तौल होगी।

नए एक्ट में मंडी बोर्ड की भूमिका हो जाएगी खत्म
पुराने एक्ट में यदि कहीं विवाद की स्थिति बनती है तो उसका निपटारा मंडी बोर्ड करता है। अर्थात मंडी बोर्ड की जिम्मेदारी है कि वह किसानों के मामले का उसी समय निपटारा करे। नए मंडी एक्ट में मंडी बोर्ड की भूमिका लगभग खत्म हो गई है। निजी मंडी बनाए जाने के लिए सरकार व्यापारियों को दो एकड़ जमीन देगी और वहां मामला किसान और व्यापारी के बीच रहेगा।

दिसंबर में आंदोलन करेंगे किसान
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा का कहना है कि 60 दिन तक प्रदेश भर में नए मंडी एक्ट को लेकर जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। दिसंबर में किसान आंदोलन करेंगे।

मंडी कर्मचारियाें की आज से कामबंद हड़ताल
इधर मंडी संबंधी अध्यादेश के विराेध में मंडी कर्मचारी शुक्रवार से काम बंद हड़ताल पर रहेंगे। इस हड़ताल से राजधानी स्थित मंडी बाेर्ड मुख्यालय एवं आंचलिक कार्यालयाें एवं भाेपाल सहित प्रदेश सभी 259 मंडियों में काम ठप रहेगा। मंडी कर्मचारियाें के संयुक्त माेर्चा के बैनर तले यह हड़ताल की जा रही है। माेर्चा में शामिल मंडी कर्मचारी महासंघ के प्रांताध्यक्ष जसवंत सिंह ठाकुर ने बताया कि हड़ताल अनिश्चितकालीन है। इस अध्यादेश से मंडियाें की आय में बहुत कम हाे जाएगी।

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