ऑक्सीजन प्लांट को सांस चाहिए:दो बार डेडलाइन बदली फिर भी 38 ऑक्सीजन प्लांट नहीं हो सके चालू; अस्पतालों में जंबो सिलेंडर का उपयोग

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: भगवान उपाध्याय
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सरकारी अस्पतालों में लगाए गए नए प्लांट में ऐसी व्यवस्था नहीं की गई है कि प्लांट से बनी ऑक्सीजन किसी भी तरह के सिलेंडर में भरी जा सके। - Dainik Bhaskar
सरकारी अस्पतालों में लगाए गए नए प्लांट में ऐसी व्यवस्था नहीं की गई है कि प्लांट से बनी ऑक्सीजन किसी भी तरह के सिलेंडर में भरी जा सके।

प्रदेश में 6 महीने में 164 ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाए गए, लेकिन इनमें से कई अब काम नहीं कर रहे हैं। इसका बड़ा कारण ये है कि जहां प्लांट लगाए गए हैं, वहां ऑक्सीजन की जरूरत ही नहीं है। वहीं, कई अस्पतालों में प्लांट लगने के बावजूद जंबो सिलेंडर का उपयोग हो रहा है।

प्रदेश में 30 अक्टूबर तक 202 प्लांट शुरू करने का लक्ष्य रख गया था। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि अब मरीजों को ऑक्सीजन की मांग बहुत कम हो गई है, इसलिए ज्यादातर प्लांट से ऑक्सीजन जनरेशन की जरूरत ही नहीं पड़ रही है। जिला और तहसील स्तर पर ऑक्सीजन की जरूरत वाले इक्का-दुक्का मरीज ही आते हैं, जिन्हें सिलेंडर के माध्यम से ऑक्सीजन चढ़ाई जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार अभी तक सरकारी अस्पतालों में लगाए गए नए प्लांट में ऐसी व्यवस्था नहीं की गई है कि प्लांट से बनी ऑक्सीजन किसी भी तरह के सिलेंडर में भरी जा सके। इसके लिए एक डिवाइस की जरूरत होती है, जिसकी कीमत लगभग 25 हजार रुपए है। लेकिन नियमों में प्रावधान नहीं होने के कारण किसी भी प्लांट में यह डिवाइस नहीं लगाई गई है।