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बच्चों की खातिर घर वापसी:कोरोनाकाल में समझ आई रिश्तों की अहमियत, तलाक के लिए प्राधिकरण में आवेदन दे चुके दंपती बोले-हमको नहीं होना अलग

भोपाल2 महीने पहले
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  • दंपतियों को लगा- मर गए तो बच्चों का क्या होगा, इसके बाद आपसी सहमति से लौट रहे घर

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से तलाक लेने वाले कई दंपतियों को सबक मिला है। उन्हें अहसास हुआ कि यदि कोरोना संक्रमण की वजह से मौत हो गई तो उनके बच्चों का क्या होगा। ऐसे तीन मामले सामने आए है, जब दंपतियों ने आपस में बातचीत कर न केवल अपने मसले को सुलझाया है। बल्कि एक दंपती ने तलाक का केस वापस लेने कोर्ट में आवेदन दिया है। ऐसा होने पर बच्चों को अपने माता-पिता का प्यार मिल पाएगा। इन मामलों में प्राधिकरण के सचिव ने दंपतियों को साथ रहने की सलाह दी है। उनका कहना है वे सोशल मीडिया पर आवेदन दे दें और साथ रहने लग जाए। कानूनी प्रक्रिया बाद में पूरी हो जाएगी।

विधिक प्राधिकरण की सलाह- सोशल मीडिया पर आवेदन देकर साथ रहने लगें, कानूनी प्रक्रिया बाद में पूरी कर लेंगे

कोरोना हुआ तो बच्चाें की चिंता हुई, दूर हो गए सारे गिले शिकवे
काउंसलर शैल अवस्थी के मुताबिक सरकारी नौकरी कर रहे दंपती की शादी 25 अक्टूबर 2013 में हुई थी। तलाक का केस लगाने वाली महिला की ससुराल ग्वालियर में है। उसके दो बच्चे है। पति उसके चरित्र पर शक करता था। झगड़े होने लगा। आहत होकर वह दोनों बच्चों को लेकर पति से अलग हो गई। पति ने भी ट्रांसफर ग्वालियर करा लिया। पति बच्चों से चर्चा करते रहते थे। मार्च में कोरोना होने पर वह अस्पताल में भर्ती हुई। उसे अहसास हुआ कि यदि उसकी मौत कोरोना से हो गई तो बच्चों का क्या होगा। उसने पति को फोन किया। अब वे साथ रहना चाहते हैं।

नौकरी जाने के बाद पता चली मायके वालों की असलियत
पत्नी के मायके वालों के हस्तक्षेप की वजह से दंपती अलग हो गए थे। उनकी शादी 6 मार्च 2018 को हुई थी। महिला मल्टी नेशनल कंपनी में काम करती थी। उनका एक बेटा है। कोरोना काल में महिला की नौकरी गई तो पलकों पर रखने वाले मायके वालों ने मुंह फेर लिया। इस दौरान पति काे फोन करके उसकी और बेटे की खैरियत पूछी तो उसे अच्छा लगा। इसके बाद बातचीत शुरू की। पति ने कहा- चिंता करने की जरूरत नहीं। वह रुपए भेज देगा। उसने वापस आने के बारे में विचार जाने तो उसने ससुराल जाने का निर्णय लिया।

बच्चे को हुआ कोरोना तो समझ में आई परिवार की अहमियत
तलाक के लिए आवेदन दे चुके एक पुरुष ने कानूनी सहायता मांगी है। उसने बताया कि उसकी शादी को 5 साल हो गए है। आपसी विवाद के चलते उसने तलाक का केस लगाया है। पत्नी मायके में रहती है। बेटे को कोरोना हुआ तो पत्नी ने फोन पर बताया कि बच्चे की तबियत काफी खराब है। ससुराल पहुंचकर होम आइसोलेशन में रह रहे 4 वर्षीय बेटे की पत्नी के साथ देखभाल की। अब बेटा ठीक है। इस दौरान अहसास हुआ कि परिवार को उसकी कितनी जरूरत है। वे बेवजह विवाद करते थे। उसने पत्नी से बात की। अब दोनों साथ रहना चाहते हैं।

^हमें दंपतियों के एकसाथ रहने के आवेदन मिले हैं। उन्होंने तलाक के केस वापस लेने के लिए कानूनी सहायता मांगी है। उन्हें बताया गया है कि वे साथ रह सकते हैं। आपसी समझौते के लिए कानूनी प्रक्रिया बाद में पूरी हो जाएगी। - एसपीएल बुंदेला, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण

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