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पर्यावरण की खातिर...:5 साल में पीओपी की गणेश प्रतिमाओं के निर्माण में आई 75% तक की कमी

भोपाल3 दिन पहले
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शहर में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की गणेश प्रतिमा बनाने का कारोबार 5 साल में 75 फीसदी घट गया है। - Dainik Bhaskar
शहर में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की गणेश प्रतिमा बनाने का कारोबार 5 साल में 75 फीसदी घट गया है।

शहर में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की गणेश प्रतिमा बनाने का कारोबार 5 साल में 75 फीसदी घट गया है। 2017 से अब तक 1 लाख मूर्तियां शहर में तैयार की जाती थीं। नगर निगम, जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस की सख्ती के चलते ये कारोबार अब 25% यानी 25 हजार पर सिमट गया है।

हालांकि अभी भी मूर्तिकार कोई दूसरा रोजगार नहीं होने से सीजन को देखकर पीओपी की मूर्तियां बनाने में जुटे हुए हैं, लेकिन, मूर्तिकारों का दावा है कि माता मंदिर, मैनिट चौराहा, पुराना शहर, कोलार रोड, गांधी नगर, हबीबगंज नाका, करोंद चौराहे के पास विश्वकर्मा नगर में अब महज नाम मात्र की पीओपी की मूर्तियां बनाई जा रही हैं। पिछले साल लॉकडाउन की सख्ती के चलते बड़ी मूर्तियां भी कम बनाई गई थीं, क्योंकि सामूहिक रूप से मूर्ति स्थापना पर रोक थी।

मैनिट चौराहे पर रहने वाले मूर्तिकार गोपाल प्रजापति ने बताया कि उनका परिवार सालों से इस धंधे से जुड़ा है। दूसरा कोई रोजगार नहीं होने की वजह से पीओपी की मूर्ति बनाकर बेचने काम करते हैं। साथ ही मटके आदि भी बनाकर सालभर काम चलाते हैं। गणेश चतुर्थी के समय पीओपी की छोटी मूर्ति बनाकर बेचते हैं। हर साल 4 हजार मूर्ति बनाते थे, लेकिन अब महज 400 मूर्ति बना रहे हैं, जिनमें ज्यादातर ऑर्डर की रहती हैं। उनका कहना है कि सरकार रोजगार के नए अवसर से जोड़ दे तो हम क्यों मूर्ति बनाएं।

1998 से चल रही है कवायद

1998 में भोज वैटलैंड प्रोजेक्ट के दौरान तय किया गया था कि छोटे और बड़े तालाब में मूर्तियों का विसर्जन नहीं होगा। इसके लिए प्रेमपुरा घाट का निर्माण किया गया। इस दौरान यह भी तय किया गया कि बड़ी-बड़ी मूर्ति की जगह छोटी मूर्तियों का निर्माण किया जाए, ताकि विसर्जन के समय दिक्कत न हो। साथ ही पीओपी की मूर्ति मूर्तिकार को न बनाने की अपील की गई। लेकिन 33 साल बाद भी 25 फीसदी मूर्तिकार पीओपी की मूर्ति बनाने काम कर रहे हैं।

सरकार मिट्टी उपलब्ध नहीं कराती तो पीओपी की मूर्ति बनाते हैं

मूर्तिकार मोहनलाल प्रजापति ने बताया कि सरकार हर बार दावा करती है कि मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी उपलब्ध कराई जाएगी, लेकिन मिट्टी नहीं मिलने से पीओपी की मूर्तियां बनाना पड़ती हैं। इस साल भी कुछ मूर्तिकारों ने पीओपी की मूर्तियां बनाई हैं। इसमें रंगरोगन का काम इसी महीने शुरू हो जाएगा।

5 साल से कैंप लगाकर मिट्‌टी की मूर्ति बनाने कर रहे प्रेरित

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी बृजेश शर्मा ने बताया कि 5 साल से कैंप लगाकर पीओपी की जगह मिट्टी की मूर्तियां बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पीओपी की मूर्ति खरीदने वाले लोगों में अब कमी आई है। हर कोई मिट्टी की मूर्ति खरीदना चाहता है। इसके नुकसान और फायदे की जानकारी भी लोगों को हुई है।

बैठक बुलाकर समझाइश का दौर फिर शुरू करेंगे

पुलिस, प्रशासन, निगम, पीसीबी के अफसर और मूर्तिकारों की बैठक बुलाएंगे। इसमें समझाइश दी जाएगी कि वे पूरी तरह से मिट्टी की मूर्ति बनाएं। इसमें यदि किसी को कोई समस्या आएगी तो उसका समाधान कराया जाएगा। हर बार की तरह इस साल भी कैंप लगाकर ट्रेनिंग दिलाएंगे। -अविनाश लवानिया, कलेक्टर

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