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पति को सबक सिखाने महिलाएं लगा रहीं अननैचुरल सेक्स केस:दुष्कर्म नहीं बता सकती इसलिए यह रास्ता चुना, उम्रकैद से बचना मुश्किल

भोपाल3 महीने पहलेलेखक: सुनीत सक्सेना
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पति को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाकर उन्हें सबक सिखाने के लिए महिलाएं अब कानून के जानकारों की सलाह पर धारा 377 का सहारा ले रही हैं। अब महिलाएं दहेज प्रताड़ना (धारा 498 ए) के साथ अप्राकृतिक कृत्य यानी आईपीसी की धारा 377 के तहत भी एफआईआर दर्ज करा रहीं हैं। धारा 377 में आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।

ऐसे में पुलिस को आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करना पड़ता है। जमानत देने या जेल भेजने का निर्णय कोर्ट करता है। ऐसे मामले बढ़ते देख प्रदेश की महिला सुरक्षा शाखा ने अप्राकृतिक कृत्य की शिकायत करने वाली महिलाओं का मेडिकल टेस्ट कराने के बाद ही एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए हैं।

भोपाल में इस साल शुरुआती चार महीने में ही दर्ज की जा चुकी हैं ऐसी 10 एफआईआर
पारिवारिक विवाद में अब तक महिलाएं सिर्फ दहेज प्रताड़ना की शिकायत करती थीं। अब ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना के साथ-साथ पति के खिलाफ अप्राकृतिक यौन शोषण की एफआईआर कराने के मामले बढ़ गए हैं। दहेज प्रताड़ना के साथ अप्राकृतिक कृत्य के प्रकरणों का ग्राफ बढ़ने पर प्रदेश की महिला सुरक्षा शाखा ने जब मामलों का एनालिसिस किया तो तस्वीर साफ हुई कि महिलाएं पति को हर हाल में जेल भेजने के लिए धारा 377 का सहारा ले रहीं हैं। पिछले साल 16 जिलों में दहेज प्रताड़ना के साथ अप्राकृतिक कृत्य की 47 एफआईआर दर्ज हुई हैं, जिसमें भोपाल में ही 7 एफआईआर हुई थीं। इस साल भी चार महीनों में ही भोपाल के महिला थाना, शाहपुरा, मिसरोद आदि में 10 एफआईआर इस तरह की दर्ज हो चुकी हैं।

377 लग जाने पर पुलिस को आरोपी को गिरफ्तार करना ही पड़ता है
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सात साल से कम सजा वाले अपराधों में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई है। दहेज प्रताड़ना के मामले में सात साल तक की सजा का प्रावधान है, इसलिए पुलिस द्वारा आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता बल्कि उन्हें केवल नोटिस जारी कर दिया जाता है। वैवाहिक जीवन में महिला अपने पति पर दुष्कर्म का आरोप नहीं लगा सकती, इसलिए पति के खिलाफ आईपीसी की धारा 377 में एफआईआर दर्ज कराई जा रही हैं। इसमें दस साल या आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। ऐसे में आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करना पुलिस की जिम्मेदारी हो जाती है।

पिछले साल ऐसे मामलों में दर्ज केस

  • भोपाल 07
  • इंदौर 03
  • ग्वालियर 08
  • जबलपुर 06
  • उज्जैन 02
  • विदिशा 02
  • बैतूल 01
  • रायसेन 01
  • नर्मदापुरम 03
  • निवाड़ी 01
  • सागर 02
  • कटनी 03
  • रीवा 01
  • नरसिंहपुर 03
  • बालाघाट 03
  • मंडला 01

ऐसे मामलों में निचली अदालतों में सुनवाई नहीं

अप्राकृतिक कृत्य के मामलों (377) में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों की सुनवाई सेशन कोर्ट में होती है। निचली अदालत इन मामलों की सुनवाई नहीं करती है।
राजेंद्र उपाध्याय, लोक अभियोजन अधिकारी, भोपाल