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भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव:3 बार वोटिंग टली डेट, अब खर्च होने वाले रुपयों से फंसा पेंच; चुनाव अधिकारियों ने 7 दिन का दिया वक्त

भोपाल7 महीने पहले
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भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चुनाव को लेकर चुनाव अधिकारियों ने शनिवार को मीटिंग रखी। जिसमें पैनलों के सदस्यों के बीच नोंकझोंक हुई। जिन्हें चुनाव अधिकारियों ने शांत कराया। - Dainik Bhaskar
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चुनाव को लेकर चुनाव अधिकारियों ने शनिवार को मीटिंग रखी। जिसमें पैनलों के सदस्यों के बीच नोंकझोंक हुई। जिन्हें चुनाव अधिकारियों ने शांत कराया।

राजधानी के प्रतिष्ठित भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चुनाव की वोटिंग डेट शनिवार को भी तय नहीं हो पाई। चुनाव अधिकारियों ने आईएसबीटी स्थित एक होटल में सभी प्रत्याशियों की मीटिंग बुलाई थी। जिसमें कार्यवाहक अध्यक्ष ललित जैन मौजूद नहीं थे। ऐसे में चुनाव में खर्च होने वाली राशि को लेकर पेंच फंसा रहा। इस दौरान पैनलों के बीच नोंकझोंक भी हो गईं। इस पर चुनाव अधिकारियों को बीच में आना पड़ा। इधर, चुनाव अधिकारियों ने मौजूदा कार्यकारिणी को 7 दिन का वक्त दिया है। ताकि मीटिंग कर चुनाव कैसे हो, यह बता दें। वरना वे खुद चुनाव के बारे में निर्णय ले लेंगे।

शाम 6 बजे से शुरू हुई मीटिंग करीब डेढ़ घंटा चली। चुनाव अधिकारी वरिष्ठ अभिभाषक रोहित श्रोती और आकाश तेलंग ने प्रस्तावित वोटिंग और काउंटिंग की प्रोसेस बताई। वहीं, चुनाव कराने में राशि की जरूरत होने की बात कहीं। इस संबंध में उन्होंने कार्यवाहक अध्यक्ष जैन को लिखे पत्र के बारे में भी जानकारी दी। जिसका जवाब क्या मिला, यह भी बताया। कहा कि राशि मिलेगी तब ही चुनावी गाड़ी आगे बढ़ेगी। इसके बाद प्रत्याशियों से सुझाव भी मांगें। सुझावों के दौरान ही विभिन्न पैनलों के सदस्यों की एक-दूसरे से नोंकझोंक भी हुईं।

मीटिंग में ही कहासुनी, चुनाव अधिकारी बोले- हमें आपके अंदरूनी विवाद से लेना-देना नहीं

सुझाव में किसी ने अपने स्तर पर राशि एकत्रित करने तो किसी ने मौजूदा कार्यकारिणी की मीटिंग बुलाकर चर्चा करने की बात कहीं। इस बीच सदस्यों में कहासुनी होने लगी तो चुनाव अधिकारियों ने बीच में आकर मामले को शांत कराया। वहीं, उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि चैंबर के अंदरूनी विवाद से उनका कोई लेना-देना नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश पर हम चुनाव प्रक्रिया करा रहे हैं। सभी प्रत्याशी बताएं कि चुनाव कैसे होंगे। हम चुनाव को लंबे समय तक नहीं खींच सकते। उन्होंने 7 दिन का वक्त दिया है। इसके बाद वोटिंग-काउंटिंग के बारे में वे निर्णय ले लेंगे।

मीटिंग में मौजूद प्रत्याशी।
मीटिंग में मौजूद प्रत्याशी।

3 लाख रुपए का खर्चा

प्रत्याशियों ने जब चुनाव अधिकारियों से वोटिंग और काउंटिंग पर होने वाले खर्च के बारे में पूछा तो अनुमानित 3 लाख रुपए खर्च होने की बात कहीं गई। हाईकोर्ट में पिटीशन लगाने वाले सदस्यों ने खुद राशि देने का सुझाव दिया तो इस पर आपत्ति भी ली गई।

3 महीने से सुर्खियों में चुनाव

चैंबर के चुनाव पिछले 3 महीने से सुर्खियों में बने हुए हैं। पहले चुनाव 29 अगस्त को होने वाले थे, लेकिन 26 अगस्त को SDM मनोज उपाध्याय ने कोविड गाइडलाइन का हवाला देकर चुनाव पर रोक लगा दी थी। इसके बाद कलेक्टर के कथित मौखिक आश्वासन का हवाला देते हुए मुकेश सेन ने 12 सितंबर को दूसरी तिथि घोषित की, लेकिन पर्यूषण पर्व का हवाला देते हुए चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों ने कार्यवाहक अध्यक्ष जैन के साथ चैंबर भवन पर कब्जा जमा लिया था। वहीं, सेन से इस्तीफा ले लिया गया। यह मामला काफी सुर्खियों में रहा।

आखिरकार तत्कालीन चुनाव अधिकारी सेन ने मीटिंग बुलाकर वोटिंग 14 नवंबर को कराने की घोषणा की थी, लेकिन इससे पहले 9 नवंबर को जबलपुर हाईकोर्ट ने चैंबर के कार्यवाहक अध्यक्ष जैन की याचिका पर सुनवाई की थी। जैन ने सचिव मुकेश सेन के चुनाव अधिकारी होने पर सवाल उठाते हुए 14 नवंबर को घोषित चुनाव पर रोक लगाने की मांग की थी।

इस पर हाईकोर्ट ने चुनाव अधिकारी सेन को चुनाव कार्यक्रम से बाहर करने के आदेश जरूर दिए, लेकिन चुनाव पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। साथ ही वरिष्ठ अभिभाषक रोहित श्रोती, आकाश तेलंग और आंशुल अग्रवाल को सहायक चुनाव अधिकारी नियुक्त किया था।

बावजूद आगे नहीं बढ़ी वोटिंग की प्रोसेस

वरिष्ठ अभिभाषकों को चुनाव कराने की जिम्मेदारी मिल गई। बावजूद वोटिंग की प्रोसेस आगे नहीं बढ़ पाई। दरअसल, चैंबर के बैंक अकाउंट से राशि निकालने के लिए अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। इसके बाद ही राशि निकाली जा चुकी है। वर्तमान में चैंबर के खाते में डेढ़ लाख से ज्यादा रुपए जमा है।

चुनाव अधिकारियों ने 10 नवंबर को सचिव सेन को पत्र लिखकर राशि, प्रभार और दस्तावेज देने को कहा था। इसके बाद सचिव और कोषाध्यक्ष ने बैंक चेक पर हस्ताक्षर कर दिए, लेकिन अध्यक्ष के हस्ताक्षर नहीं हो सके। इसके बाद चुनाव अधिकारियों ने कार्यवाहक अध्यक्ष जैन को चिट्‌ठी लिखकर राशि देने को कहा था। राशि नहीं मिल पाने पर ही शनिवार को मीटिंग बुलाई गई थी।

4 पैनल के बीच मुकाबला

बता दें कि प्रस्तावित चुनाव में परिवर्तन, सद्भावना, प्रगतिशील एवं व्यापारी का साथ, सबका विकास पैनल के 55 प्रत्याशी मैदान में हैं। वे 24 पदों के लिए चुनाव लड़ रहे थे। इनमें अध्यक्ष समेत 3 उपाध्यक्ष, 1 महामंत्री, 2 मंत्री, 1 कोषाध्यक्ष, 1 सह-कोषाध्यक्ष और 15 कार्यकारिणी शामिल हैं। हालांकि परिवर्तन, सद्भावना एवं प्रगतिशील पैनल के बीच मुख्य मुकाबला था। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चुनाव तीन बार टल चुके हैं। 8 सितंबर को चैंबर के ऑफिस में हंगामा भी हुआ था।

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