भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव:80% वोटिंग, 3484 व्यापारी वोट डालने नहीं पहुंचे; श्यामला हिल्स थाने में जमा कराई पेटियां

भोपाल6 महीने पहले
चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव में वोट डालते मतदाता।

राजधानी के प्रतिष्ठित भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चुनाव के लिए वोटिंग शनिवार सुबह 9 से शाम 5 बजे तक हुई। कुल 1962 में से 1522 व्यापारियों ने वोट डाले। यानी करीब 80% वोटिंग हुई। वोटिंग के तुरंत बाद ही मत पेटियां श्यामला हिल्स थाने में जमा करा दी गई। 9 नवंबर को सुबह 9 बजे से काउंटिंग होगी।

मानस भवन श्यामला हिल्स में वोटिंग हुई। सुबह से ही यहां पर सभी पैनल के उम्मीदवार पहुंच गए। 9 बजे से वोटिंग शुरू हुई। शुरुआती 2 से 3 घंटे में काफी कम वोट डाले गए थे, लेकिन दोपहर में वोटिंग बढ़ गई और व्यापारी वोट डालने के लिए पहुंचने लगे। मानव भवन के बाहर बड़ी संख्या में उम्मीदवार और मतदाता मौजूद थे। पैनलों ने अपने-अपने टेंट भी लगा रखे थे। वोटिंग के सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे, इसलिए 38 पोलिंग बूथ बनाए गए थे।

पैरों में कैंडिडेट्स... वोटिंग के बाद कुछ ऐसा दिखा मतदान केंद्र का नजारा।
पैरों में कैंडिडेट्स... वोटिंग के बाद कुछ ऐसा दिखा मतदान केंद्र का नजारा।

​​​​​​बड़े डोम में वोटिंग, कोविड गाइडलाइन का पालन

चुनाव अधिकारी श्रोती ने बताया, वोटिंग के लिए बड़े से डोम में 38 बूथ बनाए गए थे। बेरिकेडिंग भी की गई। इससे सोशल डिस्टेंसिंग रही। डोम में एक-दूसरे को निर्धारित दूरी के हिसाब से बैठाया जा गया। एक बार में 38 व्यापारी वोट डाल रहे थे।

वोट डालने की मनुहार

अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष समेत अन्य पदों पर उतरे उम्मीदवार मतदाताओं से उनके पक्ष में वोट डालने की गुहार लगा रहे हैं। कुछ उम्मीदवारों ने मतदाताओं का गुलाब के फूल देकर स्वागत किया।

बिना आईडी के एंट्री नहीं
चुनाव के दौरान कोई हंगामा न हो, इसलिए पुलिसकर्मी मौजूद थे। बिना आईडी प्रुफ के किसी को भी एंट्री नहीं दी जा रही थी।

मतदान स्थल के बाहर पैनलों के टेंट लगे हुए थे।
मतदान स्थल के बाहर पैनलों के टेंट लगे हुए थे।

4 महीने से सुर्खियों में रहे चुनाव, अब हुई वोटिंग की प्रोसेस

चैंबर के चुनाव पिछले 4 महीने से सुर्खियों में बने हुए थे। कभी प्रशासन की रोक तो कभी चैंबर के ऑफिस में विवाद और फिर हाईकोर्ट में मामला पहुंचने से वोटिंग की डेट तय नहीं हो पाई थी। 27 नवंबर को चुनाव अधिकारियों ने चुनाव की डेट तय करने के लिए मीटिंग भी बुलाई थी, लेकिन मामला चुनाव में खर्च होने वाली राशि को लेकर अटक गया था। आखिरकार राशि का यह मामला भी सुलझा। 18 दिसंबर को कार्यवाहक अध्यक्ष ललित जैन ने चुनाव अधिकारी वरिष्ठ अभिभाषक रोहित श्रोती और आकाश तैलंग को राशि सौंप दी थी। इसके बाद चुनाव की डेट फाइनल की गई थी।

चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चुनाव के दौरान खड़े लोग।
चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चुनाव के दौरान खड़े लोग।
वोटिंग के लिए की गई व्यवस्था।
वोटिंग के लिए की गई व्यवस्था।

ऐसे सुर्खियों में बने रहे चुनाव

पहले चुनाव 29 अगस्त को होने वाले थे, लेकिन 26 अगस्त को SDM मनोज उपाध्याय ने कोविड गाइडलाइन का हवाला देकर चुनाव पर रोक लगा दी थी। इसके बाद कलेक्टर के कथित मौखिक आश्वासन का हवाला देते हुए मुकेश सेन ने 12 सितंबर को दूसरी तिथि घोषित की, लेकिन पर्यूषण पर्व का हवाला देते हुए चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों ने कार्यवाहक अध्यक्ष जैन के साथ चैंबर भवन पर कब्जा जमा लिया था। वहीं, सेन से इस्तीफा ले लिया गया। यह मामला काफी सुर्खियों में रहा।

आखिरकार तत्कालीन चुनाव अधिकारी सेन ने मीटिंग बुलाकर वोटिंग 14 नवंबर को कराने की घोषणा की थी, लेकिन इससे पहले 9 नवंबर को जबलपुर हाईकोर्ट ने चैंबर के कार्यवाहक अध्यक्ष जैन की याचिका पर सुनवाई की थी। जैन ने सचिव मुकेश सेन के चुनाव अधिकारी होने पर सवाल उठाते हुए 14 नवंबर को घोषित चुनाव पर रोक लगाने की मांग की थी।

इस पर हाईकोर्ट ने चुनाव अधिकारी सेन को चुनाव कार्यक्रम से बाहर करने के आदेश जरूर दिए, लेकिन चुनाव पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। साथ ही वरिष्ठ अभिभाषक रोहित श्रोती, आकाश तेलंग और आंशुल अग्रवाल को सहायक चुनाव अधिकारी नियुक्त किया था।

2 पैनलों के बीच मुख्य मुकाबला

इस बार के चुनाव में राजनीतिक रंग भी देखने को मिल रहा है। दो प्रमुख पैनल सद्भावना और प्रगतिशील के जयादातर कैंडिडेट्स BJP और कांग्रेस से जुड़े हैं। इस कारण चुनाव की शुरुआत से अब तक राजनीतिक रंग छाया रहा।

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