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रायसेन के इस गांव में होती है मजदूरों की नीलामी!:सुनारी सलामतपुर में मजदूरी ही रोजगार का विकल्प; रोज होता मोल-भाव; कईयों ने गांव छोड़ा

भोपाल5 महीने पहलेलेखक: नीलेंद्र पटेल

रायसेन जिले का सुनारी सलामतपुर गांव की दूरी भोपाल से महज 35 किलोमीटर है। गांव से थोड़ी ही दूर से कर्क रेखा निकलती है। यहां कई बौद्ध स्मारक हैं। औद्योगिक क्षेत्र दीवानगंज और पर्यटन स्थल सांची भी पास ही में हैं। इस गांव की और खासियतें जानिए फिर करेंगे इसकी बदकिस्मती की बात।

ये गांव मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुकी दिवंगत सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र विदिशा-रायसेन में आता है। भाजपा के दिग्गज नेता और कई बार मंत्री रहे डॉ. गौरीशंकर शेजवार और वर्तमान में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी के विधानसभा क्षेत्र सांची में भी ये आता है।

यहां पंचायत चुनाव के तीसरे चरण में 8 जुलाई को मतदान होना है। सामान्य महिला के लिए आरक्षित सीट से 5 प्रत्याशी मैदान में हैं। आबादी करीब 8 हजार और मतदाता 4200 हैं। गांव में हर जगह प्रत्याशियों के बैनर पोस्टर लगे हुए हैं। लाउड स्पीकर लगी प्रचार करती गाड़ियां में गांव में लगी हुई हैं। पंचायत चुनाव के बीच दैनिक भास्कर का चुनावी रथ और टीम गांव का जायजा लेने पहुंची। पढ़िए, सलामतपुर से ग्राउंड रिपोर्ट..

अब करते हैं बदकिस्मती की बात

रेलवे स्टेशन पर बना पीठा (वो जगह जहां मजदूर इसलिए जमा होते हैं कि कोई उन्हें काम के लिए कोई ले जाएगा। इसके लिए उनसे एक दिन की मजदूरी का मोलभाव भी किया जाता है। इसमें महिला-पुरुष दोनों शामिल होते हैं। मजदूरी तय होने पर इन्हें यहां से ले जाया जाता है ) यहां ग्रामीण रोज सुबह आ जाते हैं। जिसको जो मजदूर पंसद आ जाए उसे वो मोलभाव कर काम के लिए ले जा सकता है। यहां खड़े मजदूरों से बात करने पर पता चला कि यहां रोजगार के नाम पर सिर्फ मजदूरी करने का विकल्प है। पूरे दिन मजदूरी करने के बाद उन्हें मुश्किल से 200 से 250 रुपए मिल पाते हैं। हैरत की बात यह है कि ये मजदूरी भी इन्हें रोज नहीं मिल पाती। कई दिन इन्हें पीठा से वापस लौट जाना पड़ता है।

गांव में रोजगार की समस्या है। मजदूरी भी रोज-रोज नहीं मिलती।
गांव में रोजगार की समस्या है। मजदूरी भी रोज-रोज नहीं मिलती।

मजदूरी भी रोज-रोज नहीं मिलती

71 साल के शीतल रेड्डी बताते हैं कि इस क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या रोजगार की है। लोगों को मजदूरी का काम भी रोज नहीं मिल पाता है। मनरेगा के तहत भी काम नहीं मिलता है। बेरोजगारी का दंश हर परिवार को डसे हुए है। हर तीसरे घर से एक व्यक्ति मजदूरी के लिए गांव से बाहर है। 63 साल के मुनव्वर अहमद बताते हैं कि क्षेत्र में रोजगार ना मिलने की वजह से लोग पलायन भी कर रहे हैं। लोग काम की तलाश में विदिशा, मंडीदीप और भोपाल जाते हैं। बाहर जाकर भी उन्हें सिर्फ मजदूरी का काम ही मिल पाता है। कई लोग काम ढूंढने मध्यप्रदेश से बाहर अहमदाबाद, मुबंई जैसे शहरों में भी जाते हैं।

14 साल के शमशेर का बचपन छिना
‘मेरे पिता सईद मजदूर हैं। सारा पैसा शराब में उड़ा देते हैं। मां सईदा विकलांग है। जब हम लोग पिता से शराब पीने से मना करते हैं तो वे हमें मारते-पीटते हैं। ऐसे में दो वक्त की रोटी के लिए पैसे जुटाने के लिए मुझे ही मजदूरी ढूंढनी पड़ती है। लॉकडाउन से पहले मैं स्कूल जाया करता था, लेकिन लॉकडाउन के बाद से स्कूल जाना भी बंद हो गया। पिता भी हम लोगों को छोड़कर भोपाल भाग गए। विकलांग मां एक घर में 700 रुपए महीने की साफ-सफाई की नौकरी करती है। ऐसे में घर का खर्च चलाना तो दूर, खाने के लिए अनाज तक की व्यवस्था नहीं हो पाती। मजबूर होकर मुझे मजदूरी करनी पड़ रही है। मेरे साथ के बच्चे स्कूल जाते हैं, खेलते-कूदते हैं। लेकिन, मुझे काम पर जाना पड़ता है। उससे छोटी दो बहनें हैं। बड़ा भाई ड्राइवर है। वह अक्सर बाहर रहता है। चौथी में पढ़ता था। 9 साल की उम्र में उसने पहली कक्षा में दाखिला लिया था।' (यह कहानी 14 साल के उस शमशेर की है, जो पढ़ाई छोड़कर मजदूरी के लिए भटक रहा है।)

14 साल का शमशेर को पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करना पड़ रहा है।
14 साल का शमशेर को पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करना पड़ रहा है।

सोया फैक्ट्री बंद होने से बेराजगार हुए लोग
सलामतपुर के रहने वाले जगदीश ने बताया कि वे पहले क्षेत्र की सोया फैक्ट्री में काम करते थे, लेकिन फैक्ट्री बंद होने के बाद बेरोजगार हो गए। (जब फैक्ट्री चालू थी उसमें डेढ़ हजार लोग काम करते थे।)

किसानों पर 7 हार्स पावर का कनेक्शन लेने का दबाव
सुनारी गांव के किसान बिजली विभाग के अधिकारियों की मनमानी से परेशान हैं। किसानों ने बताया कि ट्यूबवेल में भले ही तीन हार्स पावर का मोटर लगाए, लेकिन कनेक्शन सात हार्स पावर का ही लेना पड़ता है। शिकायत करने पर कनेक्शन काट देते हैं। किसानों ने इसके बिजली बिल भी दिखाएं। जिनमें अधिकतर किसानों के कनेक्शन सात हार्सपावर से अधिक के मिले।

5 महिला प्रत्याशी, पति संभाल रहे प्रचार
सरपंच पद के लिए दुर्गा बाई, लक्ष्मी बाई, मनीता, वर्षा यादव, प्रतिभा चुनावी मैदान में हैं। हालांकि इन महिलाओं में कोई भी चुनाव प्रचार में नहीं मिला। इनके पति ही गांव में प्रचार का जिम्मा संभाल रहे हैं। मनीता अविवाहित हैं। वह अपनी मां के घर में रहकर बच्चों को पढ़ाती हैं। वह प्रत्याशियों में सबसे कम उम्र की भी हैं।

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