महिला कॉन्स्टेबल बनेगी पुरुष:बचपन से जी रही थी लड़कों जैसी जिंदगी, अब MP सरकार से मिली जेंडर चेंज की मंजूरी

भोपाल2 महीने पहले
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मध्यप्रदेश में महिला कॉन्स्टेबल अब पुरुष बनेगी। इसके लिए वह जेंडर चेंज कराएगी। राज्य गृह विभाग ने गुरुवार को महिला कॉन्स्टेबल को लिंग बदलने की अनुमति दे दी है। लिंग परिवर्तन की प्रोसेस पूरी होने के बाद महिला की पहचान पुरुष कॉन्स्टेबल के रूप में होगी।

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ राजेश राजौरा ने बताया कि मध्यप्रदेश का यह पहला केस है, जिसमें सरकार ने अपने किसी कर्मचारी को लिंग बदलने की इजाजत दी है।

डॉ. राजौरा ने बताया कि महिला कॉन्स्टेबल अमिता (परिवर्तित नाम) प्रदेश के एक जिले में पदस्थ है। उसे बचपन से ही ‘जेंडर आइडेंटिटी डिसआर्डर’ की प्रॉब्लम थी। इसकी पुष्टि राष्ट्रीय स्तर के मनोचिकित्सकों की तरफ से की गई थी। इस बीमारी से उसे शरीर और लैंगिंक स्वभाव मिसमैच लगता था। महिला कॉन्स्टेबल पुरुषों की तरह ड्यूटी करती है। उन्होंने बताया कि कॉन्स्टेबल ने लिंग परिवर्तन के लिए पुलिस मुख्यालय को आवेदन दिया था। मुख्यालय ने गृह विभाग से इसके वास्ते अनुमति मांगी थी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद 1 दिसंबर को अनुमति दी गई। अब महिला कॉन्स्टेबल जेंडर चेंज करा सकेगी।

क्या होता है आइडेंटिटी डिसऑर्डर या जेंडर डायसोफोरिया
आइडेंटिटी डिसऑर्डर (identity disorder) या जेंडर डायसोफोरिया (gender dysphoria) होने पर एक लड़का, लड़की की तरह। एक लड़की, लड़के की तरह व्यवहार करती है। दोनों ही अपोजिट लिंग के अनुसार अपनी जिंदगी जीना चाहते हैं। दोनों ही अपोजिट बर्ताव में खुद को ज्यादा सहज महसूस करते हैं।

कब से दिखने लगते हैं इसके लक्षण
आइडेंटिटी डिसऑर्डर या जेंडर डायसोफोरिया के लक्षण तो कुछ में बचपन से ही दिखना शुरू हो जाते हैं, लेकिन ज्यादातर रिपोर्ट में यह सामने आया है कि इन आदतों को 10-12 साल के बच्चों में आसानी से देखा जा सकता है। अगर वह आइडेंटिटी डिसऑर्डर (identity disorder) या जेंडर डायसोफोरिया से ग्रसित है, जैसे कोई पुरुष है तो वह महिलाओं की तरह कपड़े पहनना, मेकअप करना और इशारे करता है। वहीं महिला को पुरुष की तरह आचरण करती है।

ऑपरेशन के बाद क्या बदलाव आते हैं
कुछ लोग इस सर्जरी के बाद सेक्स लाइफ को लेकर चिंता करते हैं, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे परेशानी होगी। ऑपरेशन के बाद लोगों की सेक्स लाइफ (Sex Life) भी पहले की तरह सामान्य होती है। पुरुष से महिला बनने वाले मां तो नहीं बन सकते, लेकिन सरोगेसी (Surrogacy) या बच्चा गोद ले सकते हैं। ऑपरेशन के बाद कम से कम एक साल तक हार्मोनल थेरेपी लेनी पड़ती है। कई बार पूरी जिंदगी भी हॉर्मोनल थेरेपी लेने की जरूरत पड़ती है। महिला से पुरुष बने लोगों को जीवनभर हॉर्मोनल थैरेपी लेनी पड़ती है।

ऐसे करते हैं बदलाव
इस ऑपरेशन में लगभग 5-6 घंटे का समय लगता है। इस दौरान ब्रेस्ट, जननांगों और चेहरे की सर्जरी की जाती है।

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