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कोरोना काल में किसानों ने बनाई सुखद स्थिति:गेहूं के उत्पादन में हम पिछड़े लेकिन चना और साेयाबीन की पैदावार बढ़ाई

भोपालएक महीने पहले
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कोरोना के कारण पैदा हुई विषम परिस्थितियों में भी प्रदेश के किसानों ने जी-तोड़ मेहनत करके फसल उत्पादन के मामले में अच्छे संकेत दिए है। गेहूं की पैदावार में हम थोड़ा पिछड़ गए हैं लेकिन चना और सोयाबीन की पैदावार के मामले में प्रदेश के लिए सुखद स्थिति है। गेहूं की पैदावार पिछले साल के मुकाबले कुछ घटी है लेकिन कोरोना के पहले वर्ष 2018-19 के मुकाबले इस साल कुछ ज्यादा ही रही है।

सरकार ने अभी तक 110 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी समर्थन मूल्य पर कर ली है। समर्थन मूल्य पर खरीदी 25 मई तक होगी। ताजा हालात को देखते हुए यह तिथि बढ़ाई जा सकती है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर 129 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था। इस महीने के अंत तक 125 लाख मीट्रिक टन गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने का अनुमान है।

कृषि अफसरों के अनुसार इस साल प्रदेश में 33.46 लाख मीट्रिक टन चना की पैदावार हुई है जो पिछले साल से 3 लाख मीट्रिक टन ज्यादा है। इसी तरह सोयाबीन का उत्पादन पिछले साल से 10 लाख मीट्रिक टन ज्यादा हुआ है। इस साल बदली हुई परिस्थितियों में गेहूं के पहले चना, मसूर और सरसों की सरकारी खरीद की जा रही है।

प्रदेश के 78 लाख किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और 80 लाख किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत आर्थिक मदद दी गई है, जिसके चलते किसानों ने फसलों की पैदावार बढ़ाने का प्रयास किया। इस साल गर्मी की फसलों का रकबा 5 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 6 लाख हेक्टेयर कर दिया गया है। इस 1 लाख हेक्टेयर नए क्षेत्र में मूंग की पैदावार करने का लक्ष्य रखा गया है।

किसानों की मेहनत और नई किस्मों से बढ़ा उत्पादन
हमने पिछले साल 16 हजार एडवाइजरी जारी की, जिनसे 11 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। हमने चना और सोयाबीन की 4 नई किस्में विकसित की थी, जिनसे किसानों का उत्पादन भी बढ़ा और उन्हें फसल के दाम भी अच्छे मिले।
--डॉ. एमपी जैन, संचालक, अनुसंधान सेवाएं, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर

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