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MP में बेरोजगारों की सीख देने वाली कहानी:कोरोनाकाल में नौकरी छिनी, इंजीनियर भोपाल में बेचने लगे छिंदवाड़ा के दालवड़े

भोपाल6 महीने पहलेलेखक: विजय सिंह बघेल

प्रदेश में कई पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार हैं। ऐसे ही तीन युवा इंजीनियरों ने 'छिंदवाड़ा स्पेशल चाय-नाश्ता' स्टार्टअप शुरू किया है। कोरोनाकाल में नौकरी चली जाने के बाद उनके सामने रोजी-रोटी का संकट था। इससे परेशान इन युवाओं ने अपने गृह क्षेत्र के पारंपरिक नाश्ते दालवड़े को प्रमोट करने की ठानी। उनके यहां हर शाम को छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट और बैतूल जिले के रहने वाले लोग नाश्ता करने पहुंचते हैं। वे तीनों पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपने ठेले पर नाश्ता करने का न्योता देने भी जाएंगे।

अशोका गार्डन थाने के पास रहने वाले रामकुमार चौकीकर ने 2014 में भोपाल से बीई मैकेनिकल इंजीनियरिंग में कॉलेज में टॉप किया था। उसके बाद वे जॉब करने लगे, लेकिन कोरोना संकटकाल में उनकी जॉब छिन गई। किराए से रहने वाले रामकुमार के सामने परिवार के भरण पोषण का संकट आ गया। भोपाल में उनके क्षेत्र के कई लोग रहते हैं, जो लोकल दालवड़े बहुत पसंद करते हैं। यह देखते हुए उन्होंने अपने साले और छोटे भाई के साथ छिंदवाड़ा चाय-नाश्ता के नाम से स्टार्टअप शुरू कर दिया। उनका कहना है कि बेरोजगारी का रोना रोते रहने से अच्छा है, लोगों को उनके गांव से जोड़कर रखा जाए। बेरोजगारों के इस कदम पर आप अपनी राय दे सकते हैं...

अशोका गार्डन चौराहे पर रोज शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक रामकुमार अपने छोटे भाई मनोज और साले मयूर बरवड़े के साथ ठेला लगाते हैं।
अशोका गार्डन चौराहे पर रोज शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक रामकुमार अपने छोटे भाई मनोज और साले मयूर बरवड़े के साथ ठेला लगाते हैं।

दिन में करते हैं कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी
अशोका गार्डन चौराहे पर रोज शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक रामकुमार अपने छोटे भाई मनोज और साले मयूर बरवड़े के साथ ठेला लगाते हैं। दिन में तीनों कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी करते हैं। रामकुमार के भाई मनोज भी मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीई कर चुके हैं। मयूर बरवडे़ ने भोपाल के निजी कॉलेज से 2020 में बीई (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) में फर्स्ट क्लास पास की है। इसके बाद डेढ़ साल तक जॉब भी सर्च की।

प्रदेश में 30 लाख बेरोजगार

मध्यप्रदेश में 30 लाख से अधिक पढ़े-लिखे बेरोजगार हैं। ये प्रदेश के रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत हैं। इसके अलावा कोरोनाकाल में लाखों लोगों की नौकरी छिन गई। यानी बेरोजगारों की संख्या पंजीकृतों से अधिक है। बेरोजगारी से परेशान लोगों के खुदकुशी तक के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में छिंदवाड़ा के ये इंजीनियर बेरोजगारों को स्वरोजगार की प्रेरणा भी दे रहे हैं।

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