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जन संकल्प से हारेगा कोरोना:ऑक्सीजन लेवल घटने पर अस्पताल पहुंचा, वहां मुझसे ज्यादा दूसरों को बेड की जरूरत; घर पर ही सिलेंडर का इंतजाम किया, पूरे परिवार ने साथ मिलकर कोरोना को हराया

भोपाल6 महीने पहले
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होशंगाबाद रोड निवासी आरएन साहू, पत्नी, बड़े बेटे और बहू के साथ। - Dainik Bhaskar
होशंगाबाद रोड निवासी आरएन साहू, पत्नी, बड़े बेटे और बहू के साथ।

आरएन साहू | कोरोना वॉरियर हमने साहस और धैर्य से ही कोरोना से जंग जीती है। मैं लोक निर्माण विभाग में इंजीनियर हूं। पिछले साल मार्च में मुझे विभागीय कर्तव्यों के अतिरिक्त कोरोना कंटेनमेंट एरिया बनाने का जिम्मा सौंपा गया था। मेरे पास बागसेवनिया, कटारा हिल्स एवं मिसरोद थाना क्षेत्र थे। लेकिन इस साल 10 अप्रैल को मुझे, पत्नी अंजना, बड़े बेटे अविनाश और बहू शालिनी को एकसाथ कोरोना हो गया।

मेरा ऑक्सीजन लेवल 86% तक पहुंच गया था। मैं जरा भी नहीं घबराया और अपने फैमिली डॉक्टर संजय टंडन से फोन पर परामर्श लेता रहा। लेकिन, मेरा ऑक्सीजन लेवल लगातार कम हो रहा था तो डॉक्टर ने मुझे अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी। उनकी सलाह पर मैं, छोटे बेटे अभिजीत के साथ अस्पताल तलाशने लग गया। छोटा बेटा अभिजीत कोरोना मुक्त था। उसने मेरी कार में ही ऑक्सीजन सिलेंडर रखकर उसे एंबुलेंस बनाया और मुझे एम्स हॉस्पिटल ले गया, जहां पर मेरे लिए, पहले से बेड उपलब्ध करवाने तहसीलदार मनीष शर्मा मौजूद थे, लेकिन मैंने देखा कि एम्स में हालात बहुत खराब थे।

वहां मुझसे ज्यादा दूसरों को बेड की जरूरत थी, इसलिए मैं वहां बेड न लेते हुए घर वापस आ गया। घर आने के बाद मेरा ऑक्सीजन लेवल लगातार घट रहा था, इसे देखते हुए भेल क्षेत्र में रहने वाले एक दोस्त के सहयोग से घर पर सिलेंडर मंगा लिया। इस बीच अचानक बहू शालिनी की स्थिति बिगड़ गई। उसे भी सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। यह देख उसे 11 मील स्थित एक हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा। इलाज से फर्क नहीं पड़ रहा था, इसलिए 20 घंटे बाद ही बहू को भी वापस ले आया और घर पर ही उसका इलाज शुरू कर दिया।

हम सभी को फैमिली डॉक्टर की सलाह से दिन में तीन बार इंजेक्शन लगाए गए और ड्रिप भी चढ़ाई गईं। पत्नी अंजना पॉजिटिव होने के बाद भी हम सभी को समय पर भोजन उपलब्ध कराती रही। 25 अप्रैल को सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। परिवार की पॉजिटिव सोच और धैर्य से ही हमने कोरोना को मात देकर यह जंग जीती।

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