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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का इंटरव्यू​​​​​​​:कुरैशी बोले-पढ़े-लिखे मुसलमान लड़कों को हिंदू पढ़ी-लिखी लड़कियां उड़ाकर ले जाती हैं, मुसलमान औरतों के एंगल से इसे किसी ने नहीं देखा

भोपाल3 महीने पहलेलेखक: उपमिता वाजपेयी
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'सोचा था मुसलमानों की आबादी हिंदुओं से ज्यादा हो गई, तो मैं देश का PM बनूंगा, लेकिन जब जनसंख्या के जानकारों से पूछा तो वे बोले कि अगले 1000 साल तक तो यह नहीं हो सकता।' यह कहना है देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एस. वाय. कुरैशी का। उन्होंने मुसलमानों की आबादी, एक से ज्यादा शादियां, तीन तलाक, लव जिहाद, हिजाब और कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर भास्कर की स्थानीय संपादक उपमिता वाजपेयी से बेबाकी से बात की। यहां पढ़िए उनसे बातचीत के चुनिंदा अंश...

सवाल: क्या मुसलमान, हिंदुओं के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं?
जवाब: ये प्रोपेगैंडा कई साल से चल रहा है कि मुसलमान कई बच्चे पैदा करते हैं। चार-चार शादियां करते हैं। स्लोगन बनाया गया था कि हम पांच हमारे पच्चीस, लेकिन रिसर्च ये नहीं कहती। ये सच है कि मुसलमानों में फैमिली प्लानिंग सबसे कम है, लेकिन उसका मजहब से कोई ताल्लुक नहीं है। 1991 में मुसलमानों से हिंदू 30 करोड़ ज्यादा थे, अब 80 करोड़ ज्यादा हैं। इससे कहां लगता है कि मुसलमान हिंदुओं से ज्यादा हो जाएंगे।

मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर दिनेश सिंह से एक मैथेमेटिकल मॉडल बनवाया। ये पूछने कि बताओ जैसा कि कहा जा रहा है, तो कितनी जल्दी मुसलमानों की मेजॉरिटी हो जाएगी? मैंने सोचा था मैं देश का प्रधानमंत्री बनूंगा। वो बोले, साहब 1000 साल तक तो आप नहीं बन सकते।

सवाल: मुसलमानों में एक से ज्यादा शादियों की बात कही जाती है, क्या ये वजह है जनसंख्या बढ़ने की?
जवाब: चार बीवियां रखना जेंडर रेश्यो के हिसाब से नामुमकिन है। 1000 मर्दों पर 920-22 औरतें हैं। यानी हर मर्द को एक औरत भी नहीं मिलने वाली। 80 आदमी गैर शादीशुदा रह जाते हैं, तो दूसरी-तीसरी कहां से मिलेगी। अगर मिल भी जाती है तो ये जनसंख्या के लिए अच्छा है। दो औरतों की दो मर्दों से शादी होती, तो ज्यादा बच्चे होते, एक मर्द से दो औरतों ने शादी की तो कम बच्चे पैदा करेंगे।

भारत सरकार की 1975 की स्टडी है, उसमें पाया गया कि सभी कौमों में एक से ज्यादा शादी का सबसे कम ट्रेंड मुसलमानों में है। बस मुसलमानों पर इसका ठप्पा लगा है। मैंने अपनी किताब में मुसलमानों का ये भ्रम भी तोड़ा है कि इस्लाम उन्हें इसकी इजाजत देता है। कुरआन में सिर्फ एक आयत है, जो इसकी बात करती है वो भी बेवा और यतीम औरतों से निकाह की बात करता है।

सवाल: तीन तलाक का मुसलमानों पर कोई असर हुआ?
जवाब: जो जाहिल हैं, वही तीन तलाक बोलते हैं। तीन तलाक का मुसलमान औरतों को नुकसान ही हुआ है। शौहर को जेल हुई, तो बच्चे भूखे मर जाएंगे।

सवाल: लव जिहाद पर क्या कहेंगे?
जवाब: मेरे और मेरी पत्नी के बीच लव जिहाद है, मेरे घर में बेटियां भी लव जिहाद करती हैं। लव की कोई सीमा नहीं होती। वैसे तो लव जिहाद से मुसलमान लड़कियां सबसे ज्यादा नुकसान में हैं। पढ़े-लिखे मुसलमान लड़कों को हिंदू पढ़ी-लिखी लड़कियां उड़ाकर ले जाती हैं। मुसलमान औरतों के एंगल से इसे किसी ने देखा ही नहीं।

सवाल: लव जिहाद पर मध्यप्रदेश में कानून लाया गया, ये कितना जरूरी है?
जवाब: आप जितना भी मुसलमान को बदनाम करने की कोशिश करो, उतना कम है। इसलिए ही ये कानून लाए। कितने केस में लड़की कह देती है कि मैं अपने मुसलमान पति के साथ जाऊंगी।

सवाल: कश्मीरी पंडित-मुसलमानों से जुड़े विवाद को सच मानते हैं?
जवाब: पंडितों के साथ ज्यादती हुई ये सच है, लेकिन पंडितों को मारा तो मुसलमानों को भी मारा। मानवता से मतलब होना चाहिए, मजहब से नहीं। ये तो वही हुआ कि जो काम आतंकवादी करना चाहते थे, वो काम अब ये फिल्म कर रही है। जनता को बांट रही है।

सवाल: कई जगह मुसलमानों ने वैक्सीनेशन को इस्लाम के खिलाफ बताया और टीके नहीं लगवाए?
जवाब: ये जहालत की बात है। मुसलमानों ने पोलियो के टीके का भी विरोध किया था इनकी वजह से हम पोलियो मुक्त होने में 4 साल पीछे हो गए। इन्होंने कहा कि ये टीके लगवाने से बच्चे नहीं पैदा कर पाएंगे और फिर वैक्सीन नहीं लगवाई।

सवाल: योगी की जीत लोकतंत्र की जीत है या सांप्रदायिकता की?
जवाब: योगी की जीत सांप्रदायिकता की ही जीत है। पोलराइजेशन पिछले 20 सालों से चुनावी हथकंडा है। हालात ये हैं कि दो बच्चे भी आमने-सामने लड़ रहे हों तो उसे पोलराइजेशन करार दिया जाता है।

सवाल: हम पोलराइजेशन के फेस से गुजर रहे हैं, ये कैसे तय होगा?
जवाब: बंटवारे के वक्त सबसे ज्यादा पोलराइजेशन हुआ। फिर बाबरी के समय और वर्तमान ये पोलराइजेशन का देश में तीसरा फेज है। देश की जनता को तेजी से सांप्रदायिक करवाया जा रहा है। भारत सेक्युलर है, क्योंकि हिंदू सेक्युलर हैं। तभी बंटवारा हुआ तो पाकिस्तान मुसलमान देश बना, लेकिन भारत हिंदू देश नहीं सेक्युलर देश बना। तब सब कुछ सामान्य हो गया, तो उम्मीद करता हूं अभी का वक्त भी निकल जाएगा।

सवाल: EVM को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, अखिलेश ने कहा पोस्टल में वो जीत रहे हैं, तो EVM में हारे कैसे?
जवाब: मैं EVM का समर्थक हूं। पोस्टल और EVM के नतीजे हमेशा उलट होते हैं। पोस्टल हमेशा BJP के हक में जाता है। मैं EVM को भरोसेमंद इसलिए मानता हूं, क्योंकि अगर उसमें गड़बड़ होती तो बंगाल का चुनाव भाजपा नहीं हारती। भाजपा ने बंगाल चुनाव में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। बैलट पर लौटने का सवाल ही नहीं। हां और पुख्ता करना है तो वीवीपैट की गिनती करवा लो।

सवाल: क्या इलेक्शन कमीशन पर भरोसा कम हुआ है?
जवाब: हां, अफसोस लेकिन ये सच है। इलेक्शन कमीशन पर देश का सबसे ज्यादा भरोसा था। मुझे ऐसा कहने में भी दुख होता है। इस पर मैं कुछ बोलना नहीं चाहता। ऐसा लगेगा अपने बाद के लोगों को बुरा कह रहा है। इसकी वजह वहां के लोग हैं। कुछ मजबूत शेषन साहब जैसे लोग मिलेंगे, कुछ थोड़े कमजोर, कुछ सरकारी चमचे मिलेंगे। इसके अपाइंटमेंट को बदलना होगा। कॉलेजियम सिस्टम की तरह। इलेक्शन कमीशन में जो बहादुरी थी, उस पर सवाल है। उस पर कोई उंगली उठाता है तो मुझे तकलीफ होती है, लगता है कोई मुझे ही थप्पड़ मार रहा है।

सवाल: हिजाब क्या कुरान का हिस्सा है, क्या इस पर विवाद सही है?
जवाब: कुरान का हिस्सा नहीं, लेकिन ये जरूर कहा गया है कि मर्द-औरत दोनों को शालीन कपड़े पहनने चाहिए। कॉलेज में बैन की बात हुई, लेकिन वहां तो यूनिफॉर्म नहीं होती। स्कूल यूनिफॉर्म में सिखों की पगड़ी, सिंदूर की इजाजत है तो फिर हिजाब से कैसी दिक्कत। हिजाब जरूरी है या नहीं ये जज साहब थोड़े ही बताएंगे ये मौलाना बताएंगे। मौलाना IPC के फैसले देने लगें तो क्या ये सही होगा?

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