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घर की ऑक्सीजन हैं ये बेटियां:इनकी मदद से किसी अपने ने 94 तो किसी ने 85 की उम्र में कोरोना को हराया

भोपालएक महीने पहले
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बेटी योग टीचर है, उसी की टिप्स काम आई, और हार गया कोरोना। - Dainik Bhaskar
बेटी योग टीचर है, उसी की टिप्स काम आई, और हार गया कोरोना।

अपनों का साथ जिंदगी की हर मुश्किल काे आसां कर देता है। कोरोना के मामले में भी यह बात सच साबित हुई है। आज बात उन बेटियों की जिन्होंने कोरोना से लड़ने में अपनों की मदद की और तब तक डटी रही, जब तक कि कोरोना हार न गया। खास बात यह जिन लोगों ने इस कोरोना पर विजय पाई है, उनमें सभी बुजुर्ग हैं। इसमें दो की उम्र तो 85 पार है।

बेटी योग टीचर है, उसी की टिप्स काम आई, और हार गया कोरोना

जब अपने साथ खड़े हों तो फिर डर कैसा। मेरी 52 वर्षीय बेटी एचआर लता योग टीचर है। कोरोना से मुझे कभी डर नहीं लगा। क्योंकि मेरी दैनिक जीवन शैली बहुत ही सधी हुई थी। परिवार का एक सदस्य दिल्ली गया था, वो वहां से लौटा तो उसे बुखार आया, जांच कराने पर उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद मुझे भी बुखार आया, बेटी नहीं मानी तो मैंने भी जांच कराई। 27 अप्रैल को मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। बेटी की जिद पर दवाएं लेनी शुरू कीं। उसी के कहने पर रोज जल नेति क्रिया करती। तुलसी-अदरक का उबला पानी पिया। लता रोजाना मेरा ध्यान रखती। तभी इस उम्र में कोरोना काे मात दे पाई। -जैसा 94 वर्षीय शकुंतला देवी ने बताया

शुक्र है पापा को समय पर भोपाल ले आए

मेरे पिता देवीशरण भार्गव किसान हैं। उम्र 63 साल है। बैरसिया के दिलौद गांव में रहते हैं। यहां अस्पताल नहीं है। पापा काे 24 अप्रैल को चक्कर आया, पहले से उन्हें बुखार भी था। उन्हें शुगर-ब्लड प्रेशर की भी शिकायत है। हम उन्हें बैरसिया ले गए। यहां रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हम उन्हें घर ले गए, होम आइसोलेशन में रखा। कुछ दिनों बाद तबीयत खराब हुई तो फिर बैरसिया ले गए। 27 को ऑक्सीजन लेवल 85 था। बैरसिया में डॉक्टरों ने इलाज से मना कर दिया तो पिता को ऑटो से ही भोपाल ले आई। काफी भटकने के बाद जहांगीराबाद में एक अस्पताल में बेड खाली मिला। यहां पर 5 दिन बाद पिता की हालत में सुधार आया। यदि पिता को भोपाल नहीं लाते तो परेशानी बढ़ जाती। -मुस्कान भार्गव

खुद संक्रमित, लेकिन दादी का रखा ख्याल

13 अप्रैल को बेटा ओपी पाठक पॉजिटिव हुआ। वह रेलवे के चीफ ऑपरेटिंग इंस्पेक्टर के पद से रिटायर हुआ है। हम लहारपुर क्रॉसिंग के पास स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहते हैं। मुझे कोरोना के लक्षण महसूस हुए, रिपोर्ट पॉजिटिव आई। अन्य 3 सदस्य भी पॉजिटिव आए। इसमें 21 वर्षीय पोती ऐश्वर्या भी शामिल थी। 19 को मेरा ऑक्सीजन लेवल 80 था। लेकिने हॉस्पिटल जाने से इंकार कर दिया। मेरी पोती जो संक्रमित थी। उसने खुद रेलवे हॉस्पिटल के डॉ. पंकज माहेश्वरी से फोन पर संपर्क किया और मेरे लिए ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की व्यवस्था करवाई। खुद संक्रमित होने के बाद भी उसने मेरे स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान दिया। -जैसा 86 वर्षीय चंद्रावती देवी ने बताया

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