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सिर्फ मुंह ही क्यों, आप आंखें भी बंद कर लें:आप मंत्री हैं, आपने ही नियम बनाए और अब आप मौन धरने के नाम पर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रहे हैं

भोपाल11 दिन पहले
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आपको लगता नहीं कि यह भीड़ है और इससे कोरोना का खतरा है। - Dainik Bhaskar
आपको लगता नहीं कि यह भीड़ है और इससे कोरोना का खतरा है।

ये दो तस्वीरें हैं मप्र के उन दो सबसे बड़े शहरों की, जहां सबसे ज्यादा संक्रमित आ रहे हैं। पहली तस्वीर भोपाल और दूसरी इंदौर की। ये लोग सरकार की पार्टी यानी भाजपा से जुड़े हैं। इनमें कई मंत्री हैं, जिन्होंने कोरोना गाइडलाइन तैयार की है। कई आपदा प्रबंधन कमेटी के सदस्य हैं। ये लोग पंजाब में पीएम की सुरक्षा में हुई चूक के विरोध में अपने शहर में गांधी प्रतिमा के सामने धरना देने बैठे थे, लेकिन अफसोस ये कि नियम बनाने वाले खुद डिस्टेंसिंग का कायदा भूल गए।

सरकार की सीख सिर्फ जनता के लिए ?

जनता को कोरोना से बचाने के लिए दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी... की नसीहत देने वाले गृह मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री तीनों मौजूद है। हमने इनसे पूछा कि मौन धरना देते समय सोशल डिस्टेंसिंग कैसे भूल गए तो ये जवाब मिले...

रामेश्वर शर्मा, विधायक हुजूर और सदस्य आपदा प्रबंधन कमेटी

मौन धरने में सभी तरह के नियमों का पालन किया गया। सभी ने मास्क लगाए थे। सेनिटाइज बार बार किया गया। लगभग डेढ़ गज की दूरी पर ही सभी बैठे थे

सुमित पचौरी जिला अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, भोपाल

भाजपा ने भी गाइड लाइन बनाई है। सभी को पालन करने के लिए कहा गया है। हम भी पालन करते हैं। मास्क सभी ने लगाया था।

15 दिन में 20 गुना फैला कोरोना... और इन्हीं लोगों ने भीड़ जुटाने पर पाबंदी लगाई है

इंदौर. गांधी प्रतिमा के सामने शुक्रवार को पोस्टर लेकर बैठे इन लोगों में प्रदेश के मंत्री सहित आपदा प्रबंध समिति के प्रमुख सदस्य मौजूद हैं, जिनके ऊपर शहर को कोरोना संक्रमण से बचाने की जिम्मेदारी है। मंगलवार को बैठक में इन्हीं लोगों ने बड़े-बड़े दावे किए थे। इनकी अनुशंसा पर ही राज्य सरकार ने भीड़ भरे आयोजनों पर रोक लगाई है। शहरवासियों ने स्वप्रेरणा से ही शादियों सहित 100 से ज्यादा बड़े सामाजिक व धार्मिक आयोजन निरस्त कर दिए हैं। दो दिन पहले हिंदू महासभा के 50 कार्यकर्ताओं पर यहीं प्रदर्शन के लिए छोटी ग्वालटोली थाने में एफआईआर की गई थी।

शहर ने टाले आयोजन...

  • अग्रवाल व कोष्टी समाज ने 9 जनवरी काे होने वाला परिचय सम्मेलन।
  • जायसवाल समाज का 8 व 9 का कार्यक्रम स्थगित।
  • संस्था सृजन ने पितृ पर्वत पर 9 जनवरी का आयोजन।
  • माहेश्वरी समाज ने 8 व 9 जनवरी का उमंग मेला।

गौरव रणदिवे, भाजपा नगर अध्यक्ष, सदस्य, आपदा प्रबंधन समित

कांग्रेस का रवैया दुःखद रहा। ऐसे में धरना जरूरी था। मगर हमने बाकी सारे आयोजन सीमित या न के बराबर कर दिए हैं।

तुलसी सिलावट, जल संसाधन मंत्री, सदस्य, आपदा प्रबंध समिति

प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला था। हमने सिर्फ मौन धरना दिया। सभी मास्क लगाए हुए थे।

मधु वर्मा, पूर्व आईडीए अध्यक्ष, सदस्य, आपदा प्रबंध समिति

गंभीर विषय था, इसलिए पार्टी के लिए बात रखना जरूरी था। भीड़ बिलकुल न हो, इसका ध्यान रखा।

सुदर्शन गुप्ता, पूर्व विधायक, सदस्य, आपदा प्रबंध समिति

कोविड को ध्यान में रखते हुए बड़ा आंदोलन नहीं किया। मौन धरना दिया। बड़े आयोजन पहले ही रद्द किए जा चुके हैं।

ये थी अनुशंसाएं - जिला आपदा प्रबंध समिति ने मंगलवार को लिए थे ये फैसले

  • बिना अनुमति बड़े आयोजन, धरना, प्रदर्शन नहीं होने दिए जाएंगेे।
  • मास्क नहीं लगाने वालों पर जुर्माना किया जाएगा।

धरना-प्रदर्शन पर रोक नहीं

अभी धरना-प्रदर्शन पर रोक नहीं लगाई गई है। मेले जरूर प्रतिबंधित किए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर इन पर पाबंदी लगाने पर भी विचार करेंगे।

वैधानिक कार्रवाई करेंगे

रीगल पर किए गए इस धरना-प्रदर्शन पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में अनुमति ली गई थी या नहीं इसकी भी पड़ताल की जाएगी।