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अधिक मास का बताया महत्व...:पांच महीने का होगा चातुर्मास: कमलेश शास्त्री

रायसेन12 दिन पहले
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हर साल हम देखते हैं कि श्राद्ध पक्ष के पन्द्रह दिन बाद नवरात्र स्थापना हो जाती है। इस बार ऐसा नहीं हैं। अधिकमास लगने के कारण नवरात्र श्राद्ध खत्म होने के एक महीने बाद शुरू होंगे। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास एवं मलमास भी कहते हैं। पंडित कमलेश शास्त्री ने बताया कि चातुर्मास जो हमेशा चार महीने का होता है, इस बार पांच महीने का होगा। चातुर्मास लगने से विवाह, मुंडन, कर्ण छेदन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे। इस काल में पूजन पाठ, व्रत उपवास और साधना का विशेष महत्व होता है। इस दौरान देव सो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद ही देव जागृत होते हैं। इस साल 17 सितंबर 2020 को श्राद्ध खत्म होंगे। इसके अगले दिन अधिमास शुरू हो जायेगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। इसके बाद 17 अक्टूबर से नवरात्रि व्रत रखे जायेंगे। उन्होंने बताया कि एक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब छह घंटे का होता है, जबकि एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। ये अंतर हर तीन वर्ष में लगभग एक माह के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है, जिसे अतिरिक्त होने की वजह से अधिकमास का नाम दिया गया है। अधिकमास को कुछ स्थानों पर मलमास भी कहते हैं। दरअसल इसकी वजह यह है कि इस पूरे महीने में शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इस पूरे माह में सूर्य संक्रांति न होने के कारण यह महीना मलिन मान लिया जाता है। इस कारण लोग इसे मलमास भी कहते हैं।

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