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परेशानियों का सामना:सात साल से नल जल योजना बंद, हैंडपंप भी खराब, गर्मी आते ही मंडराने लगा जलसंकट

रायसेनएक महीने पहले
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  • 25 साल पुरानी योजना के पाइप भी सड़ चुके, कई बार वरिष्ठ अफसरों को करवा चुके अवगत

नगर से करीब 6 किमी दूर सांईखेड़ा गांव में पिछले 7 सालों से नलजल योजना बंद पड़ी हुई है, जिसको सुधरवाने की तरफ पंचायत के जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है। परिणाम स्वरुप ग्रामीणों को पानी के लिए गर्मियों की शुरुआत में ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि यहां के सरकारी हैंडपंप भी बंद पड़े हुए हैं जिसके चलते ग्रामीण खेतों व घर में लगे निजी टयूबवेलों के जरिए पानी की व्यवस्था जुटा रहे हैं, लेकिन जो सिर्फ सरकारी नलों पर निर्भर है उनको परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद अफसर यहां पर पानी की व्यवस्था को लेकर अनदेखी कर रहे हैं।

अफसरों की अनदेखी के चलते अब ग्रामीणों ने आंदोलन की रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। यदि जल्द ही पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो अफसरों के खिलाफ गुस्सा फूट सकता है। एक ओर कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम को लेकर अफसरों ने अपना संपूर्ण ध्यान केंद्रित कर दिया है यही बजह है कि नागरिकों की मूलभूत समस्याओं को लेकर ध्यान नहीं दिया है। यही अनदेखी लोगों की मुसीबत बनती जा रही है। ग्रामीण अंचलों में पेयजल संकट गहराता जा रहा हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसर पेयजल समस्या का निराकरण किए जाने को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। हालात यह है कि अभी अभी पूरी तरह से गर्मी शुरू नहीं हुई और ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। 6हजार लोगों की इस आबादी में निजी ट्यूबवेल वाले ग्रामीणों की पानी की पूर्ति कर रहे हैं।

निजी स्त्रोत बने ग्रामीणों का सहारा
गांव के ही कुछ लोग जिनके यहां निजी जल स्त्रोत है वह पानी के लिए परेशान हो रहे ग्रामीणों के लिए पानी उपलब्ध करा रहे हैं। यहां से ग्रामीण पानी भर कर ले जाते है। ग्रामीण कई बार ग्राम पंचायत के नुमाइंदों को अवगत करा कर समस्या का निराकरण करने का आग्रह कर चुके हैं, लेकिन किसी ने भी ग्रामीणों की पेयजल समस्या के निराकरण को लेकर कोई पहल नहीं की हैं। परिणाम स्वरुप ग्रामीणों में अफसरों को लेकर खासी नाराजगी बनी हुई हैं। पानी की समस्या का निराकरण का वैकल्पिक रूप से निराकरण किए जाने को लेकर प्रशासन के पास कोई कार्य योजना नहीं है।

अफसरों की अनदेखी से समस्या
जिम्मेदार अफसरों का कहना है कि ग्रामीण स्वयं ही पानी की व्यवस्था करे। पानी के परिवहन करने के निर्देश नहीं है। गांव के केशव, सोनू, किरण, कैलाश, नंदराम, शोभाबाई, हरिराम, काशीराम आदि ने बताया कि पानी को लेकर खासी परेशानी हो रही है। हैंडपंप बंद पड़े हुए हैं। ग्राम पंचायत सांईखेड़ा के सचिव गजेंद्र लोधी ने बताया कि गांव की नलजल योजना 25 साल पुरानी है। व जीर्ण शीर्ण हो गई है। बीते करीब 7 साल से नल जल योजना पूर्णतः बंद है। वाटर लेबल भी लगातार गिर रहा है। इसकी जानकारी से वरिष्ठ कार्यालय को अवगत कराया जा चुका है।

गांव में 8 जगह लगे हैंडपंप, एक भी चालू नहीं
वैसे तो इस गांव में 8 स्थानों पर हैंडपंप लगे हुए हैं, जिनके माध्यम से ग्रामीणों की पानी की जरूरत पूरी होती है, लेकिन इन हैंडपंपों में से एक भी चालू नहीं होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मियों की शुरुआत में ग्रामीण बूंद बूंद पानी के तरस रहे हैं तो आने वाले समय में नवतपों और मई जून की गर्मियों में क्या हालत होंगे यह आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं।
जलजीवन मिशन योजना में करवाएंगे व्यवस्था
^सांईखेड़ा सहित अन्य पेयजल ग्रस्त गांवों में पानी की व्यवस्था को लेकर पीएचई विभाग के अधिकारियों से बात कर कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। अभी 20 गांवों को जल जीवन मिशन योजना में शामिल किया गया है। आवश्यकता अनुसार गांव में किसी मद से पेयजल की व्यवस्था भी कराई जा सकती है।
-रश्मि चौहान, सीईओ, जपं, सिलवानी।

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