कड़ाके की ठंड:पड़ाेस के 5 जिलों से ज्यादा सर्द रही रात, सीजन में पहली बार 50 पर पारा

रायसेनएक वर्ष पहले
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  • करीब 3.50 लाख हेक्टेयर में हो चुकी रबी की बोवनी, किसान चिंतित

उत्तर पश्चिम और उत्तर दिशा से आ रही सर्द हवाओं के कारण रात के तापमान में फिर एक डिग्री की गिरावट आई है। इससे जिले का न्यूनतम तापमान 6.6 से 1.6 डिग्री और घटकर 5 डिग्री पर आ गया। इससे शुक्रवार-शनिवार दरमियानी रात नजदीकी पांच जिलों की तुलना में जिले में सबसे अधिक ठंडी रही। ऐसा इसलिए क्याेंकि आसपास के जिलों में सबसे कम तापमान रायसेन में ही दर्ज हुआ है। पड़ाेसी जिले भोपाल का न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री, होशंगाबाद का 10 डिग्री, सागर का 6.8, नरसिंहपुर का 8.6, विदिशा का 6.3 डिग्री दर्ज किया गया है। तापमान 5 डिग्री पर आ जाने खेतों में लगी सब्जियों और रबी की फसलों पर दूसरे दिन फिर बर्फ जम गई । हालांकि आसमान साफ होने से धूप निकलने के कारण फसलें पाले से बच गई। वहीं अधिकतम तापमान 22.6 डिग्री रहा। कृषि और मौसम विभाग के जानकारों के मुताबिक यदि 1 डिग्री और अधिक यानि की 4 डिग्री पर पारा आ गया होता तो फसलों पर पाला पड़ जाता है। हालांकि फसलों पर पाले का नुकसान दिखाई देने में दो से तीन दिनों का समय लगता है। इसलिए पहले दिन पाले से हुए नुकसान का पता लगा पाना मुश्किल होता है।

भास्कर नॉलेज: पाले से कैसे होता है नुकसान
कृषि वैज्ञानिक डॉ स्वनिल दुबे के मुताबिक जब रात का तापमान 5 डिग्री से भी कम यानि की 3 और 4 डिग्री तक पहुंच जाता है। इसके साथ ही तेज गति से चलने वाला हवा के कारण फसलों की पत्तियों की कोशिका भित्ति फट जाती है। ऐसा होने पर तीन से चार दिनों बाद फसलें झुलसी हुई दिखाई देने लगती हैं ।
चिंता इसलिए: रबी फसलों पर बुरा असर
{गेहूं: जिले में गेहूं की फसल 30 से 33 दिन की हो गई है। कई जगह बोवनी में देरी होने से गेहूं की फसल अभी कम दिन की है। इसलिए तेज ठंड से गेहूं की फसल में नुकसान न होने की बात कही जा रही है। यहां तक की 5 डिग्री तक का तापमान गेहूं की फसल की फायदेमंद बताया जा रहा है ।
{ चना - चने की फसल पर फूल आ गया है। तापमान में बड़ी गिरावट आने और ओस जमने से फूल खराब हाेने के साथ ही झड़ने की आशंका है।

अब बढ़ेगा तापमान : भोपाल मौसम केंद्र के वैज्ञानिक जागेश्वर प्रसाद विश्वकर्मा के मुताबिक आज से हवा की दिशा बदलकर उत्तर पूर्व से हो जाएगी। इससे तापमान में बढ़ोतरी शुरु होगी।

जिले का ट्रेंड : जिले में बीते सालों में दिसंबर के आखिरी और जनवरी के पहले सप्ताह में ही रबी की फसलों पर पाला पड़ने की अधिक आशंका रहती है। इसलिए इन दिनों चिंता है।

सलाह.. पाले से फसलों को बचाने करें ये उपाय
कृषि वैज्ञानिक डॉ स्वप्निल दुबे के मुताबिक पाला पड़ने से फसलों को बहुत अधिक नुकसान होता हैं। फसलें झुलस जाती हैं। पाले से फसलों को बचाने के लिए उपाय भी किए जा सकते हैं । इन उपायों में थायो यूरिया का स्प्रे फसलों पर किया जा सकता है । इसके अलावा 300 ग्राम घुलनशील सल्फर का घोल प्रति एकड़ रकबे की फसल पर छिड़काव कर सकते हैं। वहीं सब्जियों के खेतों में टटिया लगाकर पर पाले से नुकसान को कम किया जा सकता है।
आसमान साफ होने और धूप निकलने से राहत
बीते दिनों लगातार 4 दिन तक आसमान पर बादल और कोहरा छाया रहा था । लेकिन अब कोहरा न छाने और आसमान साफ होने से सुबह के समय धूप निकल रही है । इस धूप से फसलों पर ओस की बूंदें अधिक देर तक जमी नहीं रह पाती। इससे फसलों में नुकसान होने होने से बच जाता है । कोहरा छाने की स्थिति में धूप निकलने में देरी से तेज ठंड में फसलें खराब होने से नुकसान हो जाता है।

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