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पंडित मिश्रा जिस मंदिर के बारे में बोले उसकी कहानी:शेरशाह ने मंदिर को मस्जिद में बदला; 1974 में खुले थे पट, तब से हर साल महाशिवरात्रि पर 12 घंटे खुलते हैं ताले

जलज मिश्रा/देव शाक्या (रायसेन).3 महीने पहले

पंडित प्रदीप मिश्रा ने रायसेन किले के मंदिर में लगे ताले को लेकर सोमवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज हैं और उनके राज्य में शिव कैद में हैं, तो राज्य किसी काम का नहीं है। साथ ही उन्होंने रायसेन के लोगों को धिक्कारते हुए कहा था कि शिव मंदिर में ताला डाला है और तुम दिवाली मना रहे हो। अरे.. आसपास कोई तालाब हो तो चुल्लू भर पानी भरकर ले आओ।

दैनिक भास्कर किले पर बने इस मंदिर की पूरी कहानी लाया है। मंदिर को सोमेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह फिलहाल पुरातत्व विभाग की देखरेख में है। मंदिर पर ताला क्यों लगा है? शिवरात्रि के अलावा अन्य दिनों में लोग मंदिर पर कैसे पूजा करते हैं? पढ़िए इससे जुड़ी पूरी कहानी...

रायसेन किले में 800 फीट ऊंचाई पर बने सोमेश्वर धाम मंदिर का निर्माण 10वीं से 11वीं शताब्दी के बीच हुआ था। इसे परमारकालीन राजा उदयादित्य ने बनवाया था। उस दौर में राजघराने की महिलाएं मंदिर में पूजा-अर्चना करने आती थीं। मंदिर में भगवान शंकर के 2 शिवलिंग स्थापित हैं।

मंदिर फिलहाल पुरातत्व ‌विभाग ही देख-रेख में है।
मंदिर फिलहाल पुरातत्व ‌विभाग ही देख-रेख में है।

क्यों लगा है मंदिर पर ताला
पुरातत्वविद राजीव लोचन चौबे से दैनिक भास्कर ने जब ताला लगाने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि सन् 1543 तक यह स्थान मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित रहा। इसके बाद रायसेन के राजा पूरणमल को शेरशाह ने हरा दिया। उसके शासनकाल में यहां से शिवलिंग हटाकर मस्जिद बना दी गई, लेकिन गर्भगृह के ऊपर गणेश जी की मूर्ति सहित अन्य चिन्ह स्थापित रहे। इससे यह स्पष्ट साबित होता है कि यह मंदिर है।

आजादी के बाद से सन् 1974 तक मंदिर पर ताले लगे रहे। फिर उस दौरान एक बड़ा आंदोलन हुआ था। जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री और दिवंगत कांग्रेस नेता प्रकाशचंद सेठी ने खुद मंदिर के ताले खुलवाए थे। उस दौरान केके अग्रवाल यहां के कलेक्टर थे। आंदोलन के बाद से मंदिर के पट साल में एक बार महाशिवरात्रि पर 12 घंटे के लिए खोले जाते हैं। इस दिन यहां मेले का आयोजन भी होता है।

महाशिवरात्रि पर मंदिर के पट 12 घंटे के लिए खोले जाते हैं।
महाशिवरात्रि पर मंदिर के पट 12 घंटे के लिए खोले जाते हैं।

महाशिवरात्रि पर खुलते हैं पट
पुरातत्वविद ने आगे बताया कि मंदिर की चाबी पुरातत्व विभाग के पास ही रहती है, लेकिन महाशिवरात्रि के दिन सुबह 5 बजे SDM, तहसीलदार सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के सामने मंदिर के पट पर लगे ताले खोले जाते हैं। मेले में आने वाले श्रद्धालु दिन भर मंदिर में दर्शन करते हैं। फिर शाम 5 बजे प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ही मंदिर में दोबारा ताले लगा दिए जाते हैं।

गेट पर कलावे बांधकर मांगते हैं मन्नत
महाशिवरात्रि के अलावा अन्य दिनों में यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर के दर्शन ताले लगे गेट के बाहर से ही करते हैं। मन्नत मांगने आए लोग मंदिर के दरवाजे पर कलावा और कपड़ा बांधते हैं और मन्नत पूरी होने के बाद वह कपड़ा खोलकर जाते हैं।

आम दिनों में भक्त गेट के बाहर से ही सोमेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं।
आम दिनों में भक्त गेट के बाहर से ही सोमेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं।

लोगों ने पहले दिन बताई थी कहानी
शिव महापुराण कथा के पहले दिन श्रद्धालुओं ने सोमेश्वर धाम मंदिर के विषय में पंडित प्रदीप मिश्रा को बताया था और उनसे कहा था कि साल में सिर्फ महाशिवरात्रि के दिन ही मंदिर के ताले खोले जाते हैं। इसी बात को ध्यान में रखकर सोमवार को कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने ताले खुलवाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार से अनुरोध किया।

पंडित प्रदीप मिश्रा।
पंडित प्रदीप मिश्रा।

पुरातत्व विभाग का यह है मानना
पुरातत्व विभाग का कहना है कि मंदिर इतनी ऊंचाई पर है, इसलिए देखरेख आसान नहीं है। इस दौरान मंदिर में किसी चीज का नुकसान होता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। अगर किसी अज्ञात व्यक्ति ने मंदिर में कोई तोड़फोड़ कर दी, तो माहौल भी बिगड़ सकता है।

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